HDFC बैंक के शेयर बेच निकल रहे निवेशक, सेबी से जुड़ी इस खबर का असर
एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अपना पद अचानक छोड़ दिया था। उनका इस्तीफा 18 मार्च से प्रभावी हुआ। यह पहली बार है जब बैंक के किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में इस्तीफा दिया है जिससे बैंक के कामकाज को लेकर सवाल खड़े हो गए।

प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी बैंक के शेयरों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखी गई। यह शेयर 3% टूटकर बीएसई पर 757.20 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। शेयर में यह गिरावट ऐसे समय में आई जब बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बैंक के पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे की समीक्षा किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इस बीच, ग्लोबल ब्रोकरेज जेफरीज ने भी प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक के शेयरों में अपनी होल्डिंग बेच दी और भारत में अपना वेटेज भी कम कर दिया है।
क्या हो रही जांच?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स सूत्रों के अनुसार सेबी ने अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के पत्र की प्रारंभिक समीक्षा शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सूचीबद्ध कंपनियों के निदेशकों को नियंत्रित करने वाले नियमों का कोई संभावित उल्लंघन हुआ है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी का एक विभाग, जो कॉरपोरेट डिस्क्लोजर और गवर्नेंस की निगरानी करता है, इस मामले में पूर्व चेयरमैन और अन्य निदेशकों की भूमिका की जांच कर रहा है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि इस्तीफे में किए गए दावों में कितनी सच्चाई है।
हालांकि, चक्रवर्ती ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसी किसी जांच की जानकारी नहीं है। बता दें कि अपने इस्तीफे में चक्रवर्ती ने बैंक के भीतर कुछ घटनाओं और प्रक्रियाओं का जिक्र किया था, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। हालांकि, उन्होंने इन मुद्दों को विस्तार से स्पष्ट नहीं किया, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई।
अतनु चक्रवर्ती ने अचानक दिया इस्तीफा
एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अपना पद अचानक छोड़ दिया था। उनका इस्तीफा 18 मार्च से प्रभावी हुआ। यह पहली बार है जब बैंक के किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में इस्तीफा दिया है जिससे बैंक के कामकाज को लेकर सवाल खड़े हो गए।
चक्रवर्ती ने 17 मार्च को लिखे अपने इस्तीफे में कहा था- पिछले दो वर्ष में बैंक के भीतर मैंने कुछ ऐसी घटनाएं एवं कार्य प्रणालियां देखीं जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों व नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। इसी आधार पर मैंने यह निर्णय लिया है। शासन, नामांकन, पारिश्रमिक समिति के चेयरमैन एच. के. भनवाला को लिखे पत्र में चक्रवर्ती ने कहा कि उपरोक्त के अलावा मेरे इस्तीफे का कोई अन्य महत्वपूर्ण कारण नहीं है। बता दें कि चक्रवर्ती को आर्थिक मामलों के सचिव के रूप में सेवानिवृत्ति के करीब एक वर्ष बाद पांच मई 2021 से अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
उनका कार्यकाल 2024 में तीन और वर्ष के लिए बढ़ाकर चार मई 2027 तक कर दिया गया था। चक्रवर्ती 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं और अप्रैल 2020 में आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले वह निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) के सचिव थे। ये दोनों विभाग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं। चक्रवर्ती बैंक की मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड के साथ 'रिवर्स मर्जर' प्रक्रिया के दौरान चेयरमैन बने थे, जो देश की प्रमुख आवासीय वित्त कंपनी है।




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