BPSC में UPSC जैसा बदलाव? अब IAS-IPS अफसर लेंगे इंटरव्यू, किस बातों की करेंगे परख
BPSC ने UPSC की तर्ज पर एक बड़ा बदलाव करते हुए 70वीं परीक्षा के इंटरव्यू पैनल में मौजूदा IAS और IPS अफसरों को शामिल किया है, ताकि बिहार को बेहतरीन प्रशासक मिल सकें।

क्या आप बिहार में अफसर बनने का ख्वाब देख रहे हैं? तो आपको अपनी तैयारी का गियर अब पूरी तरह से बदलना होगा। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अपने काम करने के तौर-तरीकों में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव किया है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। अब BPSC के इंटरव्यू रूम का नजारा पहले जैसा नहीं रहेगा। प्रशासनिक सुधारों को और गहराई देने की कवायद में आयोग ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर कदम बढ़ाते हुए अपने इंटरव्यू पैनल में सीधे तौर पर मौजूदा IAS और IPS अफसरों को शामिल करने का फैसला किया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की मानें तो यह नया नियम भविष्य की कोई योजना नहीं है, बल्कि इसे जमीन पर उतारा जा चुका है। 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CCE) के मौजूदा इंटरव्यू राउंड से ही इस नए बदलाव को लागू कर दिया गया है। जनवरी के महीने में शुरू हुए ये इंटरव्यू इसी महीने खत्म होने जा रहे हैं। इसके साथ ही आयोग का परीक्षा कैलेंडर भी अब पूरी तरह से पटरी पर दौड़ रहा है। 71वीं CCE की मेन्स परीक्षा इसी महीने के आखिर में होनी तय है, जबकि 72वीं CCE का प्रीलिम्स इस साल जुलाई में होने वाला है। हाल ही में आयोग ने 69वीं परीक्षा के नतीजे भी जारी कर दिए हैं।
इंटरव्यू पैनल में बड़े अफसरों की मौजूदगी क्यों?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर इंटरव्यू पैनल में इन बड़े अफसरों को क्यों बिठाया जा रहा है? दरअसल, इसके पीछे एक बहुत ही सोची-समझी रणनीति काम कर रही है। पहले इस त्रि-स्तरीय परीक्षा (प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू) के पैनल में मुख्य रूप से BPSC के सदस्य, शिक्षाविद या रिटायर हो चुके अधिकारी ही हुआ करते थे। लेकिन अब इस पैनल में शिक्षाविदों के साथ-साथ फील्ड में काम कर रहे हाई-रैंकिंग ब्यूरोक्रेट्स भी होंगे। BPSC के एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि काम कर रहे सीनियर अफसरों को इसलिए शामिल किया गया है, क्योंकि वो किसी भी उम्मीदवार की ऑन-ग्राउंड फैसले लेने की क्षमता और किसी प्रशासनिक संकट के वक्त उसके मिजाज को बेहतर तरीके से परख सकते हैं। जब राज्य के लिए एक प्रशासक चुनने की बारी हो, तो एक IAS अफसर पैनल में अहम वैल्यू जोड़ता है। इसी तरह DSP के पद के लिए चुनाव करते वक्त एक IPS अफसर की नजर उम्मीदवार के पुलिसिंग एप्टीट्यूड को तुरंत भांप लेगी।
कई बड़े बदवाल कर चुका है BPSC
अगर हम 2023 से लेकर 2026 के बीच के सफर पर नजर डालें, तो BPSC ने अपने ढांचे में कई बड़े सुधार किए हैं। सबसे पहले उम्मीदवारों का वक्त बचाने के लिए एक इंटीग्रेटेड प्रीलिम्स परीक्षा की शुरुआत की गई। इसके बाद, तुक्केबाजी पर लगाम कसने के लिए निगेटिव मार्किंग का सिस्टम लागू किया गया। मेन्स परीक्षा में भी बड़ा फेरबदल करते हुए 300 नंबर का निबंध जोड़ा गया, जिसका मकसद रटने की क्षमता के बजाय विश्लेषणात्मक सोच को मापना है। इसके साथ ही, वैकल्पिक विषय को केवल क्वालीफाइंग और ऑब्जेक्टिव बना दिया गया है, जिसके नंबर फाइनल मेरिट में नहीं जुड़ेंगे। इस एक फैसले ने स्केलिंग को लेकर होने वाले पुराने विवादों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।
इन बदलावों से चयन प्रक्रिया में पेशेवर तटस्थता आएगी। बाहरी और सेवारत बड़े अफसरों के होने से स्थानीय प्रभाव का खतरा कम होगा और ऐसे उम्मीदवार चुने जा सकेंगे जिनमें डिजिटल साक्षरता और हमदर्दी भरा नेतृत्व जैसे आज के दौर के हुनर हों।
सख्त सालाना कैलेंडर होगा फॉलो
आयोग के एक अधिकारी का कहना है, "मौजूदा सिस्टम अब बिल्कुल एक सख्त सालाना कैलेंडर पर काम कर रहा है, जो हूबहू UPSC के स्टाइल से मेल खाता है। रटंत विद्या से हटकर निबंध और नैतिकता से जुड़े सवालों पर जोर देना इस बात का सबूत है कि अब सिर्फ अकादमिक तौर पर होशियार होना काफी नहीं है, प्रशासनिक फिटनेस सबसे ज्यादा ज़रूरी है।" अब उम्मीदवारों से यह उम्मीद की जाती है कि उनका दिमाग तेज हो और उन्हें बिहार की जमीनी चुनौतियों की गहरी समझ हो।




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