Why indian Govt Tighten rule to import silver bar these are two reasons check how will imapct सोने और चांदी पर सख्ती! सिल्वर बार के इम्पोर्ट पर क्यों हुई कड़ाई? इन 2 वजहों ने सरकार की बढ़ाई टेंशन, Business Hindi News - Hindustan
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सोने और चांदी पर सख्ती! सिल्वर बार के इम्पोर्ट पर क्यों हुई कड़ाई? इन 2 वजहों ने सरकार की बढ़ाई टेंशन

Gold and Silver import: केंद्र सरकार ने सोने और चांदी की कीमतों के आयात को लेकर सख्ती दिखाई है। शनिवार को केंद्र सरकार ने कुछ खास सिल्वर बार के इंपोर्ट को प्रतिबंधित कर दिया। इसके पहले सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। 

Sun, 17 May 2026 08:42 AMTarun Pratap Singh लाइव हिन्दुस्तान
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सोने और चांदी पर सख्ती! सिल्वर बार के इम्पोर्ट पर क्यों हुई कड़ाई? इन 2 वजहों ने सरकार की बढ़ाई टेंशन

Why Govt Tighten rule on Gold and Silver import: सरकार की तरफ से सोने और चांदी के आयात को लेकर काफी कड़े हुए फैसले पिछले दिनों लिए गए हैं। मौजूदा अनिश्चितता के बीच सरकार ने कुछ खास प्रकार के सिल्वर बार (चांदी के ईंट) के आयात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है। शनिवार को इसको लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने सिल्वर बार को फ्री कैटगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाल दिया है।

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इसके अलावा केंद्र सरकार ने सोने इंपोर्ट करने के लिए एडवांस ऑथराइजेशन जारी करने और उसकी निगरानी से जुड़े नियमों को भी काफी कड़ा कर दिया है। केंद्र सरकार सोने और चांदी के इंपोर्ट को लेकर कितना सख्त है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इम्पोर्ट ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ है जिसकी वजह से सरकार सोने और चांदी के आयात को लेकर सख्ती दिखा रही है। आइए समझने का प्रयास करते हैं।

1- खपत में तेज इजाफा

सरकार की तरफ से की गई सख्ती का बड़ा कारण खपत में हुआ तेज इजाफा है। देश मौजूदा समय में भारी मात्रा में चांदी का आयात कर रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल के महीने में भारत ने 411 मिलियन डॉलर का सिल्वर इम्पोर्ट किया था। जोकि सालाना आधार पर 157.16 प्रतिशत अधिक है।

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पिछले वित्त वर्ष में हुई 12 अरब डॉलर की चांदी की खरीद

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कुल 12 अरब डॉलर की चांदी को आयात किया था। जोकि इसके पहले के वित्त वर्ष की तुलना में 150 प्रतिशत अधिक है। बुलियन मार्केट में कीमतें अधिक होने के बाद भी फिजिकल डिमांड में कोई कमी नहीं आई है। भारत ग्रीन एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी आवश्यकताओं और परंपरागत खपत के लिए 7334.96 टन चांदी इस वित्त वर्ष आयात किया है। जोकि 42 प्रतिशत अधिक है।

2- विदेशी मुद्रा की बचत

पश्चिमी देशों में जारी तनाव के बीच भारत सरकार इस समय विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने पर ज्यादा जोर दे रही है। युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित है। जिसके कारण कच्चे तेल का रेट 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल को क्रॉस कर गया है। भारत जैसे देश जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं उनके लिए महंगा कच्चा तेल बड़ी मुसीबत है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत के साथ-साथ सोना अगले 1 साल तक ना खरीदने की अपील की है। इन सबके बीच भारत रुपये की स्थिति लगातार खराब हो रही है। शुक्रवार को 1 डॉलर की कीमत 96 रुपये हो गया था। भारत के पास अभी पर्याप्त मात्रा में फॉरेक्स रिजर्व है। मौजूदा समय में 11 महीने के आयात का खर्च उठाने के लिए भारत के रिजर्व में पैसा है।

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