कोटक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की शाखाओं में अचानक पहुंची पुलिस, वजह क्या है?
सोमवार (30 मार्च) की सुबह पंचकूला में AU स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक की शाखाओं के बाहर हरियाणा पुलिस तैनात की गई। मौके से सामने आए वीडियो में बैंकों के बाहर भारी पुलिस बल देखा गया, जिससे कुछ समय के लिए बैंकिंग गतिविधियां बाधित हो गईं।
हरियाणा के पंचकूला नगर निगम की करीब 150 करोड़ रुपये की सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) में कथित गड़बड़ी के मामले में राज्य पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, सोमवार (30 मार्च) की सुबह पंचकूला में AU स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक की शाखाओं के बाहर हरियाणा पुलिस तैनात की गई। मौके से सामने आए वीडियो में बैंकों के बाहर भारी पुलिस बल देखा गया, जिससे कुछ समय के लिए बैंकिंग गतिविधियां बाधित हो गईं। सीएनबीसी की एक खबर में सूत्रों ने बताया कि शुरुआती समय में बैंक कर्मचारियों को शाखाओं के ताले तक खोलने से रोका गया।
हालांकि, कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हुई और दोनों बैंकों की शाखाओं में कामकाज फिर से शुरू हो गया। सूत्रों ने पुष्टि की है कि कोटक महिंद्रा बैंक की सभी शाखाएं फिर से खोल दी गईं। वहीं, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की शाखाओं ने भी अपना सामान्य कामकाज फिर से शुरू कर दिया। हालांकि, दोनों बैंकों से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगी गई है, लेकिन अब तक कोई जवाब सामने नहीं आया था।
इस बीच, कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर की बात करें तो यह सोमवार को करीब 4 पर्सेंट गिर गया। शेयर की क्लोजिंग 353.20 रुपये पर हुई। वहीं, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर करीब 5 पर्सेंट टूटकर 842.75 रुपये पर ठहरे।
क्या है मामला?
यह मामला पंचकूला के सेक्टर-11 स्थित बैंक शाखा में नगर निगम पंचकूला की सावधि जमा रसीद (एफडीआर) और बैंक खातों में पाई गई अनियमितताओं से जुड़ा है। इस मामले में हरियाणा के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवीएसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव को गिरफ्तार किया है।
ब्यूरो द्वारा थाना एसीबी, पंचकूला में 24 मार्च को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के अनुसार, नगर निगम ने बैंक में लगभग 145 करोड़ रुपये की 16 एफडी जमा कराई थीं, जिनकी मैच्योरिटी रकम करीब 158 करोड़ रुपये थी लेकिन बैंक रिकॉर्ड और निगम के दस्तावेजों में गंभीर अंतर पाया गया। खातों में दर्शाई गई राशि अपेक्षा से काफी कम मिली, वहीं कुछ ऐसे अतिरिक्त खाते भी सामने आए जो निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने अन्य संदिग्धों के साथ मिलकर एफडी से संबंधित भ्रामक और गलत रिपोर्ट्स भेजीं, जिससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी पैदा हुई। इस आधार पर बैंक के अन्य अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी जांच जारी है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 13(1)(a) और 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।




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