Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल के रेट में उछाल, पाकिस्तान में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी, क्या अगला नंबर भारत का है?
Petrol Price Hike: एशिया में पेट्रोल-डीजल महंगा, पाकिस्तान में सबसे ज्यादा 24% तक बढ़ोतरी। कई देशों में कीमतों में तेजी, कुछ में अभी राहत बरकरार। जानिए किन देशों में बढ़े दाम और आगे क्या होगा असर।

Petrol Price Hike: ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की सप्लाई में आई कमी का असर अब अलग-अलग देशों में साफ दिखने लगा है। 23 फरवरी 2026 के बाद कई एशियाई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि कुछ देशों ने अभी कीमतों को स्थिर रखा है।
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल सबसे महंगा
globalpetrolprices.com के मुताबिक सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान में देखने को मिला है, जहां पेट्रोल की कीमतों में 24.4% और डीजल में 21.8% की भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा चीन में भी पेट्रोल (10.0%) और डीजल (10.9%) की कीमतों में बड़ा उछाल दर्ज किया गया।
श्रीलंका, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देशों में भी ईंधन महंगा हुआ है। श्रीलंका में पेट्रोल 7.4% और डीजल 9.3% महंगा हुआ, जबकि म्यांमार में पेट्रोल 7.2% और डीजल 8.5% बढ़ा है। अफगानिस्तान में भी पेट्रोल 7.0% और डीजल 8.8% महंगा हुआ। भूटान में पेट्रोल की कीमतों में अपेक्षाकृत कम यानी 4.2% वृद्धि हुई, लेकिन डीजल में 13.6% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।
नेपाल, बंग्लादेश और भारत में नहीं बढ़े रेट
नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह दर्शाता है कि इन देशों ने फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है।
कहां किस रेट पर मिल रहा पेट्रोल
भूटान 63.170
म्यांमार 77.638
अफगानिस्तान 89.547
बांग्लादेश 90.630
नेपाल 98.463
भारत101.200
पाकिस्तान 106.259
श्रीलंका 108.613
चीन 110.113
नोट: यह औसत रेट भारतीय रुपये में है।
स्रोत: www.globalpetrolprices.com
कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिन देशों में फ्यूल मार्केट पूरी तरह से लिबरलाइज्ड है, वहां कीमतें तेजी से बदलती हैं। आमतौर पर क्रूड ऑयल प्राइस में बदलाव का असर खुदरा कीमतों पर दिखने में कुछ हफ्तों का समय लगता है।
जिन देशों में ईंधन पर टैक्स कम होता है, वहां कीमतों में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिलता है। इसके विपरीत, यूरोप जैसे क्षेत्रों में उच्च टैक्स के कारण कीमतों में बदलाव अपेक्षाकृत कम रहता है।
दूसरी ओर, जिन देशों में सरकार ईंधन की कीमतें नियंत्रित करती है, वहां अक्सर कीमतों में बदलाव करने से पहले यह देखा जाता है कि तेल की कीमतों में आया बदलाव स्थायी है या अस्थायी। बड़े झटकों की स्थिति में सरकारें कीमतों को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप भी करती हैं।
तेल उत्पादक देशों में भी कीमतें बढ़ीं
नाइजीरिया जैसे तेल उत्पादक देश में भी कीमतें बढ़ी हैं, क्योंकि वहां की रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय दरों पर तेल खरीदती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में और देशों में ईंधन महंगा हो सकता है। फिलहाल एशिया में तेल की कमी ज्यादा महसूस की जा रही है, जिसके चलते कई देशों में कीमतों में तेज उछाल आया है।




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