बर्बादी की राह पर पाकिस्तान? पेट्रोल ₹400 के पार, खाना-पीना भी मुहाल, लोग बोले- अब जीना मुश्किल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। बढ़ती महंगाई ने आम जनता, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों की हालत खराब कर दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तनाव जारी रहा तो पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां और गहरा सकती हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता ने पाकिस्तान में महंगाई की नई चिंता पैदा कर दी है। आम लोगों का कहना है कि डेली की जरूरतों को पूरा करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है और अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद समेत कई शहरों में लोग बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इसका सीधा असर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है, जहां पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक स्थिति कमजोर बनी हुई है।
कई लोगों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल ने उनके घरेलू बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। कुछ नागरिकों के अनुसार पेट्रोल की कीमतें पहले करीब 250 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर थीं, जो बढ़कर 400 रुपये से अधिक तक पहुंच गईं। डीजल की कीमतों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे ऑपरेशन लागत बढ़ गई है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद के एक निवासी ने बताया कि उन्होंने पिछले एक महीने से अपनी कार घर पर खड़ी कर रखी है, क्योंकि अब फ्यूल भरवाना उनकी पहुंच से बाहर हो गया है। उनका कहना है कि वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन डेली की चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना बेहद कठिन हो गया है।
खाना-पीना हुआ मुहाल
एक्सपर्ट का मानना है कि जब फ्यूल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर पूरे आर्थिक तंत्र पर पड़ता है। बस, ट्रक और अन्य परिवहन सेवाओं का खर्च बढ़ने से सामान की ढुलाई महंगी हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि सब्जियां, अनाज, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ता है।
पाकिस्तान के कई नागरिकों ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को जल्द खत्म करने की अपील की है। उनका मानना है कि सैन्य कार्रवाई और मिसाइल हमले केवल क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाते हैं, जबकि बातचीत और कूटनीतिक समाधान ही स्थायी शांति का रास्ता हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि अगर क्षेत्र में शांति स्थापित होती है, तो तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी और महंगाई पर भी कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।
अमेरिका-ईरान तनाव ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पहले से महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव झेल रहे लोगों के लिए यह स्थिति और मुश्किल बनती जा रही है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।




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