CBSE का कड़ा निर्देश; किताबों का न करें इंतजार, 7 दिन के भीतर स्कूलों में शुरू करें 'तीसरी भाषा' की पढ़ाई
सीबीएसई बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अब 'तीसरी भाषा' (थर्ड लैंग्वेज) के नियम को लागू करने में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि भले ही अभी नई किताबें उपलब्ध न हों, लेकिन स्कूलों को अगले 7 दिनों के अंदर इस नियम का अनुपालन शुरू करना होगा।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देशभर के अपने एफिलिएटेड स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण और कड़ा निर्देश जारी किया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अब 'तीसरी भाषा' (थर्ड लैंग्वेज) के नियम को लागू करने में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सबसे बड़ी वाली बात यह है कि बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि भले ही अभी नई किताबें उपलब्ध न हों, लेकिन स्कूलों को अगले 7 दिनों के अंदर इस नियम का अनुपालन शुरू करना होगा।
यह निर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत 'बहुभाषावाद' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। बोर्ड का मानना है कि छात्रों को कम उम्र से ही विभिन्न भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए, जिससे उनके मानसिक और सांस्कृतिक विकास में मदद मिले।
क्या है 'तीसरी भाषा' का नया नियम?
CBSE की नई नीति के अनुसार, अब कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी अनिवार्य होगी। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। अब तक कई स्कूलों में केवल दो भाषाओं (आमतौर पर हिंदी और अंग्रेजी) पर ही ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब तीसरी भाषा को कोर्स का हिस्सा बनाना होगा। बोर्ड ने स्कूलों को यह छूट दी है कि वे अपनी सुविधा और छात्रों की पसंद के अनुसार क्षेत्रीय या विदेशी भाषाओं का चुनाव कर सकते हैं, बशर्ते वे बोर्ड के नियमों का पालन करें।
किताबें नहीं, फिर भी पढ़ाई शुरू करने का आदेश
अक्सर नए शैक्षणिक सत्र में किताबों की छपाई और वितरण में देरी हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, बोर्ड ने एक साहसिक कदम उठाया है। CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे केवल किताबों के भरोसे न बैठें। बोर्ड ने सुझाव दिया है कि स्कूल डिजिटल संसाधनों, ऑनलाइन शिक्षण सामग्री और शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए नोट्स का उपयोग करके कक्षाओं का संचालन शुरू करें। स्कूलों को 7 दिनों की समय सीमा दी गई है ताकि वे अपने टाइम-टेबल में बदलाव कर तीसरी भाषा की पढ़ाई सुनिश्चित कर सकें।
शिक्षकों और स्कूलों के सामने बड़ी चुनौती
बोर्ड के इस अचानक आए निर्देश से स्कूल प्रशासन और शिक्षकों के बीच हलचल बढ़ गई है। 7 दिनों के भीतर नई भाषा के लिए शिक्षक नियुक्त करना या मौजूदा शिक्षकों को तैयार करना एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा नीति के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यह अनुशासन जरूरी है। स्कूलों को अब तुरंत अपनी रिपोर्ट बोर्ड को भेजनी होगी कि उन्होंने इस नियम को कैसे लागू किया है।
छात्रों और अभिभावकों पर क्या होगा असर?
इस फैसले से छात्रों पर पढ़ाई का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि नई भाषा सीखना छात्रों के करियर के लिए लंबे समय में फायदेमंद होगा। अभिभावकों की चिंता यह है कि बिना किताबों के बच्चे कैसे पढ़ेंगे, लेकिन बोर्ड द्वारा डिजिटल लर्निंग पर जोर देने से इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।




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