UPSC : कहीं की कलेक्टर हो क्या, ताना ऐसा चुभा कि डॉक्टरी छोड़ बनीं IAS , कहानी यूपी की बेटी प्रियंका शुक्ला की
कहीं की कलेक्टर हो क्या, झुग्गी में रहने वाली एक महिला का यह ताना प्रियंका शुक्ला को ऐसा चुभा कि उन्होंने डॉक्टरी का पेशा छोड़ आईएएस अफसर बनने की ठानी। कलेक्टर बनकर उन्होंने उस तंज को मुंहतोड़ जवाब दिया।

IAS Priyanka Shukla Success Story : यह कहानी यूपी की उस बेटी की है जिसने एक महिला के ताने को अपनी सफलता की प्रेरणा बना लिया। पेशे से डॉक्टर रहीं प्रियंका शुक्ला ने एक झुग्गी में स्वास्थ्य संबंधी सलाह देते समय मिली चुनौती के बाद प्रशासनिक सेवा में जाने का कठिन फैसला लिया। वह देश के एक नामी मेडिकल कॉलेज से MBBS कर डॉक्टर बन चुकी थीं। अपना करियर सेट कर चुकी थीं। लेकिन समाज की और बेहतर ढंग से सेवा करने की चाह ने उन्हें अपना मेडिकल पेशा छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। प्रियंका 2009 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 73वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनीं।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से किया एमबीबीएस
प्रियंका शुक्ला के माता-पिता चाहते थे कि वह एक आईएएस अफसर बने लेकिन शुरुआत से उन्होंने डॉक्टर बनने में ज्यादा दिलचस्पी थी। प्रियंका ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास की और देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज लखनऊ स्थिति किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के MBBS कोर्स में दाखिला लिया। प्रियंका ने 2006 में केजीएमयू से MBBS पूरा किया और फिर लखनऊ में प्रैक्टिस शुरू कर दी।
वो वाकया और ताना जिसने डॉक्टर को IAS अफसर बनने के लिए मजबूर कर दिया
एक दिन किसी झुग्गी बस्ती में जाकर प्रियंका लोगों को जागरूक कर रही थीं। लोगों का चेकअप भी कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने एक महिला को गंदा पानी पीते और बच्चों को भी पिलाते देखा। प्रियंका ने महिला को रोकते हुए साफ पानी पीने की सलाह दी। इस पर महिला झल्ला गई और उसने ताना मारते हुए कहा कि तुम कहीं की कलेक्टर लग रही हो गया, जो बात मान जाएं। उस महिला का ताना प्रियंका के काफी भीतर तक चुभ गया। यही वह पल था, जिसने प्रियंका के जीवन को नया मोड़ दे दिया और उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस अफसर बनने की ठानी।
दूसरे प्रयास में यूपीएससी क्रैक
प्रियंका ने डॉक्टरी का पेशा छोड़ यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। उनके लिए ये फैसला लेना आसान नहीं था, क्योंकि वह उस समय एक सफल डॉक्टर के पद पर कार्यरत थीं। अपनी मेहनत और लगन से प्रियंका शुक्ला ने 2009 में अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की। उनकी 73वीं रैंक आई। आईएएस बनने के बाद प्रियंका को छत्तीसगढ़ कैडर मिला और उनकी पहली पोस्टिंग जशपुर जिले में हुई। कांकेर की भी वह डीएम रहीं।
सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव
प्रियंका शुक्ला सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और ट्विटर पर उनके साढ़े तीन लाख से ज्यादा और इंस्टाग्राम पर 24,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
शानदार काम को लेकर अकसर चर्चा में
प्रियंका शुक्ला अपने काम को लेकर अकसर चर्चा में रहती हैं और उनकी गिनती एक बेहतरीन आईएएस अफसरों में होती है।
यशस्वी जशपुर शिक्षा पहल के तहत काम करने के साथ-साथ, उन्होंने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के कमिश्नर-सह-निदेशक के रूप में भी कार्य किया और राज्य स्तर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का नेतृत्व किया। उन्होंने मतदाताओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए ‘जशपुर – एक प्रण’ जैसे जन अभियानों का भी संचालन किया।
पुरस्कार
- MGNREGS की पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार।
- भारत के राष्ट्रपति द्वारा 'राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार'।
- वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान उत्कृष्ट सेवा के लिए 'राष्ट्रपति का रजत पदक'।
- प्रियंका शुक्ला दिसंबर 2025 मेरा युवा भारत (MY Bharat) की पहली सीईओ बनाई गईं।
आईएएस अफसर के अलावा वो एक कंटेम्परेरी डांसर भी हैं और अच्छे-अच्छे लोगों को मात देती हैं। इसके अलावा वो कविताएं भी लिखती हैं। प्रियंका को गाने और पेंटिग्स का भी शौक है।




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