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कर्ज लेकर किया MBA, अंकुर वारिकू ने 14 हजार महीने से 5 साल में कैसे तय किया 33 लाख सालाना का सफर

अंकुर वारिकू ने लिंक्डइन पर अपनी करियर यात्रा साझा करते हुए बताया कि कैसे 14746 रुपये महीने की नौकरी से शुरू होकर वे पांच साल में 33 लाख रुपये सालाना वेतन तक पहुंचे।

Sat, 6 June 2026 10:57 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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कर्ज लेकर किया MBA, अंकुर वारिकू ने 14 हजार महीने से 5 साल में कैसे तय किया 33 लाख सालाना का सफर

आज सोशल मीडिया पर सफलता की कहानियां अक्सर लोगों को प्रेरित करती हैं लेकिन कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं। मशहूर उद्यमी और मोटिवेशनल स्पीकर अंकुर वारिकू ने लिंक्डइन पर बीते दिनों अपनी जिंदगी का एक ऐसा ही अध्याय साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे 24 साल की उम्र में सिर्फ 14746 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत करके वे 29 साल की उम्र तक 33 लाख रुपये सालाना कमाने लगे। अंकुर ने कैसे तय किया ये सफर, आइए जानते हैं।

अमेरिका में पीएचडी छोड़ी

अंकुर वारिकू ने बताया कि 24 साल की उम्र में उन्होंने अमेरिका में चल रही अपनी पीएचडी बीच में ही छोड़ दी और भारत वापस लौट आए। उस समय उनके पास न कोई तय योजना थी और न ही भविष्य को लेकर स्पष्टता। भारत लौटने के बाद सबसे बड़ी जरूरत आर्थिक स्थिरता की थी। उन्हें किसी तरह नौकरी चाहिए थी। उन्होंने अपने सीमित संपर्कों का सहारा लिया, अखबारों में छपे विज्ञापनों पर आवेदन किया और कई जगह इंटरव्यू दिए। करीब 45 दिनों की कोशिश के बाद उन्हें एनआईएस स्पार्टा में अंतिम इंटरव्यू का मौका मिला।

जब उम्मीद से ज्यादा मिली पहली सैलरी

इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि वे कितनी सैलरी चाहते हैं। अंकुर के मुताबिक, उन्हें अंदाजा ही नहीं था कि क्या जवाब देना चाहिए। उन्होंने मन में सोचा कि 10 हजार रुपये महीना भी मिल जाए तो काफी होगा। लेकिन कंपनी ने उन्हें लगभग 15 हजार रुपये महीने की सैलरी ऑफर कर दी। यह रकम उनकी उम्मीद से काफी ज्यादा थी। कंपनी में उनका काम बड़े कॉरपोरेट संस्थानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना था। हालांकि उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई की दुनिया से निकलकर वास्तविक कारोबारी दुनिया को समझना आसान नहीं है।

सीखने की भूख ने बदली सोच

नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि एमबीए कर चुके सहकर्मियों की समझ कई मामलों में उनसे बेहतर थी। यहीं से उनके मन में मैनेजमेंट की पढ़ाई करने का विचार आया। इसी दौरान उन्हें इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के बारे में जानकारी मिली। एक साल का यह एमबीए कार्यक्रम उनके लिए बड़ा अवसर था, लेकिन इसकी फीस बहुत ज्यादा थी। पढ़ाई के लिए उन्हें भारी कर्ज लेना पड़ता। यह उनके परिवार का पहला बड़ा कर्ज होने वाला था। उन्होंने खुद से एक सवाल पूछा कि क्या एमबीए के बाद उन्हें ऐसी नौकरी मिल पाएगी जिससे वे कर्ज की किस्त भी भर सकें और अपनी मौजूदा आय से बेहतर जीवन भी बना सकें। आंकड़ों और संभावनाओं को देखकर उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया।

आईएसबी में बनाई नई पहचान

आईएसबी पहुंचने के बाद अंकुर को कंसल्टिंग क्षेत्र के बारे में पता चला। लेकिन इस क्षेत्र में आमतौर पर वही छात्र चुने जाते थे जो बैच के शीर्ष विद्यार्थियों में शामिल हों। अंकुर खुद को शीर्ष 10 प्रतिशत में नहीं बल्कि शीर्ष 15 प्रतिशत के आसपास मानते थे। ऐसे में उन्होंने केवल पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय खुद को हर क्षेत्र में बेहतर बनाने की रणनीति अपनाई। उन्होंने अपनी शैक्षणिक स्थिति बनाए रखी और साथ ही कई अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी की। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें दो बड़ी कंसल्टिंग कंपनियों के इंटरव्यू का मौका मिला।

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इंटरव्यू में हुई गलतियां

अंकुर ने बताया कि एक प्रतिष्ठित कंसल्टिंग कंपनी के पहले ही इंटरव्यू में वे सफल नहीं हो पाए। दूसरी कंपनी के इंटरव्यू में भी शुरुआती दौर में उनसे कुछ गलतियां हुईं। लेकिन शायद कंपनी ने उनकी क्षमता और सीखने की इच्छा को पहचाना। उन्हें एक और मौका दिया गया। इस बार उन्होंने पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ इंटरव्यू दिया। आखिरकार उन्हें 12 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी मिल गई जो उस समय कैंपस की बेहतरीन नौकरियों में गिनी जाती थी।

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पांच साल में 3 लाख से 33 लाख तक का सफर

एमबीए के बाद उनके करियर की रफ्तार लगातार बढ़ती गई। नौकरी के सिर्फ डेढ़ साल के भीतर उन्हें पदोन्नति मिल गई और उनकी आय लगभग दोगुनी हो गई। साल 2009 में जब उन्होंने कंपनी छोड़ी, तब उनका वार्षिक वेतन 33 लाख रुपये तक पहुंच चुका था। यानी जिस व्यक्ति ने पांच साल पहले 3 लाख रुपये सालाना से भी कम आय के साथ शुरुआत की थी, वह कुछ ही वर्षों में कई गुना आगे निकल चुका था।

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अपने अनुभव को याद करते हुए अंकुर वारिकू ने कहा कि उनकी सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण यह रहा कि कई लोगों ने उन पर भरोसा किया। किसी ने उन्हें पहली नौकरी दी, किसी ने एमबीए में प्रवेश का मौका दिया और किसी ने इंटरव्यू में एक अतिरिक्त अवसर देकर उन पर विश्वास जताया। उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति आप पर भरोसा जताए, तो उस भरोसे को सही साबित करने के लिए पूरी मेहनत करनी चाहिए। उनके मुताबिक, जीवन में मिलने वाले अवसरों का सम्मान और लगातार सीखने की इच्छा ही आगे बढ़ने का सबसे मजबूत रास्ता बनती है।

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