gold price fell by rs 12364 silver by rs 37765 what will happen next amidst the war युद्ध के बीच ₹12364 सस्ता हो गया सोना, चांदी के भाव में ₹37765 की गिरावट, आगे क्या होगा?, Business Hindi News - Hindustan
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युद्ध के बीच ₹12364 सस्ता हो गया सोना, चांदी के भाव में ₹37765 की गिरावट, आगे क्या होगा?

Gold Silver Rate: युद्ध के बीच सोने के भाव 12364 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर चुके हैं। जबकि इस अवधि में चांदी 37765 रुपये प्रति किलो टूट चुकी है। सोमवार को 24 कैरेट सोने का भाव 146733 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जबकि, चांदी 230135 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।

Tue, 31 March 2026 01:02 PMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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युद्ध के बीच ₹12364 सस्ता हो गया सोना, चांदी के भाव में ₹37765 की गिरावट, आगे क्या होगा?

Gold Silver Rate: ईरान-इजरायल युद्ध जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे घरेलू शेयर मार्केट लुढ़कता जा रहा है। जबकि, सोने-चांदी की चाल इस बिल्कुल उल्टी है। अबतक माना जाता था कि युद्ध की स्थिति में दोनों धातुओं के भाव उछलते हैं, लेकिन हो रहा ठीक इसके उल्टा। युद्ध के बीच सोने के भाव 12364 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर चुके हैं। जबकि इस अवधि में चांदी 37765 रुपये प्रति किलो टूट चुकी है। सोमवार को 24 कैरेट सोने का भाव 146733 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जबकि, चांदी 230135 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।

आईबीजेए के रेट्स के मुताबिक 27 फरवरी 2026 को सोना 159097 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। जबकि, चांदी इस दिन 267900 रुपये प्रति किलो के रेट से बंद हुई थी। अगले दिन 28 फरवरी को इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया। शानिवार और रविवार के दिन आईबीजेए सोने-चांदी के रेट जारी नहीं करता।

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सोने-चांदी की गिरावट के पीछे 5 प्रमुख कारण

युद्ध के बीच सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों पर केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया ने बताया कि गिरावट एक साथ कई फैक्टर्स का नतीजा है। सोने-चांदी में गिरावट के उन्होंने निम्नलिखत कारण बताया है..

सट्टेबाजों पर शिकंजा कसने से घटी तेजी: बाजार नियामकों ने हाल ही में सोने के कारोबार में मार्जिन की दरें बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर छोटे निवेशकों पर पड़ा है। ऊंची मार्जिन के चलते सट्टेबाजी करने वालों की संख्या में कमी आई है और बाजार में तेजी को हवा देने वाले खिलाड़ी किनारे लग गए हैं। नतीजतन, कीमतों में अब नरमी है।

शेयर बाजार का सीधा असर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भी जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ते हैं, तो शेयर बाजार सबसे पहले अपनी चाल दिखाता है। ऐसे माहौल में जिन निवेशकों को शेयरों में नुकसान उठाना पड़ता है, वे अक्सर अपने दूसरे निवेश को बेचकर पैसा निकालने लगते हैं। सोना-चांदी उनकी पहली पसंद बनता है, क्योंकि यह मुनाफे में होता है। इस बिकवाली के दबाव ने भी सोने और चांदी की कीमतों को नीचे लाने में अहम भूमिका निभाई है।

ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से 30 मार्च तक सेंसेक्स करीब 9340 अंकों का गोता लगा चुका था। 27 फरवरी को सेंसेक्स 81,287 पर बंद हुआ था और 30 मार्च तक 71947 के लेवल पर बंद हुआ । निफ्टी की बात करें तो सोमवार को एनएसई का यह बेंचमार्क इंडेक्स 22331 पर बंद हुआ और 27 फरवरी को यह 25178 के लेवल पर था। इस अवधि में निफ्टी 2847 अंक लुढ़क चुका है।

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निवेश की धारा हुई धीमी: पिछले दिनों रिकॉर्डतोड़ तेजी के बाद अब गोल्ड में इन्वेस्टमेंट की रफ्तार ठंडी पड़ गई है। यही वजह है कि बाजार में अब बड़ी तेजी के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे।

डॉलर की मजबूती ने डाला दबाव: अमेरिकी डॉलर में हालिया मजबूती ने भी सोने की कीमतों को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घट जाती है।

कच्चे तेल की कीमतें: कच्चे तेल की उछलती कीमतों ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बहुत सारे निवेशक, जो गोल्ड सिल्वर में पैसा लगा रहे थे या लगा चुके थे, वहां से निकाल कर अब क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस में लगा रहे हैं। इससे सोने-चांदी की कीमतों पर असर पड़ रहा है।

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आगे क्या होगा

केडिया का अनुमान है कि साल 2026 में भारत में सोने की कुल मांग में कमी आ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह गहनों की बिक्री में संभावित गिरावट है। सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव जारी रहेंगे। निवेशकों को कमोडिटी मार्केट में पैसा धीरे-धीरे लगाना चाहिए। मार्केट में उतार-चढ़ाव को देखते हुए इस समय जोखिम अधिक है। सोने-चांदी की चाल अब सेफ हेवेन की तरह नहीं रही। इन धातुओं में गिरावट और उछाल अब स्मॉल कैप शेयरों की तरह हो गया है।

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