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IPS बनने पर कितनी मिलती है सैलरी, समझिए भत्ते और सुविधाओं का पूरा गणित

आईपीएस अधिकारी की सैलरी 56,100 रुपये से शुरू होकर 2.25 लाख रुपये तक पहुंचती है। आइए जानते हैं रैंक के अनुसार आईपीएस अधिकारी का वेतन, भत्ते, सुविधाएं और 7वें वेतन आयोग के बाद पूरी सैलरी संरचना।

Thu, 26 Feb 2026 08:57 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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IPS बनने पर कितनी मिलती है सैलरी, समझिए भत्ते और सुविधाओं का पूरा गणित

देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों की बात होती है तो भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का नाम शीर्ष की सेवाओं में शुमार है। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, सम्मान और सेवा का ऐसा पद है जिसमें अधिकारी कानून व्यवस्था संभालते हैं, अपराध रोकते हैं और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों युवा आईपीएस बनने का सपना देखते हैं। इस सेवा की ओर आकर्षण का एक बड़ा कारण इसकी मजबूत सैलरी स्ट्रक्चर और सुविधाएं भी हैं। हालांकि इस पद तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन है, लेकिन एक बार चयन हो जाने पर करियर, सम्मान और आर्थिक स्थिरता तीनों साथ मिलते हैं।

IPS की शुरुआती सैलरी कितनी होती है

आईपीएस अधिकारी की शुरुआती बेसिक सैलरी 56,100 रुपये प्रतिमाह से शुरू होती है। यह वेतन उस समय मिलता है जब अधिकारी जूनियर स्केल पर नियुक्त होता है, यानी डिप्टी एसपी या असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के स्तर पर। जैसे जैसे अधिकारी का अनुभव बढ़ता है और प्रमोशन होता है, वैसे वैसे वेतन में बड़ा इजाफा होता जाता है। यही कारण है कि यह सेवा लंबे समय में आर्थिक रूप से भी बेहद मजबूत मानी जाती है।

7वें वेतन आयोग के बाद बदली पूरी सैलरी व्यवस्था

आईपीएस अधिकारियों की सैलरी संरचना भारत सरकार द्वारा लागू सातवां वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय होती है। इसके बाद Pay Matrix सिस्टम लागू किया गया, जिसमें अलग अलग लेवल के अनुसार वेतन निर्धारित किया जाता है। इस नई व्यवस्था में अधिकारी की सैलरी उसके पद, सेवा अवधि और जिम्मेदारी के आधार पर बढ़ती जाती है। यानी हर प्रमोशन के साथ न सिर्फ पद बड़ा होता है, बल्कि वेतन में भी बड़ा उछाल आता है।

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IPS रैंक के अनुसार कैसे बढ़ती है सैलरी

आईपीएस अधिकारियों की सैलरी चार प्रमुख स्केल पर आधारित होती है। इन्हें जूनियर स्केल, सीनियर स्केल, सुपर टाइम स्केल और उससे ऊपर के स्तर में बांटा गया है।

  • डिप्टी एसपी स्तर पर वेतन लगभग 56,100 रुपये से शुरू होता है।
  • एडिशनल एसपी बनने पर यह बढ़कर करीब 67,700 रुपये हो जाता है।
  • एसपी यानी जिले के पुलिस प्रमुख स्तर पर सैलरी लगभग 78,800 रुपये तक पहुंचती है।
  • डीआईजी रैंक पर वेतन करीब 1.31 लाख रुपये हो जाता है।
  • आईजी बनने पर अधिकारी लगभग 1.44 लाख रुपये प्रतिमाह कमाता है।
  • एडीजी स्तर पर सैलरी करीब 2.05 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।
  • डीजीपी, जो राज्य पुलिस का सबसे वरिष्ठ पद होता है, उसे लगभग 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलता है।

यानी करियर की शुरुआत जहां 56 हजार से होती है, वहीं अनुभव और जिम्मेदारी के साथ यह सैलरी कई गुना बढ़ जाती है।

सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं, कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं

आईपीएस अधिकारी की कुल आय सिर्फ बेसिक वेतन तक सीमित नहीं होती। उन्हें कई प्रकार के भत्ते दिए जाते हैं, जो उनकी जीवनशैली और कामकाज को आसान बनाते हैं। महंगाई भत्ता यानी डीए दिया जाता है, जो समय समय पर महंगाई के अनुसार बढ़ाया जाता है। हाउस रेंट अलाउंस मिलता है, हालांकि अधिकतर मामलों में सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है। यात्रा भत्ता दिया जाता है, जिससे आधिकारिक दौरे का खर्च कवर होता है। अधिकारी और उनके परिवार को व्यापक मेडिकल सुविधा मिलती है। वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षा कर्मी और स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाता है।

इन सबके अलावा बिजली, पानी, टेलीफोन जैसी कई सुविधाएं रियायती दरों पर मिलती हैं। कई जगह अधिकारियों को क्लब, जिम और अन्य सरकारी सुविधाओं का भी लाभ दिया जाता है।

IAS और IPS की सैलरी में कितना फर्क

अक्सर लोग आईएएस और आईपीएस की सैलरी की तुलना करते हैं। दोनों सेवाओं की शुरुआती सैलरी लगभग समान होती है, जो 56,100 रुपये से शुरू होती है। लेकिन शीर्ष स्तर पर आईएएस अधिकारियों का वेतन थोड़ा अधिक यानी लगभग 2.50 लाख रुपये तक जा सकता है, जबकि आईपीएस अधिकारियों का अधिकतम वेतन करीब 2.25 लाख रुपये होता है। हालांकि जिम्मेदारियों का स्वरूप अलग होता है। आईपीएस अधिकारियों का कार्यक्षेत्र ज्यादा फील्ड आधारित और चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जिसमें कानून व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े फैसले लेने होते हैं।

सैलरी के साथ मिलता है अलग पहचान का दर्जा

आईपीएस सेवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें वेतन के साथ समाज में एक अलग पहचान और सम्मान मिलता है। एक अधिकारी जिले से लेकर राज्य स्तर तक सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालता है और उसके फैसलों का सीधा असर जनता पर पड़ता है। यही वजह है कि इस सेवा को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का अवसर माना जाता है। वेतन और सुविधाएं इसे आकर्षक जरूर बनाती हैं, लेकिन इस पद की असली ताकत जिम्मेदारी, नेतृत्व और सार्वजनिक विश्वास में होती है।

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