इंडिगो-स्पाइसजेट के शेयरों ने भरी उड़ान, तेल की गिरती कीमतों ने फूंकी जान
एयरलाइन शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। आज तेल की कीमतों में आई गिरावट ने इनके शेयरों में जान फूंक दी है। इंडिगो का शेयर 5.6% उछलकर 4475.25 रुपये के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि स्पाइसजेट के शेयर में 7.7% की तेजी आई और यह 14.08 रुपये पर पहुंच गया।

एयरलाइन शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और स्पाइसजेट के शेयरों में तेजी की वजह कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट रही। आज तेल की कीमतों में आई गिरावट ने इनके शेयरों में जान फूंक दी है। साथ ही यह भी उम्मीद जगी है कि हाल के दिनों में जारी व्यवधानों के बाद एयरलाइन कंपनियों का परिचालन धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकता है।
कच्चे तेल में गिरावट: क्या है वजह?
कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% की गिरावट आई। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान था, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद जितना डर था, उससे कहीं पहले यह खत्म हो सकता है। उन्होंने तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील दिए जाने की भी संभावना जताई। इस खबर के बाद इंडिगो का शेयर 5.6% उछलकर 4475.25 रुपये के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि स्पाइसजेट के शेयर में 7.7% की तेजी आई और यह 14.08 रुपये पर पहुंच गया।
तेल बाजार पर ट्रंप के बयान का असर
ट्रंप के इस बयान के बाद तेल बाजार में तेजी से प्रतिक्रिया हुई कि संघर्ष की अवधि अनुमान से कम हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रशासन ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए कई कदम उठाने पर विचार कर रहा है। इसमें तेल से जुड़े प्रतिबंधों में ढील देना और होर्मुज स्ट्रेट से होकर कच्चे तेल की सप्लाई सुचारू रखने के लिए अमेरिकी नौसेना को टैंकरों की सुरक्षा के लिए भेजना शामिल है।
G7 देशों की प्रतिबद्धता
इससे पहले सोमवार को G7 देशों ने कहा था कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ी तो वे रणनीतिक तेल भंडार जारी करने सहित सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं। इन सब खबरों के बीच मंगलवार सुबह करीब 9:15 बजे ब्रेंट क्रूड करीब 6% गिरकर 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया था। शुरुआती कारोबार में यह 10% तक लुढ़क गया था।
भारत के लिए राहत की खबर
तेल की कीमतों में आई इस गिरावट ने भारतीय बाजारों को बड़ी राहत दी है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें आयात बिल बढ़ाकर और महंगाई का जोखिम पैदा करके देश की आर्थिक स्थितियों पर काफी दबाव डाल सकती हैं। गौरतलब है कि इस गिरावट से पहले सोमवार को ब्रेंट क्रूड में भारी तेजी आई थी और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, जो जुलाई 2022 के बाद का उच्चतम स्तर था। इस तेजी की वजह यह आशंका थी कि संघर्ष बढ़ने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई बाधित हो सकती है।
इंडिगो की उड़ानों पर भी असर
बता दें कि पिछले हफ्ते जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद क्षेत्र के कई देशों में जवाबी कार्रवाई शुरू हो गई थी, तब इंडिगो ने भी मध्य पूर्व के लिए अपनी सभी उड़ानें निलंबित कर दी थीं। अब तेल की कीमतों में आई नरमी से एयरलाइन कंपनियों को अपने परिचालन को फिर से शुरू करने में भी मदद मिल सकती है।




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