BHU Fee Hike: बीएचयू फीस वृद्धि पर बवाल, पीएचडी, LLB और हॉस्टल फीस में भारी बढ़ोतरी से छात्र परेशान
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), इस समय फीस वृद्धि के मुद्दे को लेकर चर्चा में है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विभिन्न कोर्सेज और हॉस्टल शुल्कों में की गई अत्यधिक वृद्धि के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), जो अपनी सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, इस समय फीस वृद्धि के मुद्दे को लेकर चर्चा में है। शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विभिन्न कोर्सेज और हॉस्टल शुल्कों में की गई अत्यधिक वृद्धि के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। परिषद के सदस्यों ने कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपते हुए इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन इस जनविरोधी फैसले को वापस नहीं लेता है, तो आने वाले दिनों में बीएचयू परिसर में एक बड़ा छात्र आंदोलन देखने को मिलेगा।
किस कोर्स में कितनी बढ़ी फीस?
इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि विश्वविद्यालय ने लगभग हर क्षेत्र में छात्रों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। कृषि विज्ञान संस्थान की फीस में लगभग ₹12,000 की भारी वृद्धि की गई है। पीएचडी (PhD) रिसर्चर के लिए वार्षिक शुल्क ₹1,940 से सीधे बढ़ाकर ₹12,000 कर दिया गया है, जो कि लगभग छह गुना अधिक है। एलएलबी (LLB) की प्रति सेमेस्टर फीस ₹1,975 से बढ़ाकर ₹6,000 कर दी गई है। बीए-एलएलबी (BA-LLB) की वार्षिक फीस में ₹12,000 का इजाफा हुआ है, फीस ₹60,000 से बढ़कर ₹72,000 कर दी गई है। हॉस्टल शुल्क में करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है, वहीं स्विमिंग शुल्क भी ₹1,150 से बढ़ाकर ₹1,650 कर दिया गया है।
"गरीब छात्रों का सहारा है बीएचयू"
ज्ञापन सौंपते समय पल्लव सुमन ने कहा कि बीएचयू हमेशा से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी का सपना था कि शिक्षा हर किसी की पहुंच में हो। लेकिन अचानक की गई इस बेतहाशा शुल्क वृद्धि से ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों का भविष्य संकट में पड़ सकता है। यह निर्णय छात्रों के हितों के पूरी तरह प्रतिकूल है।
आंदोलन की तैयारी
ज्ञापन सौंपने के दौरान विकास महतो, मदन गोपाल, आकांक्षा सिंह और मेघा मुखोपाध्याय सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह रवैया तानाशाहीपूर्ण है। छात्रों ने कुलसचिव से अपील की है कि वे छात्रों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करें। अब सबकी नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि प्रशासन झुकता नहीं है, तो बीएचयू की सड़कों पर छात्रों का आक्रोश और बढ़ सकता है।




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