ईरान युद्ध के असर से निपटने के लिए कोविड जैसी राहत योजना, मोदी कैबिनेट ने ₹1.81 लाख करोड़ किए मंजूर
मोदी कैबिनेट ने ईरान युद्ध से प्रभावित कारोबारों और एयरलाइंस के लिए ₹1.81 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना मंजूर की है। सरकार का कहना है कि इससे कारोबार को जारी रखने, नौकरियां बचाने और सप्लाई चेन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार ने ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित कारोबारों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने ₹1.81 लाख करोड़ (181 अरब रुपये) की क्रेडिट गारंटी योजना को मंजूरी दे दी है। इसका मकसद कंपनियों और एयरलाइंस को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। बता दें ईरान युद्ध का सबसे अधिक असर एयरलाइंस, MSME, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन आधारित उद्योगों पर पड़ा है।
सरकार देगी लोन पर गारंटी
ब्लूमबर्ग की खबर के अनुसार नई योजना के तहत केंद्र सरकार उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सॉवरेन गारंटी देगी, जो इस योजना के पात्र कंपनियों को अतिरिक्त कर्ज देंगे। केंद्र सरकार का कहना है कि इस राहत योजना से कारोबार को जारी रखने, नौकरियां बचाने और सप्लाई चेन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कोविड जैसी राहत योजना
यह क्रेडिट गारंटी योजना काफी हद तक कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) जैसी है। कोविड-19 महामारी के समय छोटे और मझोले यानी MSME सेक्टर को बिना गारंटी वाले ऑटोमैटिक लोन दिए गए थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2023 तक 1.1 करोड़ से ज्यादा गारंटी जारी की गई थीं, जिनकी कुल राशि ₹2.42 लाख करोड़ थी।
ईरान युद्ध से भारत पर बढ़ा दबाव
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। भारत पर इसका असर ज्यादा माना जा रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी गैस जरूरतों का लगभग 90% पश्चिम एशिया से आयात करता है।
अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर खतरा
पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और व्यापार लागत बढ़ने का खतरा है। हालांकि सरकार अभी भी वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8% से 7.2% GDP वृद्धि का अनुमान बनाए हुए है, लेकिन कई वैश्विक एजेंसियों ने अपने अनुमान घटा दिए हैं। गोल्डमैन सैक्स ने भारत की ग्रोथ 5.9% रहने का अनुमान जताया है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने 6.2% वृद्धि का अनुमान दिया है।
किन सेक्टरों को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस योजना से सबसे ज्यादा राहत इन सेक्टरों को मिल सकती है, जैसे एयरलाइंस, MSME, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन आधारित उद्योग। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच कंपनियों की फंडिंग बाधित न हो और रोजगार पर बड़ा असर न पड़े।




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