Income Tax New Rule change from 1 april these are rule change know details टैक्सपेयर्स के लिए जानना जरूरी, 1 अप्रैल से बदल रहे हैं ये बड़े नियम, फटाफट चेक कर लें, Business Hindi News - Hindustan
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टैक्सपेयर्स के लिए जानना जरूरी, 1 अप्रैल से बदल रहे हैं ये बड़े नियम, फटाफट चेक कर लें

सरकार का कहना है कि इस नए कानून का मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना, भाषा को सरल करना और विवादों को कम करना है। हालांकि, राहत की बात यह है कि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, यानी आपकी टैक्स दरें फिलहाल पहले जैसी ही रहेंगी।

Sun, 22 March 2026 12:01 PMVarsha Pathak लाइव हिन्दुस्तान
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टैक्सपेयर्स के लिए जानना जरूरी, 1 अप्रैल से बदल रहे हैं ये बड़े नियम, फटाफट चेक कर लें

Income Tax New Rule: 1 अप्रैल 2026 से भारत में इनकम टैक्स से जुड़ा बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। अब पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू होगा। सरकार का कहना है कि इस नए कानून का मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना, भाषा को सरल करना और विवादों को कम करना है। हालांकि, राहत की बात यह है कि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, यानी आपकी टैक्स दरें फिलहाल पहले जैसी ही रहेंगी।

क्या है बदलाव

सबसे बड़ा बदलाव 'टैक्स ईयर' के कॉन्सेप्ट में देखने को मिलेगा। अभी तक हम फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर के हिसाब से टैक्स समझते थे, लेकिन अब इसे खत्म करके एक ही 'टैक्स ईयर' लागू किया जाएगा। इससे आम लोगों के लिए टैक्स फाइलिंग को समझना और आसान हो जाएगा और कन्फ्यूजन भी कम होगा।

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ITR फाइल करने की तारीखों में भी बदलाव किया गया है। अब आम सैलरीड लोग, जो ITR-1 या ITR-2 भरते हैं, उन्हें 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं जिन लोगों की बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम है और जिन्हें ऑडिट की जरूरत नहीं है, उन्हें 31 अगस्त तक का समय मिलेगा। जिन मामलों में ऑडिट जरूरी है, उनके लिए आखिरी तारीख 31 अक्टूबर रखी गई है, जबकि कुछ खास मामलों में 30 नवंबर तक की डेडलाइन दी जाएगी।

रिवाइज्ड रिटर्न भरने के नियमों में भी राहत

सरकार ने रिवाइज्ड रिटर्न भरने के नियमों में भी राहत दी है। अब टैक्सपेयर्स को गलती सुधारने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। पहले यह समय 9 महीने का था, जिसे बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है। हालांकि 9 महीने के बाद रिटर्न फाइल करने पर जुर्माना देना होगा, जो आपकी इनकम के हिसाब से तय किया जाएगा।

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नए नियमों में शेयर बाजार और विदेश में पैसे भेजने से जुड़े टैक्स में भी बदलाव किया गया है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर STT बढ़ा दिया गया है, जिससे ट्रेडर्स की लागत बढ़ सकती है। वहीं विदेश भेजे जाने वाले पैसे (LRS) पर TCS दर घटाकर 2% कर दी गई है, खासकर शिक्षा और इलाज के खर्च के लिए। इसके अलावा अब शेयर बायबैक से होने वाली कमाई को कैपिटल गेन माना जाएगा और उसी हिसाब से टैक्स लगेगा।

कुछ राहत भरे बदलाव भी किए गए हैं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम से मिलने वाले ब्याज पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा और न ही TDS कटेगा। ऑफिस आने-जाने के लिए कंपनी द्वारा दी गई ट्रांसपोर्ट सुविधा को भी टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया गया है। वहीं PAN से जुड़े नियमों को और सख्त करने की तैयारी है, जिससे बड़े लेन-देन पर निगरानी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, नया टैक्स सिस्टम आसान तो बनेगा, लेकिन कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त सावधानी भी रखनी होगी।

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