अमेरिकी SEC के आरोपों का मामला: अडानी समूह ने US कोर्ट से मांगा वक्त
गौतम अडानी और सागर अडानी ने रिश्वतखोरी से जुड़े एक मामले में अह जवाब दाखिल करने के लिए अमेरिकी अदालत से अधिक समय देने का अनुरोध किया है। बता दें कि प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने नवंबर 2024 में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर पर मुकदमा दायर किया था।
अरबपति गौतम अडानी और सागर अडानी ने रिश्वतखोरी से जुड़े एक मामले में अह जवाब दाखिल करने के लिए अमेरिकी अदालत से अधिक समय देने का अनुरोध किया है। यह अनुरोध अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) ने भी किया है। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने प्रस्तावों और जवाबों के लिए एक संशोधित समय-सारणी प्रस्तावित की है। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के लिए अमेरिकी जिला अदालत के समक्ष दायर एक याचिका में दोनों पक्षों ने कहा कि उन्होंने अदालत के सात अप्रैल के निर्देश के अनुरूप विचार-विमर्श किया है और एक नई समय-सीमा पर सहमति जताई है। इसे न्यायाधीश निकोलस जी गरौफिस के पास मंजूरी के लिए पेश किया गया है।
नवंबर 2024 में दायर हुआ था मुकदमा
बता दें कि प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने नवंबर 2024 में अडानी समूह के संस्थापक गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर पर मुकदमा दायर किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारत के सरकारी अधिकारियों से जुड़ी एक कथित रिश्वतखोरी योजना का खुलासा न करके निवेशकों को गुमराह किया।
गौतम अडानी और सागर अडानी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए अपने वकीलों के माध्यम से सात अप्रैल को 30 अप्रैल के नियोजित प्रस्ताव से पहले एक 'प्री-मोशन लेटर' दायर किया। इसमें धोखाधड़ी के मुकदमे को खारिज करने की मांग की गई। अडानी परिवार के वकीलों की तरफ से दलील दी गई है कि यह मामला अमेरिकी क्षेत्राधिकार से बाहर है और इसमें किसी भी तरह का गलत कार्य सिद्ध नहीं होता है।
समूह ने दी थी सफाई
समूह ने कहा कि उसके किसी भी संगठन या अधिकारियों पर अमेरिकी विदेशी भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कोई आरोप नहीं लगे हैं। साथ ही, फंडिंग जुटाने वाली उनकी रिन्यूएबल एनर्जी यूनिट अडानी ग्रीन एनर्जी, इस मामले की प्रक्रिया में शामिल नहीं है। समूह के वकीलों ने अदालत को बताया था कि 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड की बिक्री अमेरिका के बाहर की गई थी और इसमें अमेरिकी नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।
याचिका में यह भी कहा गया कि इस मामले में किसी भी निवेशक को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि 2024 में बॉन्ड की अवधि पूरी होने पर सभी निवेशकों को मूलधन और ब्याज का पूरा भुगतान कर दिया गया था। अडानी के वकीलों का यह भी कहना है कि यह मामला पूरी तरह भारत का है, क्योंकि जारी करने वाली कंपनी भारतीय है और सारा काम भी भारत में ही हुआ है। उन्होंने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी कानून यहां लागू नहीं होते। उन्होंने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी कानून यहां लागू नहीं होते।




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