BTech : इंजीनियरिंग की 88507 सीटें अभी भी खाली, स्पॉट एडमिशन में भारी वैकेंसी के आसार
महाराष्ट्र में इंजीनियरिंग दाखिले अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) सेल ने सोमवार को चौथे और अंतिम केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया (सीएपी) राउंड की अंतिम मेरिट लिस्ट जारी कर दी है।

महाराष्ट्र में इंजीनियरिंग दाखिले अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) सेल ने सोमवार को चौथे और अंतिम केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया (सीएपी) राउंड की अंतिम मेरिट लिस्ट जारी कर दी है। इस वर्ष रिकॉर्ड पंजीकरण के बावजूद राज्य भर में लगभग आधी उपलब्ध सीटें खाली हैं। इस बार 1.83 लाख सीटें दाखिले के लिए उपलब्ध थीं। दाखिले की क्षमता के मुकाबले 2.14 लाख छात्रों ने इंजीनियरिंग कोर्सेज के लिए पंजीकरण कराया, हालांकि तीन सीएपी राउंड के बाद केवल 95,253 उम्मीदवारों ने ही एडमिशन कंफर्म किया, जबकि 88507 सीटें अभी भी खाली हैं, जो मांग और असल कोर्स प्रेफरेंस के बीच भारी अंतर को दर्शाता है।
अकेले तीसरे सीएपी राउंड में 1.19 लाख छात्रों ने अपने चॉइस फॉर्म जमा किए जिनमें से 98253 को सीटें अलॉट की गईं। फिर भी केवल 30,412 उम्मीदवारों ने ही दाखिला कंफर्म किया। अधिकारियों ने कहा कि अंतिम राउंड में सीटें सुरक्षित करने वाले छात्रों को 2 से 4 सितंबर के बीच अपने एडमिशन को कंफर्म करना होगा। इसके बाद शेष वैकेंसी को संस्थान लेवल पर स्पॉट एडमिशन के माध्यम से भरा जाएगा।
यह डेटा छात्रों की पसंद में स्पष्ट बदलाव को भी दर्शाता है। कंप्यूटर से संबंधित और टेक्नोलॉजी संचालित क्षेत्रों में नए-नए पाठ्यक्रम अग्रणी बनकर उभर रहे हैं। उदाहरण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा साइंस, एआई और मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसी ब्रांच में ज्यादातर कॉलेजों में लगभग पूरी सीटें भर गई हैं।
कंप्यूटर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी में भी अच्छी डिमांड दर्ज की गई है, जिसमें 60% से अधिक सीटें पहले ही भर चुकी हैं। इसके उलट पारंपरिक ब्रांच जिन्हें कभी इंजीनियरिंग शिक्षा की रीढ़ माना जाता था, को अब ठंडी प्रतिक्रिया मिल रही है। उदाहरण के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 20,873 सीटें उपलब्ध थीं, लेकिन अब तक केवल 9,762 सीटें ही भरी जा सकी हैं, जो कि केवल 47% है। सिविल इंजीनियरिंग का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा, जहां 15,211 सीटों में से 7,811 छात्रों ने दाखिला लिया, जबकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 11,879 सीटों में से 5,654 छात्रों ने दाखिला पक्का किया, जो कि केवल 39% है।
ये आंकड़े उभरते हुए रोजगार बाजार को दर्शाते हैं, जहां छात्र डेटा साइंस, एआई और साइबर सिक्योरिटी जैसे मॉडर्न क्षेत्रों में अपना भविष्य देख रहे हैं। पारंपरिक इंजीनियरिंग विषय हालांकि अभी भी आवश्यक हैं लेकिन तेजी से बढ़ते तकनीकी क्षेत्रों में नौकरी की गारंटी पाना चाहने वाली पीढ़ी के लिए कम आकर्षक प्रतीत होते हैं।




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