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आपके साथ हो गया फ्रॉड तब भी नो टेंशन, 25000 रुपये तक मुआवजा देगा RBI

इसी फरवरी महीने में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने डिजिटल धोखाधड़ी में हो रही बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के लिए 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति देने की घोषणा की थी।

Fri, 6 March 2026 09:35 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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आपके साथ हो गया फ्रॉड तब भी नो टेंशन, 25000 रुपये तक मुआवजा देगा RBI

बीते कुछ साल से साइबर फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। स्कैमर लोगों की गाढ़ी कमाई एक झटके में उड़ा ले जाते हैं। हालांकि, ऐसे मामलों मे अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुआवजा देने की योजना बनाई है। मतलब जो पीड़ित है उसे शर्तों के साथ रिजर्व बैंक मुआवजा देगा। इस संबंध में आरबीआई एक प्रपोजल लेकर आया है। आइए डिटेल में इसके बारे में जान लेते हैं।

आरबीआई ने किया था ऐलान

दरअसल, इसी फरवरी महीने में भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल धोखाधड़ी में हो रही बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के लिए 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति देने की घोषणा की थी। ग्राहक को जीवन में केवल एक बार ही क्षतिपूर्ति मिलेगी और वह भी तब जब धोखाधड़ी का कोई गलत इरादा न पाया जाए। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था- जब तक पीड़ित के साथ धोखाधड़ी होती है, चाहे वह स्वयं की गलती से हो या किसी और की गलती से, बिना कोई सवाल पूछे 25,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। हम उन्हें तभी क्षतिपूर्ति देंगे जब लेनदेन अनजाने में हुआ हो और उन्होंने अपना पैसा गंवाया हो।

उन्होंने कहा कि ग्राहकों की भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है और धोखाधड़ी की राशि का 15 प्रतिशत खाताधारक को वहन करना होगा, भले ही धोखाधड़ी 25,000 रुपये की सीमा से कम हो। उच्च मूल्य की धोखाधड़ी के मामलों में, क्षतिपूर्ति 25,000 रुपये तक सीमित रहेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (कॉमर्शियल बैंकों के लिए जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण) तीसरा संशोधन निर्देश, 2026 शीर्षक वाले ये निर्देश 1 जुलाई 2026 को या उसके बाद किए गए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर लागू होंगे। केंद्रीय बैंक ने 6 अप्रैल, 2026 तक इस मसौदे पर हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

किसे मिलेगा मुआवजा?

इस मुआवजा योजना को पात्र होने के लिए पीड़ित को धोखाधड़ी वाले लेनदेन की रिपोर्ट बैंक को और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन के माध्यम से पांच कैलेंडर दिनों के भीतर करनी होगी।

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ग्राहक सुरक्षा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव

आरबीआई ने डिजिटल बैंकिंग में ग्राहक सुरक्षा नियमों में व्यापक बदलाव प्रस्तावित किए हैं। ड्राफ्ट में अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन की परिभाषा का विस्तार किया गया है, जिसमें ओटीपी, पिन, सीवीवी, पासवर्ड या अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण तंत्र जैसे प्रमाणीकरण विधियों के माध्यम से अनुमोदित भुगतान शामिल हैं। इस स्ट्रक्चर में उन मामलों को भी शामिल किया गया है जहां ग्राहकों को धोखे से वैध प्राप्तकर्ता बनकर धोखाधड़ी करने वालों को पैसे हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया जाता है या दबाव में लेनदेन को मंजूरी देने के लिए बाध्य किया जाता है।

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