CUET UG : सीयूईटी से मनचाहे कॉलेज की पसंदीदा स्ट्रीम कैसे मिलेगी, कैसे पाएं हाई स्कोर, काउंसलिंग का क्या रोल
CUET UG : हर छात्र को पता है कि सीयूईटी परीक्षा उच्च शिक्षा के द्वार खोलती है। यह परीक्षा क्या है? इसमें हाई स्कोर कैसे पाएं? मनचाहे विषय और संस्थान पाने की क्या हो रणनीति, यहां जानें सब कुछ

सीयूईटी यूजी यानी कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेस टेस्ट हर साल स्नातक कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित होता है। इस परीक्षा में बैठने के लिए इस साल लगभग 15 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया है। हर छात्र को पता है कि यह परीक्षा उच्च शिक्षा के द्वार खोलती है। यह परीक्षा क्या है? इसमें हाई स्कोर कैसे पाएं? मनचाहे विषय और संस्थान पाने की क्या हो रणनीति। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेस टेस्ट यानी सीयूईटी-यूजी ने स्नातक में दाखिले को पूरी बदल दिया है, जिससे अब छात्रों को मनचाहे संस्थान में प्रवेश का समान अवसर मिलता है। सत्र 2026 के लिए यह परीक्षा 11 से 31 मई के बीच संभावित है, जिसमें लगभग 14.92 लाख अभ्यर्थियों का पंजीकरण हुआ है। यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित यानी सीबीटी मोड में ली जाएगी।
पसंदीदा कॉलेज के लिए हाई स्कोर
12वीं के बाद श्रेष्ठ कॉलेज में दाखिले के लिए सीयूईटी अब पूरी प्रक्रिया का केंद्र बन चुका है, जहां एक कॉमन स्कोर से देशभर की यूनिवर्सिटीज में प्रवेश मिलता है। इसलिए इसे सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि सटीक तैयारी, रणनीति और काउंसलिंग के साथ समझना जरूरी है। परीक्षा में हर विषय के लिए 60 मिनट में 50 बहुविकल्पीय प्रश्न होते हैं, जिसमें लैंग्वेज, डोमेन (एनसीईआरटी आधारित) और जनरल टेस्ट शामिल हैं। अधिकतम 5 विषयों के साथ कुल स्कोर 1250 तक जा सकता है, इसलिए यहां औसत नहीं, बल्कि हाई स्कोर ही आपके पसंदीदा कॉलेज और कोर्स की कुंजी बनता है।
अहम है विषयों का चयन
सीयूईटी में अलग-अलग कोर्स (बीए ऑनर्स/ प्रोग्राम, बीएससी, बीकॉम, बीटेक) के लिए विषयों का चयन अलग होता है। छात्र आमतौर पर 3 से 5 (कभी 6) विषय चुनते हैं, जिनमें एक लैंग्वेज लेना अनिवार्य है। बाकी विषय 12वीं के आधार पर होते हैं। हर विषय 250 अंकों का होता है, इसलिए कुल स्कोर चुने गए विषयों पर निर्भर करता है। ज्यादा विषय लेने से अलग-अलग कोर्स के कॉम्बिनेशन विकल्प बढ़ जाते हैं। कटऑफ कॉलेज और कोर्स के अनुसार बदलता है-कहीं अच्छा कॉलेज मिलता है तो मनपसंद विषय नहीं और कहीं विषय अच्छे होते हैं तो कॉलेज की रैंकिंग कम होती है, इसलिए मिल रहे विकल्पों में से अपने लिए बेस्ट देखना पड़ता है। छात्र अपने कोर्स और यूनिवर्सिटी की पात्रता के अनुसार विषय चुनते हैं, और इन्हीं के अंकों से उनका अंतिम सीयूईटी स्कोर बनता है। कोर्स आमतौर पर 6-8 सेमेस्टर का होता है। हर सेमेस्टर में करीब 7 विषय होते है।
विषय संरचना को ऐसे समझें
परीक्षा तीन भागों में होती है-भाषा, डोमेन विषय व जनरल टेस्ट। भाषा सेक्शन में हिंदी, अंग्रेजी सहित 33 से अधिक भाषाएं शामिल हैं। डोमेन विषय 12वीं पर आधारित होते हैं, जिनमें विज्ञान, वाणिज्य और आर्ट्स/ह्यूमैनिटीज शामिल हैं। जनरल टेस्ट में जीके, करंट अफेयर्स, रीजनिंग और बेसिक मैथ्स के प्रश्न आते हैं।
तैयारी कैसी हो
● पहले पूरा सिलेबस समझें, विषयों के टॉपिक्स की सूची बनाएं और उन्हें आसान-कठिन तथा वेटेज के आधार पर बांटें।
●तैयारी में एनसीईआरटी की भूमिका सबसे अहम होती है, खासकर डोमेन विषयों के लिए। मॉक टेस्ट सीरीज भी मददगार होते हैं।
●टाइमटेबल बनाकर पढ़ाई को दैनिक, साप्ताहिक और मासिक स्तर पर बांटें, ताकि सिलेबस समय पर पूरा हो और रिवीजन के लिए समय रहेे।
तैयारी के अंतिम दिनों में
आखिरी 20-30 दिन आपकी तैयारी का परिणाम तय करते हैं। लगातार मॉक टेस्ट दें और गलतियों का विश्लेषण करें- चाहे वह कॉन्सेप्ट, समय प्रबंधन या जल्दबाजी से जुड़ी हो। रिवीजन का फोकस एनसीईआरटी और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों पर रखें, ताकि पैटर्न स्पष्ट हो। साथ ही, लंबा व थकाने वाला प्लान बनाने, बिना विश्लेषण के मॉक देते रहने, बार-बार रणनीति बदलने, नए टॉपिक्स शुरू करने और केवल रटने पर निर्भर रहने से बचें।
उच्च स्कोर की रणनीति समझें
- हर सही उत्तर पर 5 अंक मिलते हैं, तो गलत पर 1 अंक कटता है। जबकि छोड़ दिए गए प्रश्न पर न तो अंक मिलते हैं, न कटते हैं।
- खास बात यह है कि कुछ विशेष स्थितियों में छात्रों को लाभ मिल सकता है, लेकिन अक्सर छात्र इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
- यदि किसी प्रश्न के सभी विकल्प सही हों, तो उस प्रश्न को अटेम्प्ट करने वाले सभी छात्रों को अंक दिए जाते हैं।
- यदि किसी प्रश्न में कोई भी विकल्प सही नहीं पाया जाता और उसे ड्रॉप कर दिया जाता है, तब भी उस प्रश्न को अटेम्प्ट करने वाले सभी छात्रों को 5 अंक मिलते हैं।
- इसका सीधा मतलब यह है कि सीयूईटी केवल किताबी ज्ञान का नहीं, बल्कि स्मार्ट अटेम्प्ट और रिस्क मैनेजमेंट का भी खेल है।
कहां काम आएगा स्कोर
सीयूईटी स्कोर का उपयोग देश की 200 से अधिक यूनिवर्सिटीज में हो रहा है। इसमें सेंट्रल, स्टेट, डीम्ड व कई निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं, जैसे कि दिल्ली विश्वविद्यालय, एमिटी यूनिवर्सिटी, जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी आदि।
काउंसलिंग को हल्के में न लें
सीयूईटी के बाद सबसे अहम चरण काउंसलिंग का होता है, जहां छोटी-सी गलती भी आपके एडमिशन को प्रभावित कर सकती है। हर यूनिवर्सिटी की प्रक्रिया अलग होती है- रजिस्ट्रेशन, कोर्स- कॉलेज की प्रेफरेंस भरना और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन इसके मुख्य हिस्से हैं। खास तौर पर मनचाहे संस्थानों को भरते समय ध्यान रखें। यही तय करता है कि आपको कौन-सा कॉलेज मिलेगा। यदि आप केवल ड्रीम कॉलेज भरेंगे, तो सीट न मिलने पर आप काउंसलिंग से बाहर हो सकते हैं। यदि केवल बैकअप भरेंगे, तो अच्छे अंक होने के बावजूद आप खराब कॉलेज में फंस जाएंगे। इसलिए, संतुलन ही सबसे अच्छी रणनीति है। ज्यादा से ज्यादा कॉलेज और यूनिवर्सिटी के विकल्प भरें, ताकि अवसर बढ़े।
न मिले मनचाहा स्ट्रीम तो
मॉप-अप राउंड तक बने रहें, कई बार खाली सीटों पर एडमिशन मिल जाता है। साथ ही, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों जैसे एमिटी यूनिवर्सिटी, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में सीधे या अलग एंट्रेंस के जरिए भी मौके तलाशें। जरूरत पड़े तो बी.वोक, कंप्यूटर, डिजाइन या डाटा जैसे स्किल-आधारित डिप्लोमा/कोर्स के जरिए आगे बढ़ सकते हैं।




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