CBSE के OSM ठेके में करोड़ों का खेल, उतने ही काम के लिए क्यों बढ़ाए 10 करोड़ रुपये, क्या है नया खुलासा
सीबीएसई के ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) ठेके में समान कार्य होने के बावजूद परियोजना लागत 28 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 38.46 करोड़ रुपये कर दी गई, जिससे वित्तीय हेरीफेरी के आरोप तेज हो गए हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर आंसरशीट चेक करने के लिए दिए गए ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) ठेके में कई और गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। काम और लागत के विश्लेषण से गंभीर वित्तीय विसंगतियां और अनियमितताएं दिख रही हैं। टेंडर के कागजातों और वर्क ऑर्डर पेपरों की समीक्षा करने से सामने आया है कि समान कार्य और समान उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या के बावजूद प्रोजेक्ट की लागत में 10 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी कर दी गई। दरअसल सीबीएसई की ओर से ओएसएम को लेकर जारी पहले दो टेंडरों और तीसरे टेंडर के वर्क ऑर्डर के बीच अनुमानित कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में 10 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। गौरतलब है कि तीसरा टेंडर ही सफल बोली लगाने वाली कंपनी कोएम्प एडु टेक ( Coempt Edu Teck ) को जारी किया गया था। तीसरे टेंडर में काम पहले जितना ही रहने के बावजूद ओएसएम की लागत 28 करोड़ से बढ़कर 38.46 करोड़ हो गई। इन तीनों दस्तावेजों की समीक्षा से यह बात सामने आई है। इस 10 करोड़ रुपये की भारी वृद्धि के पीछे के कारणों पर सीबीएसई ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
काम और दाम में नहीं खा रहा मेल
हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की वास्तविक संख्या के आधार पर काम की कीमत 25.39 करोड़ बैठती है, जो वर्क ऑर्डर में बताई गई कीमत का लगभग 66 फीसदी है। यह तब है जब काम उन दो टेंडरों और वर्क ऑर्डर में बताई गई मात्रा का केवल 42% ही था। यह बेमेल स्थिति पारदर्शिता की कमी को ही उजागर करती है।
तीसरे टेंडर से पहले शर्तों में दी गई ढील
फरवरी 2025 में जारी पहले टेंडर, मई 2025 में जारी दूसरे टेंडर और अगस्त 2025 में जारी तीसरे टेंडर में, स्कैन की जाने वाली और डिजिटल रूप से जांची जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या 23.8 मिलियन यानी 2.38 करोड़ बताई गई थी। ऐसा लगता है कि यह आंकड़ा इस शुरुआती अनुमान पर आधारित था कि OSM का इस्तेमाल कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं, दोनों के लिए किया जाएगा। लेकिन अंत में इसे केवल कक्षा 12 के लिए ही लागू किया गया।
पहले दो टेंडर के दौरान कोई बोली लगाने नहीं आया
ओएसएम के पहले टेंडर के लिए कोई बोली नहीं लगाने आया। दूसरे टेंडर के लिए बोली लगाने वाली चार कंपनियों में से कोई भी टेक्निकल शर्तों पर खरी नहीं उतर पाई। तीसरे टेंडर में पात्रता की शर्तों में ढील दी गई थी, खासकर स्कैनिंग जैसी अहम चीज में। पहले दो टेंडरों में स्वचालित रोबोटिक स्कैनिंग अनिवार्य थी, जबकि तीसरे में ऐसा नहीं था। इसके अलावा रिज़ॉल्यूशन को भी 300DPI से घटाकर 200DPI (डॉट्स प्रति इंच) कर दिया गया था।
इन बदलावों के बाद हैदराबाद की कंपनी कोएम्प्ट एजु टेक प्राइवेट लिमिटेड को यह ठेका मिला। कंपनी ने तकनीकी मूल्यांकन में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को केवल दो अंकों से पीछे छोड़ते हुए सफलता हासिल की। वित्तीय बोली में भी कोएम्प्ट की दरें टीसीएस की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम थीं। कंपनी ने प्रति उत्तर पुस्तिका 24.75 रुपये से 25.74 रुपये तक की दरें प्रस्तावित कीं, जबकि टीसीएस की दरें 53 से 65 रुपये प्रति पुस्तिका के बीच थीं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली मिनी रत्न श्रेणी-1 की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एडसिल (EdCIL India Limited) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "टेंडर बुलाने वाली संस्था को कॉन्ट्रैक्ट की कीमत को सही ठहराना होगा, अगर वही मात्रा या उसी तरह के काम के लिए कीमत बढ़ रही है।"
कॉन्ट्रैक्ट की अंतिम कीमत क्या थी?
एचटी को मिले वर्क ऑर्डर के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 38.46 करोड़ रुपये थी, 'जो बोर्ड द्वारा आयोजित कक्षा 10 और 12 की परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए थी। यह पक्का है कि इस वर्क ऑर्डर में मात्रा का जिक्र नहीं था, लेकिन यह देखते हुए कि यह कक्षा 10 और कक्षा 12 दोनों के लिए था, इस बात की संभावना कम है कि यह पहले दो टेंडरों से अलग रहा हो।
सीबीएसई ने एचटी के उन सवालों का जवाब नहीं दिया, जिनमें पहले दो टेंडरों और तीसरे वर्क ऑर्डर के बीच कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में ₹10 करोड़ से अधिक बढ़ोतरी के पीछे का तर्क पूछा गया था। हालांकि बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्क ऑर्डर 15 मिलियन (1.5 करोड़) उत्तर पुस्तिकाओं के अनुमान के आधार पर दिया गया था। लेकिन तब भी हिसाब मेल नहीं खाता। 23.8 मिलियन उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 28 करोड़ रुपये के हिसाब से, 15 मिलियन पुस्तिकाओं के लिए कीमत ₹17.64 करोड़ होनी चाहिए, न कि 38.46 करोड़ रुपये।
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'अनुमान और असल आंकड़ों के बीच हमेशा कुछ न कुछ अंतर रहेगा, चाहे वह बढ़ोतरी हो या कमी। बिल का भुगतान असल कॉपियों के आधार पर किया जाता है। 10 मिलियन से 15 मिलियन कॉपियों की रेंज के लिए दरें एक जैसी ही हैं। कोएम्प को असल पेमेंट, OSM पोर्टल पर मूल्यांकन के लिए स्कैन और अपलोड की गई असल कॉपियों के आधार पर किया जाएगा।'
17 मई को सीबीएसई ने बताया कि कुल 98,66,222 (9.86 मिलियन) क्लास 12 की बोर्ड उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन की गईं। स्कैनिंग की खराब क्वालिटी के कारण कुल 68,018 उत्तर पुस्तिकाएँ दोबारा स्कैन की गईं, और 13,583 उत्तर पुस्तिकाओं की क्वालिटी लगातार खराब रही, इसलिए उन्हें मैन्युअल रूप से जाँचा गया। 5 दिसंबर, 2025 के वर्क ऑर्डर दस्तावेज़ में, अलग-अलग वॉल्यूम स्लैब के हिसाब से प्रति उत्तर पुस्तिका प्रोसेसिंग चार्ज तय किए गए हैं। 15 मिलियन तक की उत्तर पुस्तिकाओं के लिए तय दर 25.74 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका है, जबकि 25 मिलियन और उससे ज़्यादा उत्तर पुस्तिकाओं के लिए यह दर घटकर ₹24.75 प्रति उत्तर पुस्तिका हो जाती है। 9,866,222 उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 25.74 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका की दर से कैलकुलेट करने पर असल पेमेंट की रकम 25.39 करोड़ बनती है। कोएम्प को इतने ही रुपये मिलने चाहिए।




साइन इन