सरकार के इस फैसले से IndiGo और स्पाइसजेट के शेयरों ने भरी उड़ान
इंडिगो के शेयर आज 3.50 पर्सेंट की उड़ान के साथ 4385 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे थे। जबकि, स्पाइसजेट के शेयरों में करीब 5 पर्सेंट की उछाल थी। यह तेजी सरकार की क्रेडिट गारंटी स्कीम के ऐलान के बाद आई है।

केंद्र सरकार के ₹1.81 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना को मंजूरी देने की खबर के बाद आज इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन और स्पाइसजेट के शेयरों तूफानी तेजी देखने को मिल रही है। सरकार के इस फैसले का मकसद कंपनियों और एयरलाइंस को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
इंडिगो के शेयरों ने भरी उड़ान
इंडिगो के शेयर आज साढ़े 10 बजे के करीब 3.50 पर्सेंट की उड़ान के साथ 4385 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे थे। जबकि, स्पाइसजेट के शेयरों में करीब 5 पर्सेंट की उछाल थी। इंडिगो के शेयर आज 4320 रुपये पर खुले और देखते ही देखते 4393 रुपये के डे हाई पर पहुंच गए। इसका 52 हफ्ते का हाई 6232.50 रुपये और लो 3895.20 रुपये है।
स्पाइसजेट में लगा अपर सर्किट
स्पाइसजेट के शेयरों में अपर सर्किट लगा है। स्पाइसजेट के शेयर आज 12.50 रुपये पर खुले और अपर सर्किट के साथ 12.70 रुपये पर पहुंच गए हैं। इसका 52 हफ्ते का हाई 48.22 रुपये और 52 हफ्ते का लो 9.53 रुपये है।
क्या है सरकार की योजना
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि योजना के जरिये 2.55 लाख करोड़ रुपये का कर्ज एमएसएमई और एविएशन सेक्टर को मुहैया कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर केंद्र सरकार गारंटी के तौर पर 18,100 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
योजना के जरिये पांच हजार करोड़ रुपये विमान क्षेत्र के लिए निर्धारित किया गया है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) सदस्य ऋण संस्थाओं को गारंटी कवर प्रदान करेगी जिससे उनके द्वारा वैध एवं योग्य उधारकर्ता (एमएसएमई) को अतिरिक्त कर्ज प्रदान किया जा सके।
यह क्रेडिट गारंटी योजना कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम जैसी है। उस समय MSME सेक्टर को बिना गारंटी वाले ऑटोमैटिक लोन दिए गए थे। इस योजना से सबसे ज्यादा राहत एयरलाइंस, MSME, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन आधारित उद्योगों को मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच कंपनियों की फंडिंग बाधित न हो और रोजगार पर बड़ा असर न पड़े।
बता दें ईरान युद्ध से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। भारत पर इसका असर ज्यादा माना जा रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)




साइन इन