cbse class 12 result row ministry of education defends digital marking system onscreen marking 2026 CBSE 12वीं नतीजों पर उठा बवाल तो सरकार ने क्या दी सफाई, क्यों दोबारा जांचीं गईं 13 हजार कॉपियां, Career Hindi News - Hindustan
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CBSE 12वीं नतीजों पर उठा बवाल तो सरकार ने क्या दी सफाई, क्यों दोबारा जांचीं गईं 13 हजार कॉपियां

CBSE 12वीं रिजल्ट को लेकर छात्रों की शिकायतों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर सफाई पेश की है।

Sun, 17 May 2026 09:29 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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CBSE 12वीं नतीजों पर उठा बवाल तो सरकार ने क्या दी सफाई, क्यों दोबारा जांचीं गईं 13 हजार कॉपियां

सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट आने के बाद इस बार हजारों छात्रों और अभिभावकों ने नंबरों को लेकर सवाल उठाए। कई बच्चों का कहना था कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं और कॉपियों की जांच में गलती हुई है। सोशल मीडिया से लेकर स्कूलों तक इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई। इसी विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले पर विस्तार से सफाई दी। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा कि सीबीएससी का डिजिटल कॉपी जांच सिस्टम कोई नया प्रयोग नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि कुछ छात्रों को लग सकता है कि उन्हें ज्यादा नंबर मिलने चाहिए थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरी जांच प्रक्रिया गलत थी।

2014 में शुरू हुआ था डिजिटल मार्किंग सिस्टम

संजय कुमार ने बताया कि सीबीएससी ने पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम साल 2014 में शुरू किया था। उस समय तकनीकी ढांचा मजबूत नहीं होने की वजह से इसे लगातार जारी नहीं रखा जा सका। अब इस साल 12वीं बोर्ड परीक्षा में इसे दोबारा लागू किया गया। इस प्रक्रिया में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके पीडीएफ फॉर्म में बदला गया और फिर शिक्षकों ने कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठकर कॉपियां जांचीं। मंत्रालय के मुताबिक इस साल करीब 98 लाख छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन की गईं।

'टोटलिंग की गलतियां पूरी तरह खत्म हुईं'

शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल जांच का सबसे बड़ा फायदा बताते हुए कहा कि अब नंबर जोड़ने में होने वाली गलतियां लगभग खत्म हो गई हैं। पहले कई बार ऐसा होता था कि किसी सवाल के अंक सही होते थे लेकिन कुल नंबर जोड़ने में गलती हो जाती थी। अब कंप्यूटर सिस्टम के कारण ऐसी दिक्कत नहीं रहेगी। संजय कुमार ने कहा कि इस सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है और मार्किंग को ज्यादा भरोसेमंद बनाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि कॉपियों की स्कैनिंग के दौरान सुरक्षा के तीन स्तर रखे गए थे ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

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हल्की स्याही बनी बड़ी परेशानी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक दिलचस्प लेकिन गंभीर बात भी सामने आई। मंत्रालय ने बताया कि करीब 13 हजार उत्तर पुस्तिकाएं ऐसी थीं जिन्हें बार-बार स्कैन करने के बाद भी साफ तरीके से पढ़ा नहीं जा सका। इसकी वजह छात्रों द्वारा बहुत हल्के रंग की स्याही का इस्तेमाल करना था। अधिकारियों के मुताबिक कई छात्रों ने इतनी हल्की पेन से लिखा था कि स्कैन होने के बाद शब्द साफ दिखाई नहीं दे रहे थे। बाद में ऐसी सभी कॉपियों को अलग से शिक्षकों द्वारा हाथ से जांचा गया और उनके नंबर सिस्टम में जोड़े गए।

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शिक्षकों को पहले से दी गई थी ट्रेनिंग

मंत्रालय ने यह भी कहा कि डिजिटल मूल्यांकन लागू करने से पहले शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई थी। उन्हें बताया गया था कि स्क्रीन पर कॉपियां कैसे जांचनी हैं और किस तरह गलतियों से बचना है। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया गया ताकि छात्रों के साथ किसी तरह की नाइंसाफी न हो।

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रिजल्ट के बाद हेल्पलाइन भी शुरू

सीबीएसई ने छात्रों की शिकायतों को देखते हुए हेल्पलाइन और ईमेल सपोर्ट भी शुरू किया है ताकि जिन छात्रों को अपने नंबरों पर संदेह है, वे सीधे बोर्ड से संपर्क कर सकें। बोर्ड का कहना है कि हर शिकायत को गंभीरता से देखा जाएगा।

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