US and iran war wiped off 41 lakh crore rs how investors can play the market correction ईरान-US जंग ने डुबोई निवेशकों की लुटिया, 41 लाख करोड़ रुपये हुए स्वाहा, एक्सपर्ट का क्या है कहना?, Business Hindi News - Hindustan
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ईरान-US जंग ने डुबोई निवेशकों की लुटिया, 41 लाख करोड़ रुपये हुए स्वाहा, एक्सपर्ट का क्या है कहना?

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग की वजह से भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट देखी गई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले एक महीने में करीब 9% या लगभग ₹41 लाख करोड़ घट गया है।

Fri, 27 March 2026 09:16 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान-US जंग ने डुबोई निवेशकों की लुटिया, 41 लाख करोड़ रुपये हुए स्वाहा, एक्सपर्ट का क्या है कहना?

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग की वजह से दुनियाभर के शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट देखी गई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले एक महीने में करीब 9% या लगभग ₹41 लाख करोड़ घट गया है। 27 फरवरी 2026 को जहां मार्केट कैपिटल ₹463 लाख करोड़ था, वहीं 27 मार्च तक गिरकर ₹422 लाख करोड़ पर आ गया। हालांकि, इस गिरावट के कारण निवेशकों को एक बार फिर से बाजार ने अट्रैक्ट किया है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस गिरावट ने वैल्यूएशन को कुछ हद तक आकर्षक बनाया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार का मानना ​​है कि इस करेक्शन की वजह से निफ्टी के वैल्यूएशन सही स्तर पर आ गए हैं। अब यह इंडेक्स अपनी 10 साल की औसत 22.4 गुना से नीचे, करीब 19 गुना कमाई पर ट्रेड कर रहा है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि अगर मौजूदा एनर्जी संकट की वजह से भारत के मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स पर असर पड़ता है तो वैल्यूएशन और भी गिर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि युद्ध कितने समय तक चलता है। अगर संघर्ष जल्द खत्म होता है, कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं और गैस सप्लाई सामान्य होती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था इस झटके को झेल सकती है।

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वहीं फिलिप कैपिटल ने इसे एक तकनीकी अवसर के रूप में देखा है। ब्रोकरेज के मुताबिक मौजूदा गिरावट अस्थायी है और मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य होने पर बाजार में सुधार संभव है। इस बीच उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए कैपिटल गुड्स, डिफेंस, बैंकिंग और स्टेपल सेक्टर में हिस्सेदारी बढ़ाई है, जबकि ऑटो, आईटी, ऑयल-गैस और फार्मा में कटौती की है।

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इसके अलावा, Stoxkart के डायरेक्टर और सीईओ प्रणय अग्रवाल का मानना ​​है कि भले ही अच्छी क्वालिटी वाले घरेलू कारोबारों के लिए लंबी अवधि के बुनियादी सिद्धांत मजबूत बने हुए हैं लेकिन ज्यादा ऊर्जा लागत, स्टैगफ्लेशन के जोखिम और तनाव कम होने के तुरंत कोई संकेत न मिलने के मौजूदा माहौल में, पूंजी बचाने पर केंद्रित एक रक्षात्मक रणनीति अपनाने की जरूरत है।

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विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

इस बीच, देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो गया है। 20 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 11.413 अरब डॉलर घटकर 698.346 अरब डॉलर रह गया। मुख्य रूप से स्वर्ण भंडार में भारी गिरावट की वजह से विदेशी मुद्रा भंडार घटा है। इसके एक सप्ताह पहले देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.05 अरब डॉलर घटकर 709.76 अरब डॉलर रहा था। विदेशी मुद्रा भंडार में 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में 4.88 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी और यह अब तक के सबसे उच्चतम स्तर 728.49 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।

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