सोना-चांदी के भाव क्यों गिर रहे हैं? क्या एक्सपर्ट्स के अनुमान गलत साबित हो रहे हैं?
Gold Silver Rate Analysis: मार्केट एक्सपर्ट्स जिन फैक्टर्स को सोने-चांदी के भाव बढ़ने का कारण बताते थे, आज वही फैक्टर्स जैसे जियो-पॉलिटकल टेंशन, डॉलर, ईटीएफ, चांदी का औद्योगिक इस्तेमाल, सोलर पैनल में प्रयोग, शेयर मार्केट की कमजोरी आदि आदि.., ये सारे फैक्टर्स आज भी मौजूद हैं।
Gold Silver Rate Analysis: मार्केट एक्सपर्ट्स जिन फैक्टर्स को सोने-चांदी के भाव बढ़ने का कारण बताते थे, आज वही फैक्टर्स जैसे जियो-पॉलिटकल टेंशन, डॉलर, शादी का सीजन, ईटीएफ में खरीदारी, चांदी का औद्योगिक इस्तेमाल, सोलर पैनल में चांदी का प्रयोग, शेयर मार्केट की कमजोरी आदि आदि.., ये सारे फैक्टर्स आज भी मौजूद हैं। इसके बावजूद सोना-चांदी के भाव गिर रहे हैं। तो क्या एक्सपर्ट्स के ये पैमाने गलत साबित हो रहे हैं? इन सवालों के जवबा जानने के लिए आइए इस हिन्दुस्तान एक्सप्लेनर में समझें सोने-चांदी चाल उलटी क्यूं है और आगे की राह क्या है...
युद्ध के बाद से कितना सस्ता हुए सोना-चांदी
27 फरवरी को सोना 159097 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। जबकि, चांदी इस दिन 267900 रुपये प्रति किलो के रेट से बंद हुई थी। शनिवार 28 फरवरी को इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया। शानिवार और रविवार के दिन आईबीजेए सोने-चांदी के रेट जारी नहीं करता। सोमवार को जब बाजार खुले तो सोना करीब 5000 रुपये उछलकर खुला। चांदी के भाव भी 20000 रुपये से अधिक बढ़कर खुले। यह युद्ध का तात्कालिक असर था। अब युद्ध जैसे-जैसे बढ़ रहा है, सोने-चांदी के भाव में गिरावट आ रही है। युद्ध के बाद से 12 मार्च की दोपहर सवा 12 बजे तक सोना भाव 6845 रुपये और चांदी के भाव 2900 रुपये टूट चुके हैं।
सोने की कीमतों में गिरावट की ये हैं 5 बड़ी वजहें
केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया के मुताबिक हाल ही में सोने की कीमतों में जो नरमी देखी गई है, उसके पीछे कई अहम कारण हैं। जैसे...
1. तेजड़ियों पर लगाम
सोने के कारोबार में अटकलें लगाने वालों (सट्टेबाजों) की भागीदारी कम करने के लिए एक्सचेंजों ने मार्जिन (जमानत राशि) बढ़ा दी है। ज्यादा मार्जिन होने से छोटे निवेशकों के लिए कारोबार करना महंगा हो जाता है, जिससे बाजार में तेजी को बढ़ावा देने वालों की संख्या घट जाती है। इससे कीमतों में तेजी थम जाती है या गिरावट आती है।
2. शेयर बाजार का दर्द
जब भू-राजनीतिक तनाव (जैसे युद्ध) बढ़ता है, तो शेयर बाजार में गिरावट आती है। ऐसे में जिन निवेशकों को शेयरों में नुकसान होता है, वे अपने घाटे की भरपाई के लिए अक्सर सोना-चांदी जैसी अपनी मुनाफे वाली संपत्ति बेच देते हैं। इस बिकवाली से सोने की कीमतों पर अस्थायी दबाव बनता है।
3. निवेश की रफ्तार थमी
पिछले दिनों तेजी के बाद अब सोने में निवेश की मांग कुछ स्थिर हुई है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशक इसे अभी भी मजबूत विकल्प मानते हैं, लेकिन नए निवेश की आमद कुछ धीमी पड़ गई है। यही वजह है कि कीमतें फिलहाल स्थिर हो गई हैं।
4. मजबूत डॉलर का दबाव
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में हालिया तेजी ने भी सोने पर दबाव डाला है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग घटती है और कीमतें नीचे आती हैं।
5. त्योहारी मांग का सहारा
गिरावट के इन सब कारणों के बावजूद, भारत में आभूषणों की मांग सोने को एक मजबूत आधार दे रही है। आने वाले त्योहारों और शादियों के कारण यह मांग बनी रहेगी, जो कीमतों को बहुत ज्यादा नीचे गिरने से बचाए रखती है।
केडिया के मुताबिक, मार्च 2026 भारतीय सोने बाजार के लिए बेहद अहम है। यह महीना अप्रैल में आने वाले अक्षय तृतीया के त्योहार से पहले दुल्हन के गहनों की बुकिंग के लिए एक खास मौका माना जा रहा है। इस दौरान कई परिवार ऊंची कीमतों के बावजूद अपने मनपसंद डिजाइन के गहने तैयत करवा रहे हैं। हालांकि, साल की शुरुआत में सोना 1,39,799 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था, जिसके बाद अब आम ग्राहकों की खरीदारी में कुछ सुस्ती देखी जा रही है। लोग कीमतों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं।
Gold ETF में ₹4.29 लाख करोड़: 2026 में कहाँ जाएगा सोना?
हालांकि उनका मानना है कि साल 2026 में भारत में सोने की कुल मांग में गिरावट आ सकती है। इसकी मुख्य वजह गहनों की बिक्री में कमी आना है। हालांकि, दूसरी तरफ निवेश के तौर पर सोने की मांग में जोरदार इजाफा हो रहा है। शेयर बाजार में मंदी के माहौल के कारण निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में पैसा लगाना शुरू कर दिया है। गोल्ड ईटीएफ में रिकॉर्ड 4,29,600 करोड़ रुपये का निवेश आया है, जो बताता है कि लोग अब पेपर गोल्ड को भी पसंद कर रहे हैं।
डिजिटल गोल्ड: हर महीने 13.5 टन की खरीदारी, SEBI ने दी चेतावनी
डिजिटल होती दुनिया में सोना भी पीछे नहीं है। भारत में यूपीआई के जरिए डिजिटल गोल्ड की खरीदारी में जबरदस्त उछाल आया है। अब हर महीने लगभग 13.5 टन डिजिटल सोना खरीदा जा रहा है। वित्तीय मूल्यों की बात करें तो यह आंकड़ा 8 अरब रुपये से बढ़कर 21 अरब रुपये प्रति महीने हो गया है, यानी यह तीन गुना से ज्यादा हो गया है। फिनटेक कंपनियों के जरिए आम लोगों तक इसकी आसान पहुंच ने इस बढ़ोतरी को कायम रखा है। लेकिन, सेबी ने डिजिटल गोल्ड को लेकर सतर्कता बरतने को कहा है, क्योंकि अभी इसके लिए कोई औपचारिक नियामक ढांचा नहीं है।
सोना ₹1,55,000–₹1,65,000 के बीच रहेगा – एक्सपर्ट का अनुमान
फिलहाल सोने का बाजार एक दायरे में सिमटने के दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को 5,000 डॉलर का मजबूत सपोर्ट और 5,400 डॉलर के आसपास रेजिस्टेंस का सामना है। जब तक कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट नहीं आता, कीमतें इसी दायरे में रह सकती हैं। भारतीय बाजार की बात करें तो रुपए में कमजोरी के कारण कुछ सहारा मिल रहा है, लेकिन फिर भी निकट भविष्य में सोने की कीमतें 1,55,000 रुपये से 1,65,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रहने का अनुमान है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)




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