भारत में तो कुछ नहीं… इन देशों ने गजब के बढ़ाए हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम 3 रुपये बढ़ गए हैं। दुनिया के कई बड़े देशों की तुलना में यह अब भी काफी कम बढ़ोतरी मानी जा रही है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहरा गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। करीब चार साल बाद हुई यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए किसी झटके से कम नहीं है। हालांकि, दुनिया के कई बड़े देशों की तुलना में यह अब भी काफी कम बढ़ोतरी मानी जा रही है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहरा गया है और पाकिस्तान समेत कई देशों ने ईंधन की कीमतों में 20 से 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है।
किस देश का क्या हाल?
एक आंकड़े के मुताबिक पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 55 और 45 पर्सेंट तक बढ़ गए हैं। वहीं, म्यांमार में पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% तक महंगा हुआ जबकि मलेशिया, यूएई और अमेरिका में भी ईंधन कीमतों में 40 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह, श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल केवल 3.2% और डीजल 3.4% महंगा हुआ है।
देश पेट्रोल डीजल में बढ़ोतरी
भारत +3.2% +3.4%
म्यांमार +89.7% +112.7%
मलेशिया +56.3% +71.2%
पाकिस्तान +54.9% +44.9%
यूएई +52.4% +86.1%
अमेरिका +44.5% +48.1%
फ्रांस + 20.9% +31.0%
भारत में 4 साल बाद बढ़े दाम
बता दें कि भारत पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शुक्रवार को तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल के दाम में पहली वृद्धि है। आखिरी बार दरों में बढ़ोतरी अप्रैल 2022 में हुई थी।
दरअसल, वैश्विक ऊर्जा कीमतें 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका–इजराइल हमले के बाद और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के कारण तेजी से बढ़ीं। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य अवरूद्ध हो गया जिससे दुनिया के तेल और गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है। पेट्रोल और डीजल बनाने का कच्चा माल यानी कच्चा तेल संघर्ष के दौरान एक समय 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था जबकि संघर्ष से पहले यह 70–72 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में था।
हाल के समय में कीमतें कुछ नरम हुई हैं, लेकिन फिर भी 104–110 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों को भारी घाटा हुआ लेकिन चुनाव के मद्देनजर खुदरा दरें स्थिर रखी गईं। तेल कंपनियां चुनाव से पहले पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी पर 674 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठा रही थीं।




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