डॉलर के मुकाबले 95 पर रुपया, ऐतिहासिक गिरावट के बीच निवेशकों को मिला नया ऑप्शन
रुपये में आई ऐतिहासिक गिरावट की वजह से अब डॉलर होल्ड या विदेशी करेंसी में निवेश, पारंपरिक FD के मुकाबले ज्यादा आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है। बता दें कि रिजर्व बैंक की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत कोई भी भारतीय नागरिक सालाना 2.5 लाख डॉलर तक विदेशी मुद्रा खरीद सकता है।
भारतीय करेंसी रुपया की गिरावट का सिलसिला जारी है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95 रुपये के करीब पहुंच चुका है। वैसे तो इकोनॉमी के लिहाज से यह टेंशन की खबर है लेकिन करेंसी मार्केट में ट्रेड करने वाले निवेशकों के लिए मुनाफा कमाने का मौका भी है। रुपये में आई ऐतिहासिक गिरावट की वजह से अब डॉलर होल्ड या विदेशी करेंसी में निवेश, पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के मुकाबले ज्यादा आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच कई प्रमुख मुद्राओं ने रुपये के मुकाबले दो अंकों की मजबूती दिखाई है। इसमें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सबसे आगे रहा। इस करेंसी में करीब 20 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई। वहीं, यूरो में लगभग 18 प्रतिशत, न्यूजीलैंड डॉलर और अमेरिकी डॉलर ने भी क्रमशः 11 प्रतिशत और 10.7 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। इसके अलावा, ब्रिटिश पाउंड में 13 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। एक साल की अवधि में शुरुआती कुछ महीने अर्जेंटीना की करेंसी पेसो में मजबूती थी लेकिन बीते कुछ समय से यह कमजोर हो गया है। ओवरऑल एक साल की अवधि में पेसो, रुपया के मुकाबले 15 पर्सेंट से ज्यादा कमजोर हो गया है। कहने का मतलब है कि मजबूत विदेशी मुद्राओं में निवेश करने से रुपये की गिरावट का सीधा फायदा निवेशकों को मिलता है।
कैसे करें डॉलर होल्ड?
HDFC, ICICI जैसे बैंकों या BookMyForex जैसे ऐप्स पर एक मल्टी-करेंसी अकाउंट खोल सकते हैं। इसके बाद UPI या नेट बैंकिंग के जरिए ऑनलाइन, मार्केट रेट के आस-पास की कीमतों पर डॉलर खरीदना होगा। इस पर चार्ज भी लगता है। इस करेंसी को वैसे ही छोड़ दें और रेट बढ़ने पर आप कभी भी कैश करवाकर ज्यादा रुपये पा सकते हैं। बता दें कि इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD की तरह कोई लॉक-इन पीरियड नहीं होता है। बता दें कि पिछले 10 वर्षों में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 41 प्रतिशत कमजोर हुआ है, जो औसतन 6-7 प्रतिशत सालाना FD रिटर्न से बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है।
क्या है आरबीआई के नियम?
भारतीय रिजर्व बैंक की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत कोई भी भारतीय नागरिक सालाना 2.5 लाख डॉलर तक विदेशी मुद्रा खरीद सकता है, जो पूरी तरह वैध और सरल प्रक्रिया है। एक्सपर्ट यह भी चेतावनी देते हैं कि करेंसी में उतार-चढ़ाव बना रहता है, इसलिए निवेशकों को संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए।
डॉलर के मुकाबले रुपया
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 89 पैसे लुढ़ककर 94.85 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। रुपया 94.18 प्रति डॉलर पर खुला और पहली बार 94.50 के स्तर को पार कर गया। अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.85 पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 89 पैसे की गिरावट है। रुपया बुधवार को 20 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.96 पर बंद हुआ था।
क्या है गिरावट की वजह?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वृहद आर्थिक परिदृश्य पर इसके दुष्प्रभाव की आशंका से घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली और पश्चिम एशिया संघर्ष पर अनिश्चितताओं के बीच मजबूत डॉलर के दबाव के कारण रुपया कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि डॉलर की सतत मांग और ऊर्जा आधारित मंहगाई जोखिम, रुपये को दबाव में रख रहे हैं। जब तक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती यह स्थिति बनी रहेगी।




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