बकरीद पर कुर्बानी के लिए ऑनलाइन खरीदारी पड़ेगी भारी, जानें पुलिस ने क्यों दी चेतावनी
ईद-उल-अजहा यानी बकरीद नजदीक आने पर पुलिस ने लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने की सलाह दी है। ठग सोशल मीडिया और कई वेबसाइटों पर कुर्बानी के जानवरों के आकर्षक विज्ञापन डाल रहे हैं। इनमें झूठी तस्वीरें, कम कीमतें और लुभावने ऑफर दिखाकर लोगों को फंसाया जाता है।

बकरीद मुसलमानों का प्रमुख त्योहार है, जो हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इस दिन बकरा, भेड़, ऊंट या भैंस की कुर्बानी दी जाती है। मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा गरीबों को, दूसरा रिश्तेदारों-पड़ोसियों को और तीसरा अपने परिवार के लिए।
बकरीद कब है?
एएनआई के X पोस्ट के मुताबिक इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया और मरकजी चांद कमेटी फरंगी महल के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, "मरकजी चांद कमेटी फरंगी महल लखनऊ ने ऐलान किया है कि ईद उल-अजहा का चांद नहीं देखा गया। इसलिए, ईद उल-अजहा 28 मई, 2026 को मनाई जाएगी और ईद उल-अजहा की नमाज सुबह 10 बजे ईदगाह, लखनऊ में अदा की जाएगी।" बता दें सऊदी अरब, मलेशिया, इंडोनेशिया में बकरीद ईद 27 मई 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी
पुलिस ने कहां और क्यों किया अलर्ट
इस बीच खबर दुबई से आ रही है। खलीज टाइम्स के मुताबिक ईद-उल-अजहा यानी बकरीद नजदीक आने पर पुलिस ने लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने की सलाह दी है। दुबई पुलिस ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि त्योहार पर कुर्बानी के लिए जानवर खरीदने के चक्कर में न पड़ें। साइबर अपराधियों ने नए-नए फर्जी तरीके अपना लिए हैं।
दुबई पुलिस के अनुसार, ठग सोशल मीडिया और कई वेबसाइटों पर कुर्बानी के जानवरों के आकर्षक विज्ञापन डाल रहे हैं। इनमें झूठी तस्वीरें, कम कीमतें और लुभावने ऑफर दिखाकर लोगों को फंसाया जाता है।
कैसे होती है ठगी?
ठग जानवर बुक करने या डिलीवरी के नाम पर एडवांस पेमेंट मांगते हैं और पैसे ट्रांसफर होते ही वे गायब हो जाते हैं। न जानवर मिलता है, न रिफंड। यह स्कैम मौसमी डिमांड और लोगों की जल्दबाजी का फायदा उठाता है।
दुबई पुलिस की लोगों को सलाह कुछ सलाह दी है, जिसमें कहा गया है कि अनाप-शनाप कम कीमतों या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए ऑफर से सतर्क रहें। जानवर सिर्फ अधिकृत संस्थाओं और आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही खरीदें। विक्रेता का वेरिफिकेशन जरूर करें।
बकरीद के दिन क्या होता है
इस्लाम के पांच पिलर्स में से एक मक्का की हज यात्रा के बाद, ईद अल-अजहा इब्राहिम के बलिदान की याद दिलाता है। परंपरागत रूप से, मुसलमान मस्जिद में सुबह की इबादत के साथ त्योहार मनाते हैं। इसके बाद जानवरों की बलि दी जाती है। आमतौर पर बकरे, भेड़, भैंस या ऊंट की बलि दी जती है।
इस दिन, मुसलमान गिफ्ट और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। भव्य दावतों का आयोजन करते हैं और रिश्तेदारों, दोस्तों और परिवार के साथ-साथ जरूरतमंदों और गरीबों लोगों को कुर्बानी का मांस बांटते हैं।




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