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1 अप्रैल से लागू होंगे नए आयकर नियम, बदलेंगे ये नियम, टैक्सपेयर्स के लिए जानना जरूरी

1 अप्रैल 2026 से देश में आयकर से जुड़े नए नियम लागू होने जा रहे हैं। सरकार ने आयकर नियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जो पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह नया आयकर अधिनियम, 2025 को सपोर्ट करेंगे।

Mon, 16 March 2026 10:12 PMVarsha Pathak लाइव हिन्दुस्तान
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1 अप्रैल से लागू होंगे नए आयकर नियम, बदलेंगे ये नियम, टैक्सपेयर्स के लिए जानना जरूरी

Income-tax Rules: 1 अप्रैल 2026 से देश में आयकर से जुड़े नए नियम लागू होने जा रहे हैं। सरकार ने आयकर नियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जो पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह नया आयकर अधिनियम, 2025 को सपोर्ट करेंगे। इन नियमों को 15 दिन की सार्वजनिक समीक्षा के लिए जारी किया गया था। नए नियम मुख्य तौर पर सैलरी पाने वाले कर्मचारियों, मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स और कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें सैलरी से जुड़े पर्क, कंपनी सुविधाओं और कुछ आय के टैक्स की गणना को ज्यादा स्पष्ट किया गया है।

क्या है डिटेल

सरकार के मुताबिक, ये नए नियम वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होंगे, यानी इनका असर असेसमेंट ईयर 2027-28 से दिखाई देगा। नियमों में कई ऐसे फॉर्मूले और सीमाएं तय की गई हैं, जिनके आधार पर टैक्स अधिकारी यह तय करेंगे कि किसी कर्मचारी को मिलने वाली सुविधाओं या लाभों का टैक्सेबल वैल्यू कितना होगा। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सैलरी से जुड़े टैक्स कैलकुलेशन में ज्यादा पारदर्शिता आएगी।

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नए नियम में क्या होगा बदलाव

नए नियमों के अनुसार, अगर किसी कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड में कंपनी का कुल योगदान साल में 7.5 लाख रुपये से ज्यादा होता है, तो उस अतिरिक्त हिस्से पर टैक्स लगेगा। इसमें प्रोविडेंट फंड (PF), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और सुपरएनुएशन फंड शामिल हैं। इतना ही नहीं, 7.5 लाख रुपये से ऊपर की राशि पर मिलने वाली कमाई भी टैक्सेबल मानी जाएगी।

कंपनी द्वारा दिए जाने वाले घर यानी कंपनी अकॉमोडेशन के टैक्स नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए टैक्सेबल वैल्यू शहर की आबादी के हिसाब से तय होगी। 40 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में सैलरी का 10%, 15 से 40 लाख आबादी वाले शहरों में 7.5% और छोटे शहरों में 5% हिस्सा टैक्सेबल माना जाएगा। अगर कर्मचारी कंपनी को किराया देता है तो यह राशि उस वैल्यू से घटा दी जाएगी।

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कंपनी कार के इस्तेमाल को लेकर भी तय रकम निर्धारित की गई है। अगर कर्मचारी कंपनी की कार का इस्तेमाल आधिकारिक और निजी दोनों कामों में करता है, तो 1.6 लीटर तक की कार पर 5,000 रुपये प्रति माह और उससे ज्यादा इंजन वाली कार पर 7,000 रुपये प्रति माह टैक्सेबल वैल्यू मानी जाएगी। अगर ड्राइवर भी कंपनी देता है तो 3,000 रुपये अतिरिक्त जोड़े जाएंगे। इसी तरह कंपनी की ओर से दिए गए गिफ्ट या वाउचर 15,000 रुपये तक टैक्स-फ्री रहेंगे, लेकिन इससे ज्यादा होने पर पूरी राशि टैक्सेबल हो जाएगी।

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इसके अलावा ऑफिस में मिलने वाला खाना या पेय पदार्थ 200 रुपये प्रति मील तक टैक्स-फ्री रहेगा। वहीं अगर कंपनी कर्मचारी को ब्याज-मुक्त या कम ब्याज वाला लोन देती है, तो उस पर भी टैक्स लग सकता है। हालांकि 2 लाख रुपये तक के लोन और कुछ मेडिकल जरूरतों के लिए दिए गए लोन को छूट मिलेगी। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि इन नियमों के लागू होने से कर्मचारियों को अपनी सैलरी स्ट्रक्चर और मिलने वाले पर्क्स को पहले से समझना और प्लान करना जरूरी होगा, क्योंकि आने वाले समय में इनका असर सीधे सैलरी स्लिप और Form-16 पर दिख सकता है।

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