LPG और CNG का संकट… मोदी सरकार ने नेचुरल गैस पर लगाया सख्त कानून
मोदी सरकार ने ग्लोबल सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए देश में रसोई गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लगा दिया है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ग्लोबल सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए देश में रसोई गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लगा दिया है। सरकार की ओर से इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर वितरण में समानता और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया गया है।
क्या है इस अधिनियम में?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 के अनुसार, घरेलू पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की आपूर्ति, परिवहन के लिए सीएनजी की आपूर्ति, एलपीजी उत्पादन और पाइपलाइन कॉम्प्रेशर फ्यूल के लिए अन्य अनिवार्य पाइपलाइन परिचालन जरूरतों को प्राथमिकता सेक्टर-1 में रखा गया है। इन उपभोक्ताओं को पिछले छह महीने की औसत के बराबर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं अन्य क्षेत्रों के लिए आपूर्ति में कटौती की जायेगी।
उर्वरक समेत चाय उद्योग तक पर असर
उर्वरक प्लांट्स को प्राथमिकता सेक्टर-2 में रखा गया है। उन्हें पिछले छह महीने की औसत के 70 प्रतिशत तक आपूर्ति की जायेगी। साथ ही यह पाबंदी होगी कि वे इसका इस्तेमाल किसी और उद्देश्य के लिए नहीं कर सकेंगे। प्राथमिकता सेक्टर-3 में चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। वे पिछले छह महीने की औसत के 80 प्रतिशत तक इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सिटी गैस वितरकों को दी गयी है। पेट्रो केमिकल प्लांट्स और पावर प्लांट्स को भी गैस की आपूर्ति में पूरी तरह या आंशिक तौर पर कटौती की जायेगी।
एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने का आदेश
सरकार ने सभी तेल कंपनियों को एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा है ताकि आम लोगों के लिए इसकी कमी न हो। अन्य उपभोक्ताओं को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कटौती करते इसे एलपीजी उत्पादन में इस्तेमाल किया जायेगा। इसके साथ ही तेल कंपनियों से पिछले छह महीने के उपभोग के 65 प्रतिशत तक ही गैस का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है।
एलपीजी खपत के आंकड़े
बता दें कि भारत की एलपीजी खपत वित्त वर्ष 2024-25 में 3.13 करोड़ टन थी, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया गया था जबकि बाकी का आयात किया गया था। भारत का 85-90 प्रतिशत आयात सऊदी अरब जैसे देशों से आता है जो आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच एक सप्ताह से जारी संघर्ष के कारण यह समुद्री मार्ग बंद हो गया है।




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