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सोना से शेयर बाजार तक... बदल रहा लोगों के निवेश का पैटर्न

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि लोगों का निवेश पैटर्न बदल गया है। अब बड़ी संख्या में भारतीय परिवार म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

Thu, 21 May 2026 10:34 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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सोना से शेयर बाजार तक... बदल रहा लोगों के निवेश का पैटर्न

आमतौर पर जब भी निवेश की बात होती है तो लोग या तो बैंक में एफडी करवा लेते हैं या फिर सोना और जमीन-जायदाद में पैसा लगा देते हैं। हालांकि, बीते कुछ समय से यह पैटर्न तेजी से बदल रहा है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि अब बड़ी संख्या में भारतीय परिवार म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आइए जान लेते हैं कि रिपोर्ट में क्या कुछ कहा गया है।

क्या है रिपोर्ट में?

सेबी की नई रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि म्यूचुअल फंड अब लोगों की नियमित बचत का हिस्सा बनते जा रहे हैं। खासतौर पर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के जरिए हर महीने निवेश करने की आदत तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2023 में म्यूचुअल फंड में आने वाला निवेश 1.66 लाख करोड़ रुपये था, जो FY25 तक बढ़कर 5.13 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि अब निवेश केवल बड़े निवेशकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि छोटे निवेशक या आम परिवार भी धीरे-धीरे बाजार आधारित निवेश को अपना रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक FY25 में भारतीय परिवारों के पास इक्विटी, म्यूचुअल फंड, डेट प्रोडक्ट्स, REITs और InvITs में कुल 141.3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति थी।

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अकेले इक्विटी का हिस्सा 88.9 लाख करोड़ रुपये था जबकि म्यूचुअल फंड का हिस्सा 44.4 लाख करोड़ रुपये था। आसान शब्दों में कहें तो मार्केट में निवेश अब सिर्फ अनुभवी निवेशकों के एक छोटे से ग्रुप तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब काफ़ी ज़्यादा आम होता जा रहा है।

सोना और प्रॉपर्टी पर क्या हैं सकेत?

सोना और प्रॉपर्टी अब बचत के लिए एकमात्र पसंदीदा विकल्प नहीं रह गए हैं। सेबी के अनुसार सोना और रियल एस्टेट जैसी फिजिकल संपत्तियां अभी भी घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा हैं लेकिन वित्तीय बचत लगातार बढ़ रही है।

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घरेलू बचत में शुद्ध वित्तीय बचत का हिस्सा FY23 में 27 प्रतिशत से बढ़कर FY25 में 33 प्रतिशत हो गया। यह बात पहली बार में शायद बहुत बड़ी न लगे लेकिन यह लोगों के व्यवहार में आ रहे एक धीमे बदलाव की ओर इशारा करती है। अब ज्यादा से ज्यादा परिवार पारंपरिक संपत्तियों पर निर्भर रहने के बजाय बाजार से जुड़े निवेशों को लेकर सहज महसूस कर रहे हैं।

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रिपोर्ट में कहा गया कि कोविड महामारी के बाद निवेशकों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। घरेलू बचत का जो हिस्सा सिक्योरिटीज मार्केट में जा रहा था, वह FY23 के 2.59 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY25 में 6.91 लाख करोड़ रुपये हो गया। डिजिटल निवेश ऐप्स, आसान ऑनलाइन KYC और SIP को लेकर बढ़ती जागरूकता ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि भारतीय परिवारों की वास्तविक निवेश भागीदारी पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ी है।

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