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करोड़ों की संपत्ति लेकिन 'अमीरों की लिस्ट' में दिखने की चाहत नहीं, कुछ ऐसे थे रतन टाटा

  • Ratan Tata Networth: टाटा संस के एमिरिटस चेयरमैन और दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में से एक रतन टाटा कभी भी अरबपतियों की किसी लिस्ट में शामिल नहीं हुए।

Thu, 10 Oct 2024 05:50 PMVarsha Pathak लाइव हिन्दुस्तान
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करोड़ों की संपत्ति लेकिन 'अमीरों की लिस्ट' में दिखने की चाहत नहीं, कुछ ऐसे थे रतन टाटा

Ratan Tata Networth: टाटा संस के एमिरिटस चेयरमैन और दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में से एक रतन टाटा कभी भी अरबपतियों की किसी लिस्ट में शामिल नहीं हुए। जबकि टाटा समूह का कारोबार नमक से लेकर स्टील और सॉफ्टवेयर से लेकर ऑटोमोबाइल और एयरलाइन तक फैला हुआ है। रतन टाटा ने छह महाद्वीपों के 100 से अधिक देशों में काम कर रही 30 से अधिक कंपनियों को कंट्रोल किया और फिर भी उन्होंने बेदह सिंपल लाइफ जिया। बता दें कि दिग्गज उद्योगपति रतन एन टाटा अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार को 86 वर्ष की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका उनका निधन हो गया।

परोपकार ही सबकुछ

मूल रूप से एक परोपकारी, रतन ने अपने परदादा और संस्थापक जमशेदजी के टाटा डीएनए को साझा किया और उनका मानना था कि व्यवसायों को अपनी कंपनियों के हितों से परे उन समुदायों तक जाने की जरूरत है जिनकी वे सेवा करते हैं। IIFL वेल्थ हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2022 के अनुसार, रतन टाटा 3,800 करोड़ रुपये की अनुमानित निवल संपत्ति के साथ 421वें स्थान पर हैं।

टाटा समूह के अध्यक्षों ने अपनी संपत्ति टाटा ट्रस्ट्स को दे दी है, जिसकी टाटा संस में दो-तिहाई हिस्सेदारी है। टाटा संस से लगभग 60% लाभांश धर्मार्थ प्रयासों के लिए अलाॅट किए जाते हैं। रतन टाटा के तहत टाटा ट्रस्ट ने असम, झारखंड, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 10 कैंसर देखभाल सुविधाओं का विकास और संवर्धन किया। सुविधाएं गरीब लोगों के लिए विश्व स्तरीय उपचार सुलभ बनाती हैं। रतन टाटा ने महत्वपूर्ण सामाजिक जरूरतों को पूरा करने, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज जैसे उत्कृष्टता संस्थानों की स्थापना और पूरे भारत में शैक्षिक पहलों को फाइनेंस करने की दिशा में टाटा ट्रस्टों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया।

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बता दें कि रतन टाटा कैंसर के इलाज को लेकर वह इतने गंभीर थे कि देशभर में उन्होंने कैंसर बीमारी के इलाज के लिए अस्पतालों का जाल बिछवा दिया। कुछ साल पहले ही असम के गुवाहाटी में 1000 बेड का कैंसर अस्पताल खुलवाया। पूर्वोत्तर राज्यों में चार कैंसर अस्पताल खोले गए हैं। दो-तीन साल पहले कोलकाता के टीएमसी में 400 बेड जुड़वाए। बनारस में भी उन्होंने बड़ा कैंसर अस्पताल खुलवाया। इसके साथ मुजफ्फरपुर में भी एक कैंसर अस्पताल उन्होंने शुरू करवाया। झारखंड की राजधानी रांची में 2 साल पहले उन्होंने कैंसर अस्पताल का उद्घाटन किया था।

स्टार्टअप के प्रति रतन टाटा का योगदान

टाटा संस के एमेरिटस चेयरमैन के रूप में अपने समय के दौरान, रतन टाटा ने 21 वीं सदी के युवा कारोबारियों पर अधिक भरोसा किया और उनकी मदद करना शुरू किया। रतन टाटा ने नए युग के तकनीक-संचालित स्टार्टअप में निवेश किया। उनको भरोसा था कि ये कंपनियां देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। टाटा ने व्यक्तिगत तौर पर और अपनी निवेश कंपनी आरएनटी कैपिटल एडवाइजर्स के माध्यम से ओला इलेक्ट्रिक, पेटीएम, स्नैपडील, लेंसकार्ट और जिवामे सहित 30 से अधिक स्टार्टअप में निवेश किया। दान के लिए उनका प्यार मनुष्यों तक ही सीमित नहीं था। वे डॉग-लवर थे और हाल ही में मुंबई स्थित टाटा समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में भी आवारा कुत्तों के लिए एक विशेष स्थान बनवाया है, जहां उन्हें रहने और छुपने की सुविधा मिलती है।

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