CBSE: सीबीएसई ने स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग को बनाया अनिवार्य, नए निर्देश जारी
CBSE: सीबीएसई (CBSE) ने स्कूली छात्रों के लिए एक बहुत ही अच्छी और महत्वपूर्ण पहल की है। अब स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा।

CBSE: सीबीएसई (CBSE) ने स्कूली छात्रों के लिए एक बहुत ही अच्छी और महत्वपूर्ण पहल की है। अब स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा। बोर्ड ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी पढ़ाई की व्यवस्था में 'मानसिक स्वास्थ्य' और 'सोशल-इमोशनल लर्निंग' (भावनाओं को समझना) को अनिवार्य रूप से जोड़ें।
यह नया नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू किया गया है, ताकि छात्रों पर बोर्ड परीक्षाओं का अनावश्यक दबाव कम हो और वे खुश रहकर अपनी पढ़ाई कर सकें।
स्कूलों के लिए नए और जरूरी नियम
सीबीएसई ने स्कूलों के लिए कुछ खास बदलाव करने को कहा है:
शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग: अब स्कूल के सभी शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग साल में दो बार होगी। इसमें उन्हें सिखाया जाएगा कि अगर कोई छात्र तनाव में है या परेशान दिख रहा है, तो उसे कैसे पहचाना जाए और कैसे उसकी मदद की जाए।
स्कूल में काउंसलर का होना जरूरी: अब हर स्कूल में एक 'काउंसलर' (सलाहकार) का होना अनिवार्य है। यह काउंसलर छात्रों से बात करेगा, उन्हें तनाव दूर करने के तरीके बताएगा और करियर चुनने में उनकी मदद करेगा।
अभिभावकों के साथ संवाद: अक्सर देखा गया है कि पढ़ाई का दबाव घर से भी मिलता है। इसलिए, अब स्कूल माता-पिता के लिए भी प्रोग्राम चलाएंगे, ताकि वे समझ सकें कि बच्चे की खुशी पढ़ाई के नंबरों से कहीं ज्यादा जरूरी है।
अनाम रिकॉर्ड : स्कूल उन छात्रों का रिकॉर्ड रखेंगे जिन्हें मदद की जरूरत है, ताकि उनकी गोपनीयता बनी रहे और उन्हें शर्मिंदगी न हो।
परीक्षा और पढ़ाई के दबाव को कम करना
सीबीएसई का मानना है कि स्कूल का माहौल ऐसा होना चाहिए जहां छात्र खुलकर अपनी बात कह सकें। इसके लिए बोर्ड ने सुझाव दिए हैं:
नंबरों की दौड़ से बचें: सिर्फ ग्रेड या रैंक के पीछे भागने के बजाय, छात्रों की मेहनत और उनकी काबिलियत को महत्व दिया जाए।
लाइफ स्किल्स: पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को जीवन की चुनौतियां झेलना, अपनी भावनाओं पर काबू रखना और सही फैसले लेना भी सिखाया जाएगा।
खेल और कला का महत्व: सिर्फ किताबी ज्ञान ही सब कुछ नहीं है। खेलकूद, आर्ट्स और अन्य गतिविधियों को पढ़ाई के साथ बराबर का मौका मिलना चाहिए।
करियर को लेकर तनाव न लें
अक्सर छात्र अपने करियर को लेकर बहुत डरे रहते हैं। सीबीएसई ने कहा है कि स्कूल अब छात्रों को 'करियर काउंसलिंग' भी देंगे। इससे छात्रों को पता चलेगा कि उनके लिए कौन सा रास्ता सही है और वे बिना डरे अपने सपनों को चुन सकेंगे।
सीबीएसई की यह कोशिश है कि भारत के छात्र सिर्फ परीक्षाओं में ही अव्वल न आएं, बल्कि वे मानसिक रूप से भी मजबूत और खुशमिजाज इंसान बनें। अगर आपको या आपके किसी दोस्त को कभी भी पढ़ाई का दबाव महसूस हो, तो आप सीबीएसई की 24x7 हेल्पलाइन नंबर (1800-11-8004) पर कभी भी बात कर सकते हैं।




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