BTech : वर्ष 2030 में किन इंजीनियरिंग स्किल्स की होगी तगड़ी डिमांड, बीटेक छात्रों से क्या रहेंगी उम्मीदें
5 साल बाद किस तरह के इंजीनियरों की डिमांड रहेगी, क्या स्किल्स चाहिए होंगी, एक दो साल में जो विद्यार्थी बीटेक में दाखिला लेंगे या जो ले रहे हैं, चार साल की डिग्री पाने के बाद उनसे किस तरह की स्किल्स होने की उम्मीद की जाएगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ग्रीन टेक्नोलॉजी और रेपिड डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में इंजीनियरिंग की फील्ड तेजी से बदल रही है। अब केवल तकनीकी ज्ञान या प्रोग्रामिंग स्किल्स ही नहीं, बल्कि आने वाले इंजीनियरों को सिस्टम थिंकर, एथिकल डिजाइनर और इंटरडिसिप्लिनेरी कोलेबोरेटर्स के रूप में खुद को बदलना होगा। एआई से शुरुआती लेवल की इंजीनयरिंग जॉब्स खत्म हो रही हैं। अब सवाल है कि 2023 तक यानी 5 साल बाद किस तरह के इंजीनियरों की डिमांड रहेगी, क्या स्किल्स चाहिए होंगी, एक दो साल में जो विद्यार्थी बीटेक में दाखिला लेंगे या जो ले रहे हैं, चार साल की डिग्री पाने के बाद उनसे किस तरह की स्किल्स होने की उम्मीद की जाएगी।
एआई, ऑटेमेशन और नया इंजीनियरिंग कोर
शूलिनी विश्वविद्यालय की ट्रस्टी और निदेशक निष्ठा शुक्ला आनंद कहती हैं कि अब हर सेक्टर में एआई आ गया है। इससे इंजीनियरिंग से जुड़े कामों की जरूरत बदल गई है। अब कंपनियों को इंजीनियरों में आने वाले वर्षों में अलग तरह की स्किल्स चाहिए होंगी। ऑटोमोटिव से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक, हर क्षेत्र में एआई का तेजी से विकास और उपयोग किया जा रहा है। इंजीनियरों को यह जानना जरूरी है कि इंजीनियरिंग चीजों में एआई का उपयोग कैसे किया जाए। उन्होंने आगे कहा, 'अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि एआई स्किल वाले कर्मचारियों को उन कर्मियों से करीब 23 फीसदी अधिक सैलरी मिलती है जिन्हें एआई स्किल्स नहीं आतीं।
सस्टेनेबिलिटी, सिस्टम थिंकिंग
जलवायु परिवर्तन, संसाधनों का अभाव और नेट-जीरो की ओर बढ़ते प्रयासों ने स्थिरता को एक कोर इंजीनियरिंग प्राथमिकता बना दिया है। इंडिया टुडे में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक निष्ठा शुक्ला आनंद कहती हैं, 'जो इंजीनियर रिन्यूवेबल एनर्जी सिस्टम में विशेषज्ञता हासिल करेंगे और सर्कुलर अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को समझेंगे, वे वास्तविक वैश्विक समस्याओं को सुलझाने में सबसे आगे होंगे।"
- इंजीनियरों को तकनीक के साथ पर्यावरण विज्ञान, जीवविज्ञान और सामाजिक विज्ञान को जोड़ना होगा।
- कोडिंग से आगे हों - भविष्य के इंजीनियर सिर्फ टास्क पूरे करने वाले नहीं, बल्कि सॉल्यूशन आर्किटेक्ट बनेंगे।
- नियोक्ता अब डिग्री से ज्यादा गिटहब प्रोजेक्ट्स, प्रोटोटाइप और वास्तविक केस स्टडी देख रहे हैं।
बीटेक कोर्स केवल कोर्स नहीं बल्कि स्किल्स पाने की यात्रा होगी
- पहला वर्ष: सिस्टम्स थिंकिंग, नैतिकता
- दूसरा वर्ष: कम्युनिकेशन, डॉक्यूमेंटेशन, टीमवर्क
- तीसरा वर्ष: एजाइल मैनेजमेंट, सीआई/सीडी, प्रोब्लम सोल्विंग
- चौथा वर्ष: नेतृत्व, मेंटरशिप, क्रॉस-सेक्टर विशेषज्ञता
ग्रेजुएट होने तक छात्र कई क्षेत्रों के लिए तैयार हो जाते हैं- उद्योग, रिसर्च, उद्यमिता, या सार्वजनिक सेवा। इससे भी अहम बात यह है कि उनके पास अपनी यात्रा के सबूत होते हैं: असल प्रोजेक्ट, सहकर्मियों की प्रतिक्रिया, और नेतृत्व का अनुभव।
इंजीनियरिंग संस्थानों की किस तरह से अपने पढ़ाई के तौर तरीके बदलने होंगे-
- पारंपरिक मार्कशीट की जगह डिजिटल स्किल ग्राफ को दिखाया जाए। इसमें प्रोजक्ट व उपलब्धियों का जिक्र हो।
- हर कार्यक्रम में पीयर-मेंटरशिप हो।
- पुराने ढर्रे वाले बने बनाए स्थिर विषयों की जगह एडवांस्ड होती स्किल्स को करिकुलम में शामिल किया जाए।
- हर स्तर पर रिसर्च, इनोवेशन, एक्सपेरिमेंट की संस्कृति को बढ़ावा देना।




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