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भारत आने वाले पैसों पर ईरान-इजरायल जंग से कितना पड़ेगा असर

भारत में आने वाले कुल रेमिटेंस में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा (20.5%) है। इसके बाद केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश का नंबर आता है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में रेमिटेंस बढ़कर 38.2 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 34.4 अरब डॉलर था।

Tue, 3 March 2026 06:32 AMDrigraj Madheshia मिंट
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भारत आने वाले पैसों पर ईरान-इजरायल जंग से कितना पड़ेगा असर

●श्याम घोष और देविना सेनगुप्ता

मध्य-पूर्व में ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले जारी है। इस संघर्ष से भारत में विदेशी कामगारों द्वारा भेजे जाने वाले पैसों (रेमिटेंस) में बड़ी रुकावट आने की संभावना कम है। जानकारों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कुल रेमिटेंस में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी कम हुई है।

भारतीय राज्यों की स्थिति

भारत में आने वाले कुल रेमिटेंस में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा (20.5%) है। इसके बाद केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश का नंबर आता है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में रेमिटेंस बढ़कर 38.2 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 34.4 अरब डॉलर था।

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अमेरिका पश्चिम एशिया से आगे

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में धन भेजने के मामले में अमेरिका पश्चिम एशिया से आगे निकल गया है। बता दें, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में भारत का कुल रेमिटेंस बढ़कर 38.2 अरब डॉलर हो गया, जो एक वर्ष पहले 34.4 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों ने रेमिटेंस पर प्रभाव कम पड़ने के लिए दो कारण गिना रहे हैं।

पहला, उन्होंने उम्मीद जताई कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों के आसपास बढ़ा तनाव कम समय के लिए होगा और यह पूर्ण युद्ध में नहीं बदलेगा। दूसरा, अब भारत आने वाले रेमिटेंस में अमेरिका की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।

रेमिटेंस में अमेरिका की 27.7 फीसदी हिस्सेदारी

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता का कहना है कि अगर स्थिति जल्द सामान्य होती है, तो रेमिटेंस में कोई बड़ी गिरावट नहीं दिखेगी और अगर कोई असर पड़ा भी तो वह अल्पकालिक होगा। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में भारत आने वाले रेमिटेंस में अमेरिका 27.7 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा स्रोत है। यूएई वर्ष 2017 में शीर्ष पर था, वह अब दूसरे स्थान पर है।

ईरान से बाहर बढ़ा संघर्ष

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है, संघर्ष अब ईरान से बाहर दुबई, दोहा, ओमान जैसे क्षेत्रों तक फैल गया है, जहां भारत का बड़ा श्रमिक वर्ग रहता है। ऐसे में वहां से आने वाले पैसों पर कुछ असर जरूर पड़ सकता है। कहा, अमेरिका में रहने वाले भारतीय अधिक समृद्ध हैं, जो बड़ी मात्रा में पैसा घर भेजते हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर भी बुरा असर पड़ेगा। आमतौर पर तेल की कीमतें बढ़ने से भारत को मिलने वाला रेमिटेंस बढ़ता है, लेकिन युद्ध की मौजूदा स्थिति में शायद ऐसा न हो।

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