FPI exodus hits 88180 crore rupees in March as West Asia tensions oil surge rattle markets know details विदेशी निवेशकों का हो रहा भारतीय शेयर बाजार से मोह भंग! निकाल लिए ₹88180 करोड़, Business Hindi News - Hindustan
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विदेशी निवेशकों का हो रहा भारतीय शेयर बाजार से मोह भंग! निकाल लिए ₹88180 करोड़

फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 महीनों का सबसे ऊंचा आंकड़ा था। हालिया निकासी के साथ 2026 में अबतक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं।

Sun, 22 March 2026 08:50 PMVarsha Pathak भाषा
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विदेशी निवेशकों का हो रहा भारतीय शेयर बाजार से मोह भंग! निकाल लिए ₹88180 करोड़

FPI News: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर होते रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में अबतक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये (लगभग 9.6 अरब डॉलर) निकाले हैं।

क्या है डिटेल

एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई की यह निकासी फरवरी में उनके द्वारा की गई खरीदारी के बाद देखने को मिली है। फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 महीनों का सबसे ऊंचा आंकड़ा था। हालिया निकासी के साथ 2026 में अबतक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं। मार्च में (20 मार्च तक), एफपीआई हर कारोबारी सत्र में शुद्ध बिकवाल रहे। उन्होंने इस दौरान 88,180 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। हालांकि, यह निकासी अक्टूबर, 2024 की 94,017 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी से कम है।

क्या कहते हैं जानकार

एंजल वन के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान ने कहा कि एफपीआई की निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया तनाव है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है, जिससे एफपीआई जोखिम लेने से बच रहे हैं।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि बढ़ता अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल एफपीआई की निकासी की एक और बड़ी वजह है। ज्यादा प्रतिफल ने डॉलर वाली संपत्तियों का आकर्षण बढ़ाया है, जिससे भारत जैसे उभरते बाज़ारों से एफपीआई निकासी कर रहे हैं।

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इसी तरह की चिंता जताते हुए जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष ने एफपीआई की बिकवाली को तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों में कमजोरी, रुपये में लगातार गिरावट और भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर पड़ने की आशंका ने निवेशक धारणा को प्रभावित किया है।

एफपीआई निपटान नियमों में ढील

शेयर बाजार नियामक सेबी का निदेशक मंडल सोमवार को एक व्यापक एजेंडा पर चर्चा करने के लिए बैठक करने वाला है। मामले से परिचित लोगों के अनुसार, इसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए कोष निपटान नियमों को आसान बनाने और बाजार मध्यस्थों के लिए नियामकीय ढांचे में बदलाव के प्रस्ताव शामिल हैं। एजेंडा का एक प्रमुख हिस्सा एफपीआई को उसी दिन के नकद बाजार व्यापार के लिए 'फंड नेटिंग' की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

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मौजूदा ढांचे के तहत, एक एफपीआई को इक्विटी नकद बाजार सौदों का निपटान सकल आधार पर करना होता है। यानी प्रत्येक खरीद लेनदेन के लिए अलग से फंड देना होता है, भले ही उसी दिन कोई बिक्री लेनदेन भी हुआ हो। सेबी ने 'फंड नेटिंग' की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है, जिससे एफपीआई उसी दिन की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग खरीद देनदारियों को चुकाने के लिए कर सकेंगे। इससे उन्हें केवल शुद्ध देय राशि ही चुकानी होगी।

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