डीएलएड में आधी सीटें खाली, यूपी के युवाओं का मोहभंग; बाहरियों का बढ़ा रुझान
यूपी में डीएलएड 2025 सत्र में आधी सीटें ही भर सकीं। स्थानीय युवाओं का रुझान घटा, जबकि दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों की दिलचस्पी बढ़ी। छात्रवृत्ति पोर्टल ठप होने से छात्र परेशान।

डीएलएड 2025 सत्र में कुल सीटों के मुकाबले सिर्फ 40 फीसदी पर ही प्रवेश हो पाया। 2 लाख 39 हजार से ज्यादा सीटों में से महज करीब 95 हजार सीटें ही भर सकीं। पिछले साल के मुकाबले यह संख्या लगभग आधी रह गई है जो साफ संकेत देती है कि यूपी के युवाओं का इस कोर्स से भरोसा कम हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है लंबे समय से परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती का न आना। 2018 के बाद से भर्ती न होने के कारण युवाओं को नौकरी की उम्मीद कम नजर आ रही है। ऐसे में वे डीएलएड जैसे कोर्स में समय और पैसा लगाने से बच रहे हैं।
बाहरियों में बढ़ा क्रेज
जहां यूपी के छात्र पीछे हट रहे हैं, वहीं दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी इस मौके को भुना रहे हैं। इस साल करीब 30 फीसदी सीटों पर बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे राज्यों के छात्रों ने दाखिला लिया है। आंकड़े बताते हैं कि 1 लाख 24 हजार से ज्यादा आवेदनों में से 37 हजार से अधिक दूसरे राज्यों के थे। यानी यूपी के मुकाबले बाहरी छात्रों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
पिछले साल से बड़ा फर्क
अगर 2024 सत्र की बात करें तो उस समय करीब 1.91 लाख छात्रों ने प्रवेश लिया था, जो इस बार के मुकाबले लगभग दोगुना है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल ही पहली बार दूसरे राज्यों के लिए डीएलएड के दरवाजे खोले गए थे, लेकिन तब भी उनकी संख्या सीमित थी। इस बार वही संख्या तेजी से बढ़ गई।
छात्रवृत्ति पोर्टल ठप
उधर, समाज कल्याण विभाग का छात्रवृत्ति पोर्टल कई दिनों से बंद पड़ा है। छात्र अपना स्टेटस तक नहीं देख पा रहे हैं। मजबूरन उन्हें प्रयागराज के विकास भवन स्थित दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें यह तक पता नहीं चल पा रहा कि उनकी छात्रवृत्ति मंजूर हुई है या नहीं। वहीं अधिकारी भी साफ जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि पोर्टल ही काम नहीं कर रहा।
तकनीकी वजह बताकर टाला जा रहा मामला
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस समय बड़ी संख्या में छात्रों के खातों में छात्रवृत्ति भेजी जा रही है, इसी वजह से तकनीकी समस्या आई है और पोर्टल अस्थायी रूप से बंद है। हालांकि छात्रों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही।




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