UPSC Success Story: पति ने दिया धोखा, समाज ने मारे ताने; बिना इंटरनेट के UPSC क्रैक कर IRS बन गईं कोमल
Success Story of IRS Komal Ganatra: कोमल ने सामाजिक तानों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा क्रैक की और आईआरएस (IRS) अधिकारी बनीं। कोमल की यह यात्रा किसी फिल्मी कहानी जैसी लगती है।

IRS Komal Ganatra Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए जहां कई छात्र सुख-सुविधाओं के बीच दिन-रात एक कर देते हैं, वहीं कुछ ऐसी भी कहानियां होती हैं जो विपरीत परिस्थितियों को मात देकर लिखी जाती हैं। ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है कोमल गणात्रा की। कोमल ने सामाजिक तानों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा क्रैक की और आईआरएस (IRS) अधिकारी बनीं। कोमल की यह यात्रा किसी फिल्मी कहानी जैसी लगती है, लेकिन इसमें छिपा संघर्ष और उनका हौसला पूरी तरह वास्तविक है, जो देश की लाखों बेटियों के लिए एक मिसाल है।
पिता की सीख और शुरुआती जीवन
कोमल गणात्रा मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला की रहने वाली हैं। उनका जन्म साल 1982 में हुआ था। कोमल की शुरुआती स्कूली शिक्षा गुजराती मीडियम से हुई। उनके पिता, जो पेशे से एक शिक्षक थे, उन्होंने कोमल को मात्र 4 साल की उम्र में ही यह सीख दी थी कि उन्हें बड़े होकर आईएएस (IAS) अधिकारी बनना है। पिता के मार्गदर्शन के कारण कोमल शुरू से ही पढ़ाई में काफी होनहार थीं। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के दौरान अलग-अलग विश्वविद्यालयों से तीन अलग-अलग भाषाओं में डिग्रियां हासिल कीं। उन्होंने राजकोट गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी से बीए (BA) किया और पीटीसी का कोर्स भी पूरा किया।
शादी के लिए छोड़ा इंटरव्यू और फिर मिला धोखा
साल 2008 में कोमल ने गुजरात लोक सेवा आयोग (GPSC) की मुख्य परीक्षा पास कर ली थी। वह अधिकारी बनने के बेहद करीब थीं, लेकिन उसी दौरान उनकी शादी एक एनआरआई (NRI) से तय हो गई। शादी के चलते उन्होंने प्रशासनिक सेवा के इंटरव्यू में शामिल न होने का एक बड़ा फैसला लिया। उन्हें लगा कि शादी के बाद उनकी जिंदगी खुशियों से भर जाएगी। 26 साल की उम्र में उनकी शादी न्यूजीलैंड के एक व्यवसायी से हुई। लेकिन शादी के महज 15 दिनों बाद ही उनकी दुनिया पूरी तरह बदल गई। ससुराल वालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू किया और उनके पति शादी के सिर्फ दो हफ्ते बाद ही उन्हें भारत में अकेला छोड़कर विदेश (न्यूजीलैंड) चले गए। कोमल ने अपने स्तर पर पति की तलाश करने और न्याय पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन उन्हें सिर्फ असफलता हाथ लगी।
अपनों के ताने और गांव का एकांत सफर
ससुराल से निकाले जाने के बाद कोमल अपने माता-पिता के घर सावरकुंडला लौट आईं। लेकिन यहां भी मुश्किलें कम नहीं हुईं। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने उनके हालात पर हमदर्दी जताने के बजाय उन्हें ताने मारना शुरू कर दिया। जब भी वह बाहर निकलतीं, लोग उनसे उनके पति के बारे में पूछते। इन कड़वी बातों से तंग आकर कोमल ने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपने गृहनगर से 40 किलोमीटर दूर एक सुदूर गांव में अकेले रहने का फैसला किया। गांव में उन्हें एक प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका की नौकरी मिल गई, जहां उनकी मासिक सैलरी केवल ₹5,000 थी। इसी मामूली रकम से गुजारा करते हुए उन्होंने सिस्टम का हिस्सा बनकर बदलाव लाने का संकल्प लिया और दोबारा यूपीएससी की तैयारी शुरू की।
बिना इंटरनेट और बिना अंग्रेजी अखबार के संघर्ष
वह जिस ग्रामीण इलाके में रह रही थीं, वहां यूपीएससी की तैयारी के लिए कोई सुख-सुविधा मौजूद नहीं थी। गांव में बिजली अक्सर जाती रहती थी, इंटरनेट की कोई व्यवस्था नहीं थी और करेंट अफेयर्स के लिए सबसे जरूरी माना जाने वाला अंग्रेजी का अखबार भी वहां नहीं आता था। कोमल सोमवार से शुक्रवार तक स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थीं और शनिवार-रविवार को वह कोचिंग के लिए 300 किलोमीटर का सफर तय करके अहमदाबाद जाती थीं। इस दौरान उन्होंने स्कूल से कभी छुट्टी नहीं ली। तीन बार उन्हें यूपीएससी में असफलता मिली, लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा। चौथे प्रयास (UPSC 2012) के दौरान उनका एग्जाम सेंटर मुंबई था। वह स्कूल खत्म करके पूरी रात ट्रेन में सफर कर मुंबई पहुंचीं, परीक्षा दी और तुरंत काम पर लौट आईं।
चौथे प्रयास में हासिल की 591वीं रैंक
कोमल की वर्षों की तपस्या और अटूट संकल्प आखिरकार रंग लाया। यूपीएससी 2012 की परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 591वीं रैंक हासिल की और उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ। कोमल गणात्रा की सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह कहानी है उस अदम्य साहस की, जो एक महिला को बिखरने के बाद दोबारा उठने और समाज को अपनी सफलता से करारा जवाब देने की ताकत देता है।




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