बैंक से जुड़े लोगों की सैलरी में आएगी समानता, RBI का नया प्रपोजल
बता दें कि बैंक प्रतिनिधि को दूर-दराज के इलाकों में बैंकिंग सेवाएं देने के लिए नियुक्त किया जाता है। इससे बैंकों की पहुंच बढ़ती है और उन लोगों को बैंकिंग से जोड़ने में मदद मिलती है जिनके पास बैंक खाते नहीं हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को बैंक प्रतिनिधियों को उनके काम के आधार पर दो श्रेणियों में रखने और उनके सैलरी में समानता लाने का सुझाव दिया। केंद्रीय बैंक ने शाखा मंजूरी संबंधी ड्राफ्ट मानदंडों में तीन प्रकार के वितरण बिंदुओं को परिभाषित करने का प्रस्ताव दिया है जिसमें बैंक शाखाएं, बैंक प्रतिनिधि-बैंक आउटलेट्स (बैंक शाखा, एटीएम, एक्सटेंशन काउंटर) और बैंक प्रतिनिधि-बैंकिंग टचपॉइंट (बीसी-बीटी) शामिल हैं। आरबीआई ने इस प्रस्ताव पर संबंधित संस्थाओं और जनता से पांच मई, 2026 तक सुझाव और प्रतिक्रिया मांगी हैं। इसके अलावा, बैंक प्रतिनिधि को अपना काम शुरू करने के नौ महीने के अंदर अनिवार्य ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन पूरा करना होगा। इसके बाद समय-समय पर रिफ्रेशर प्रोग्राम में भी शामिल होना होगा।
बता दें कि बैंक प्रतिनिधि को दूर-दराज के इलाकों में बैंकिंग सेवाएं देने के लिए नियुक्त किया जाता है। इससे बैंकों की पहुंच बढ़ती है और उन लोगों को बैंकिंग से जोड़ने में मदद मिलती है जिनके पास बैंक खाते नहीं हैं। वर्तमान में बैंक प्रतिनिधि के बीच कोई वर्गीकरण नहीं है और अलग-अलग बैंक उन्हें अलग-अलग कमीशन देते हैं। जून 2025 तक विभिन्न बैंकों द्वारा 16 लाख से अधिक बैंक प्रतिनिधि नियुक्त किए गए थे।
इसके अलावा, RBI ने बैंकों को काम करने में ज्यादा आजादी दी है। अब वे कुछ खास ऑफिसों की जगह बदल सकते हैं, उन्हें आपस में मिला सकते हैं या उन्हें बंद कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें पहले से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी।
एफपीआई निवेश की लिमिट पर फैसला
इस बीच, आरबीआई ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की निवेश लिमिट सामान्य मार्ग के तहत 6 प्रतिशत पर बरकरार रखी गई है। आरबीआई ने एक सर्कुलर में कहा कि सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक), राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (एसजीएस) और कॉरपोरेट बॉन्ड में एफपीआई निवेश की सीमा चालू वित्त वर्ष के लिए क्रमशः छह प्रतिशत, दो प्रतिशत और 15 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहेगी। इसके साथ ही, जी-सेक सीमा में बढ़ोतरी को 'सामान्य' और 'दीर्घावधि' श्रेणियों के बीच 50:50 के अनुपात में बांटने का प्रावधान भी बरकरार रखा गया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, 2026-27 के लिए कुल मिलाकर 3.30 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त निवेश सीमा निर्धारित की गई है।
इसके अलावा कॉरपोरेट बॉन्ड पर एफपीआई द्वारा बेचे जाने वाले क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप की अधिकतम सीमा भी बकाया स्टॉक का पांच प्रतिशत तय की गई है। आरबीआई ने यह भी कहा है कि विदेशी निवेशकों के लिए बिना सीमा वाले सरकारी बॉन्ड निवेश मार्ग 'एफएआर' के तहत निर्दिष्ट प्रतिभूतियों में सभी पात्र निवेशकों का निवेश जारी रहेगा। वहीं, एक अप्रैल, 2026 से 'स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग' (वीआरआर) के तहत मौजूदा और नए निवेश भी सामान्य मार्ग की निर्धारित सीमाओं के अधीन होंगे।




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