CBSE छात्रों के लिए बड़ा अपडेट, Re-Evaluation प्रक्रिया टली; अब इस दिन खुलेगा पोर्टल
CBSE ने पोस्ट रिजल्ट एक्टिविटीज पोर्टल की नई तारीख घोषित कर दी है। अब री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका वेरिफिकेशन के लिए आवेदन 1 जून 2026 से शुरू होंगे।

CBSE के की कॉपियों को लेकर छिड़े विवाद के बीच लाखों छात्रों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। बोर्ड ने 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के बाद शुरू होने वाली री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया है। पहले उम्मीद थी कि यह पोर्टल शुक्रवार से शुरू हो जाएगा, लेकिन अब CBSE ने साफ कर दिया है कि पोस्ट रिजल्ट एक्टिविटीज पोर्टल 1 जून 2026 से चालू होगा। बोर्ड का कहना है कि वेबसाइट को और ज्यादा मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है ताकि छात्रों को किसी तरह की तकनीकी दिक्कत का सामना न करना पड़े।
छात्रों को अब 1 जून तक करना होगा इंतजार
CBSE ने बयान जारी करते हुए कहा कि जिन छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका की जांच दोबारा करवानी है, उनके लिए पूरी प्रक्रिया को बिना गड़बड़ी और पारदर्शी तरीके से चलाना जरूरी है। इसी वजह से पोर्टल को कुछ दिन बाद शुरू किया जाएगा। बोर्ड के मुताबिक, “छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था के साथ संचालित करने के लिए पोर्टल अब 1 जून 2026 से चालू होगा।” CBSE के एक अधिकारी ने भी पुष्टि करते हुए कहा कि वेबसाइट को अभी और मजबूत किया जा रहा है, इसलिए पोर्टल तय तारीख पर शुरू नहीं हो पाएगा।
अब सवालवार दर्ज होगी आपत्ति
इस बार की सबसे बड़ी बात यह है कि छात्र पूरी कॉपी की सामान्य जांच की मांग नहीं कर पाएंगे। अब उन्हें हर सवाल के हिसाब से अलग-अलग आपत्ति दर्ज करनी होगी। यानी अगर किसी छात्र को लगता है कि किसी खास प्रश्न में सही अंक नहीं मिले हैं, तो वह उसी सवाल को चुनकर बोर्ड से दोबारा जांच की मांग कर सकेगा। इसके बाद विषय विशेषज्ञ उस सवाल का फिर से मूल्यांकन करेंगे। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया नए OSM सिस्टम के तहत की जाएगी। इसमें उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल तरीके से जांची जाती हैं।
केवल वही छात्र कर पाएंगे आवेदन
री-इवैल्यूएशन सुविधा केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी जिन्होंने पहले अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी हासिल की है। छात्र पहले अपनी कॉपी को आधिकारिक मार्किंग स्कीम से मिलाएंगे और फिर जहां गलती लगेगी, वहां आपत्ति दर्ज करेंगे। बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि आवेदन करते समय साफ और समझने लायक जानकारी दें ताकि उनकी शिकायत को आसानी से समझा जा सके।
कितनी लगेगी फीस?
CBSE के अनुसार वेरिफिकेशन के लिए प्रति उत्तर पुस्तिका 500 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि री-इवैल्यूएशन के लिए हर सवाल पर 100 रुपये फीस तय की गई है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने इससे पहले नई फीस संरचना का भी ऐलान किया था। उसके मुताबिक स्कैन कॉपी की फीस 700 रुपये से घटाकर 100 रुपये प्रति विषय कर दी गई थी। वहीं वेरिफिकेशन फीस 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये और री-इवैल्यूएशन फीस 100रुपये से घटाकर 25 रुपये प्रति सवाल कर दी गई थी। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि अगर दोबारा जांच में अंक बढ़ते हैं तो छात्रों की फीस वापस कर दी जाएगी।
OSM सिस्टम पर क्यों उठा विवाद?
इस साल CBSE ने बड़े स्तर पर OSM सिस्टम लागू किया था। इसके बाद 12वीं का पास प्रतिशत घटकर 85.20 प्रतिशत रह गया, जबकि 2025 में यह 88.39 प्रतिशत था। पिछले सात सालों में यह सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इसके बाद कई छात्रों और शिक्षकों ने सवाल उठाए कि कहीं नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम का असर मार्किंग पर तो नहीं पड़ा।
हालांकि CBSE और शिक्षा मंत्रालय लगातार इस सिस्टम का बचाव कर रहे हैं। बोर्ड का कहना है कि कॉपियों की जांच पूरी तरह प्रशिक्षित शिक्षकों ने की है और इसमें किसी तरह की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल नहीं हुआ। CBSE चेयरपर्सन राहुल सिंह के मुताबिक करीब 77 हजार शिक्षकों ने बड़े स्तर की ट्रेनिंग के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।
डिजिटल जांच से क्या फायदा बता रहा है बोर्ड?
CBSE अधिकारियों का कहना है कि OSM सिस्टम से कॉपियों की जांच ज्यादा पारदर्शी होती है। इसमें टोटलिंग की गलतियां कम होती हैं और अलग-अलग राज्यों में कॉपियां आसानी से जांची जा सकती हैं। बोर्ड का संकेत है कि विवादों के बावजूद आने वाले सालों में भी यही डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था जारी रह सकती है। इस बीच CBSE ने छात्रों को किसी भी सवाल या परेशानी के लिए टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन 1800 11 8004 और ईमेल resultcbse2026@cbseshiksha.in पर संपर्क करने की सलाह दी है।




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