चली जाएगी नौकरी; CBSE की सख्त चेतावनी - कॉपियां चेक कर रहे शिक्षक सोशल मीडिया से रहें दूर
सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं की कॉपियां चेक कर रहे शिक्षकों को सख्त चेतावनी दी है कि वे सोशल मीडिया पर मूल्यांकन से जुड़ी कोई भी भ्रामक या गोपनीय जानकारी शेयर न करें।

सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं हर छात्र के जीवन का एक बेहद अहम और तनावपूर्ण पड़ाव होती हैं। 10वीं और 12वीं के एग्जाम खत्म होने के बाद, छात्रों से लेकर उनके माता पिता तक, सभी की धड़कनें रिजल्ट को लेकर तेज रहती हैं। ऐसे वक्त में अगर कोई अफवाह उड़ जाए, तो सोचिए बच्चों के जहन पर क्या असर पड़ेगा! इसी बात को ध्यान में रखते हुए, सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने एक बेहद सख्त और जरूरी कदम उठाया है। बोर्ड ने उन सभी शिक्षकों को कड़ी चेतावनी दी है जो 10वीं और 12वीं की कॉपियां चेक करने (मूल्यांकन) के काम में लगे हुए हैं।
आजकल सोशल मीडिया का दौर है। हर किसी को फेसबुक, इंस्टाग्राम या व्हाट्सएप पर अपनी बातें और दिनभर के काम रखने की जल्दी होती है। लेकिन सीबीएसई ने साफ कर दिया है कि कॉपियां चेक करने की प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय है और इससे जुड़ी कोई भी बात, तजुर्बा या राय सोशल मीडिया पर शेयर करना एक बड़ा अपराध माना जाएगा।
सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारियों से बोर्ड नाराज
दरअसल, सीबीएसई के संज्ञान में यह बात आई है कि कॉपियां चेक करने वाले कुछ शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इवैल्यूएशन से जुड़ी बातें लिख रहे हैं। कोई अपने अनुभव बांट रहा है, तो कोई कॉपियों में लिखे जवाबों का मजाक बना रहा है या फिर मार्किंग स्कीम को लेकर अपनी निजी राय दे रहा है। बोर्ड का कहना है कि इनमें से ज्यादातर पोस्ट न सिर्फ भ्रामक हैं, बल्कि पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद भी हैं।
कल्पना कीजिए, एक बच्चा जिसने दिन रात एक करके परीक्षा दी है, जब वह सोशल मीडिया पर कॉपियों की चेकिंग को लेकर कोई गैर जिम्मेदाराना या डराने वाली पोस्ट पढ़ता है, तो उसका मानसिक तनाव कितना बढ़ जाता होगा। जब कोई शिक्षक लिखता है कि "इस बार मार्किंग बहुत सख्त हो रही है" या "बच्चे कुछ पढ़कर नहीं आए", तो ये बातें व्हाट्सएप ग्रुप्स पर आग की तरह फैलती हैं। ऐसी पोस्ट्स से छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के बीच सिर्फ कंफ्यूजन और अफवाहें फैलती हैं।
गोपनीयता और प्रोटोकॉल का सख्त पहरा
सीबीएसई ने अपने आधिकारिक सर्कुलर में इस बात पर खास जोर दिया है कि कॉपियों का मूल्यांकन एक बहुत ही संवेदनशील और सीक्रेट प्रक्रिया है। इसके लिए बोर्ड ने कुछ बेहद कड़े नियम और प्रोटोकॉल बनाए हैं, जिनका पालन करना हर एक शिक्षक के लिए अनिवार्य है। बोर्ड ने शिक्षकों को याद दिलाया है कि सार्वजनिक मंचों पर इस प्रक्रिया से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक करना सख्त मना है।
अगर कोई शिक्षक सोशल मीडिया पर कुछ चंद लाइक्स और शेयर बटोरने के चक्कर में अफवाहें फैलाता है या तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है, तो इसे उनके पेशेवर आचरण (Professional Conduct) का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। आसान शब्दों में कहें तो, यह उनके काम के प्रति गद्दारी मानी जाएगी और इसके लिए उन पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सस्पेंड किया जा सकता है, स्कूल से निकाला जा सकता है, या भविष्य में बोर्ड की जिम्मेदारियों से हमेशा के लिए बैन किया जा सकता है।
संयम और गरिमा बनाए रखने की अपील
इस पूरे मामले में सीबीएसई ने शिक्षकों से अपील की है कि वे अपनी ड्यूटी करते समय संयम बरतें। एक शिक्षक समाज का आईना होता है, और उससे यह उम्मीद की जाती है कि वह परीक्षा प्रणाली की पवित्रता और ईमानदारी को बनाए रखेगा। इवैल्यूएटर्स (मूल्यांकनकर्ताओं) को इस पूरी प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता, गरिमा और एक सच्चे प्रोफेशनल की तरह व्यवहार करना चाहिए। किसी भी बच्चे का भविष्य एक शिक्षक के हाथ में होता है, इसलिए उस जिम्मेदारी को हल्के में लेना कहीं से भी जायज नहीं है।
प्रिंसिपल्स को दिए गए सख्त निर्देश
बोर्ड ने यह सर्कुलर सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों के प्रिंसिपल्स को भेजा है। उन्हें साफ शब्दों में हिदायत दी गई है कि वे बिना किसी देरी के अपने स्कूल के उन सभी शिक्षकों तक यह एडवाइजरी पहुंचा दें, जो कॉपियां चेक करने के काम में लगे हुए हैं। प्रिंसिपल्स की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने स्टाफ को इस बात की गंभीरता समझाएं कि एक छोटी सी लापरवाही उनके करियर और बच्चों के भविष्य, दोनों के लिए कितनी नुकसानदेह साबित हो सकती है।
अंत में, यह समझना जरूरी है कि बोर्ड परीक्षा सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह लाखों बच्चों की सालों की मेहनत का नतीजा होती है। इस मेहनत के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ या सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। सीबीएसई का यह कदम यकीनन छात्रों के हक में है और यह सुनिश्चित करेगा कि रिजल्ट आने तक बिना वजह की अफवाहों पर पूरी तरह से लगाम लगी रहे।




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