EMI वाले फोन पर हर घंटे ₹250 देगा बैंक... 3 प्वाइंट में समझें RBI के नए नियम
लोन नहीं चुकाने वाले ग्राहकों के मोबाइल फोन को बैंक कंट्रोल कर सकेंगे। बैंक को डिवाइस के कुछ फंक्शन को डिसेबल करने का अधिकार होगा। हालांकि, इससे पहले बैंक की ओर से ग्राहकों को नोटिस भी दिया जाएगा।

अगर स्मार्टफोन या iPhone खरीदने के लिए लोन लेने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, केंद्रीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इससे संबंधित ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इसके तहत लोन नहीं चुकाने वाले ग्राहकों के मोबाइल फोन को बैंक कंट्रोल कर सकेंगे। बैंक को डिवाइस के कुछ फंक्शन को डिसेबल करने का अधिकार होगा। हालांकि, इससे पहले बैंक की ओर से ग्राहकों को नोटिस भी दिया जाएगा। वहीं, लोन चुकाने के एक घंटे के भीतर ग्राहक के डिवाइस की सभी सेवाओं को दोबारा एक्टिव कर देना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो ग्राहक प्रति घंटे 250 रुपये मुआवजा के हकदार होंगे। आइए डिटेल में रिजर्व बैंक के ड्राफ्ट नियम को जान लेते हैं।
क्या किसी भी फोन को ब्लॉक कर सकेंगे बैंक?
RBI का प्रस्ताव है कि बैंक लोन की बकाया रकम वसूलने के लिए फाइनेंस किए गए डिवाइस के कुछ फंक्शन को डिसेबल कर सकते हैं। मतलब ये कि उसी मोबाइल फोन के कुछ फंक्शन को डिसेबल किया जाएगा जिसे लोन पर लिया गया है। आपके अन्य किसी भी मोबाइल फोन को ब्लॉक या डिसेबल करने का अधिकार बैंक के पास नहीं है। लोन पर लिए गए जिस फोन को बैंक डिसेबल कर सकेंगे उसमें भी इंटरनेट, इनकमिंग कॉल, आपातकालीन एसओएस और सरकारी सुरक्षा संदेश जैसी फीचर्स बाधित नहीं होंगे।
किन परिस्थितियों में ब्लॉक करने की इजाजत?
बैंकों के लिए फोन को डिसेबल करने से पहले कुछ शर्तों का पालन करना होगा। मोबाइल फोन का वह लोन 90 दिन से अधिक समय तक बकाया हो और ग्राहक ने नोटिस के बावजूद भुगतान न किया हो। जब लोन 60 दिन से ज्यादा समय तक बकाया रहता है तो ग्राहक को एक नोटिस जारी किया जाएगा। इसमें उधार लेने वाले को डिफॉल्ट ठीक करने के लिए कम से कम 21 दिन का समय दिया जाएगा।
इस नोटिस की समय सीमा खत्म होने के बाद एक और नोटिस दिया जाता है, जिसमें डिफॉल्ट ठीक करने के लिए कम से कम 7 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाता है। इसके बाद भी लोन का भुगतान नहीं होता है तो बैंक डिवाइस को कंट्रोल कर सकेंगे।
अगर लोन भुगतान के बाद भी फोन एक्टिव नहीं हुआ तब?
यदि ग्राहक बकाया चुका देता है तो बैंक को एक घंटे के भीतर डिसेबल की गईं सभी सेवाएं बहाल करनी होंगी। ऐसा न करने पर बैंक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा। जैसे ही लोन पूरी तरह चुका दिया जाएगा, मोबाइल को कंट्रोल करने के लिए लगाया गया मैकेनिज्म हटा दिया जाएगा। ग्राहक के पास किसी भी चरण पर, लोन का कुछ हिस्सा या पूरा लोन पहले ही चुका देने का अधिकार होगा।
रिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज वसूली के लिए नियुक्त एजेंटों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर उधारकर्ता की जानकारी साझा करना या बार-बार कॉल करना, मैसेज भेजना कठोर वसूली तरीकों में शामिल होगा।
इन सभी तरीकों पर रोक रहेगी। बैंकों को वसूली कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें कॉल की संख्या, समय और बातचीत का विवरण शामिल होगा। आरबीआई ने कहा कि इन प्रस्तावित नियमों को एक अक्टूबर, 2026 से लागू करने की योजना है। हितधारक 31 मई तक अपने सुझाव दे सकते हैं।




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