CBSE 10th Exam 2026: सीबीएसई बोर्ड 10वीं में स्किल सब्जेक्ट की वजह से कैसे बदलेंगे नंबर, जानें कैसे होंगे पास?
CBSE 10th Board Exam 2026: यदि कोई छात्र कक्षा 10वीं की परीक्षा में मुख्य तीन विषयों (साइंस, गणित और सोशल साइंस) में से किसी एक में फेल हो जाता है, तो उसे छठे विषय यानी स्किल सब्जेक्ट के अंकों से बदल दिया जाएगा।

CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर छात्रों के मन में अक्सर एक डर रहता है कि यदि वे किसी एक मुख्य विषय में फेल हो गए, तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। लेकिन अब छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है। सीबीएसई ने अपनी मूल्यांकन नीति में एक ऐसा बड़ा बदलाव किया है, जिससे ‘स्किल सब्जेक्ट’ अब छात्रों के लिए 'संजीवनी' का काम करेंगे।
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई छात्र कक्षा 10वीं की परीक्षा में मुख्य तीन विषयों (साइंस, गणित और सोशल साइंस) में से किसी एक में फेल हो जाता है, तो उसे छठे विषय यानी स्किल सब्जेक्ट के अंकों से बदल दिया जाएगा।
कैसे काम करता है 'बेस्ट 5' का फॉर्मूला?
सीबीएसई बोर्ड का रिजल्ट मुख्य रूप से 'बेस्ट 5' विषयों के आधार पर तैयार किया जाता है। अक्सर छात्र पांच अनिवार्य विषय और एक अतिरिक्त (छठा) विषय लेते हैं। नया नियम कहता है कि यदि आपके पास छठे विषय के रूप में कोई स्किल सब्जेक्ट (जैसे—आईटी, एआई, टूरिज्म, आदि) है, तो वह आपके रिजल्ट को बिगड़ने से बचा सकता है।
उदाहरण के लिए: यदि कोई छात्र गणित या साइंस में पासिंग मार्क्स नहीं ला पाता है, लेकिन उसने छठे विषय के रूप में 'इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी' (IT) लिया है और उसमें वह पास है, तो गणित के अंकों को आईटी के अंकों से रिप्लेस कर दिया जाएगा। इस तरह छात्र का रिजल्ट 'पास' घोषित होगा और उसकी पासिंग पर्सेंटेज भी बेहतर हो जाएगी।
भाषा विषयों के लिए भी है विशेष नियम
सीबीएसई ने केवल मुख्य विषयों के लिए ही नहीं, बल्कि भाषा के लिए भी नियम स्पष्ट किए हैं। यदि कोई छात्र भाषा के दो विषयों में से किसी एक में फेल होता है, तो उसे तीसरे भाषा विषय (यदि लिया गया है) या किसी अन्य विषय से तभी बदला जा सकता है जब वह अनिवार्य मानदंडों को पूरा करता हो। हालांकि, मुख्य फोकस साइंस, गणित और सोशल साइंस जैसे कठिन विषयों पर है, जहां अक्सर छात्र संघर्ष करते हैं।
स्किल सब्जेक्ट क्यों बन रहे हैं गेम-चेंजर?
नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत बोर्ड अब किताबी ज्ञान के बजाय कौशल विकास पर जोर दे रहा है। इस नियम के आने से छात्रों पर मुख्य विषयों का मानसिक बोझ कम हुआ है। स्किल सब्जेक्ट्स अक्सर प्रैक्टिकल आधारित होते हैं, जिनमें अंक प्राप्त करना आसान होता है। इससे छात्रों का ओवरऑल प्रतिशत बढ़ जाता है। कोडिंग, वेब डिजाइनिंग और एआई जैसे विषय छात्रों को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करते हैं।
अभिभावकों और छात्रों के लिए जरूरी सलाह
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को नौवीं कक्षा में ही छठे विषय के रूप में किसी एक स्किल सब्जेक्ट का चुनाव बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। यह केवल एक अतिरिक्त विषय नहीं है, बल्कि एक 'सुरक्षा कवच' है। यदि किसी कारणवश मुख्य परीक्षा के दिन आपकी तबीयत खराब हो जाए या किसी एक पेपर में प्रदर्शन अच्छा न रहे, तो यह छठा विषय आपकी मार्कशीट को 'फेल' होने से बचा लेगा। इस व्यवस्था से न केवल फेल होने वाले बच्चों की संख्या में कमी आएगी, बल्कि छात्रों में वोकेशनल एजुकेशन के प्रति रुचि भी बढ़ेगी।




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