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होम, कार और पर्सनल लोन लेने वालों के लिए बड़ी खबर, इस बैंक ने बढ़ाई ब्याज दरें

इस फैसले का असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिनके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR से जुड़े हुए हैं। ऐसे ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या फिर लोन की अवधि लंबी हो सकती है। 

Tue, 9 June 2026 09:32 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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होम, कार और पर्सनल लोन लेने वालों के लिए बड़ी खबर, इस बैंक ने बढ़ाई ब्याज दरें

देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank, जिसका फुलफार्म हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कारपोरेशन बैंक है, ने अपने ग्राहकों को झटका देते हुए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 10 बेसिस प्वाइंट (0.10%) तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 8 जून 2026 से लागू हो गई हैं। पिछले महीने केनरा बैंक ने भी सभी अवधियों की MCLR में 5 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की थी।

इस फैसले का असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिनके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR से जुड़े हुए हैं। ऐसे ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या फिर लोन की अवधि लंबी हो सकती है। हालांकि, RBI के रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़े लोन पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।

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किन-किन अवधि की दरों में बढ़ोतरी?

HDFC Bank ने छोटी अवधि की MCLR दरों में 5 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है, जबकि 2 साल की MCLR में सबसे ज्यादा 10 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया गया है।

ओवरनाइट MCLR: 8.05% से बढ़कर 8.10%

3 महीने की MCLR: 8.15% से बढ़कर 8.20%

6 महीने की MCLR: 8.30% से बढ़कर 8.35%

1 साल की MCLR: 8.35% से बढ़कर 8.40%

2 साल की MCLR: 8.45% से बढ़कर 8.55%

3 साल की MCLR: 8.60% से बढ़कर 8.65%

वहीं, 1 महीने की MCLR दर 8.05% पर स्थिर रखी गई है।

MCLR क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

MCLR वह कम से कम ब्याज दर है, जिसके नीचे बैंक सामान्य परिस्थितियों में लोन नहीं दे सकते। कई पुराने होम लोन, वाहन लोन और रिटेल लोन इसी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। जब बैंक MCLR बढ़ाते हैं, तो लोन की ब्याज दर भी बढ़ जाती है। इससे ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है।

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RBI ने रेपो रेट नहीं बढ़ाया, फिर भी क्यों बढ़ी दरें?

हाल ही में RBI ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था। इसके बावजूद बैंक अपनी फंडिंग लागत, जमा पर ब्याज दर और बाजार में नकदी की स्थिति को देखते हुए MCLR में बदलाव कर सकते हैं। HDFC Bank का यह फैसला संकेत देता है कि बैंकों की फंड जुटाने की लागत अभी भी दबाव में है।

पहले घटी थीं दरें, अब फिर बढ़ोतरी

दिलचस्प बात यह है कि इसी साल मार्च में HDFC Bank ने MCLR में 10 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की थी। जनवरी और अप्रैल में भी चुनिंदा अवधि की दरों में कमी की गई थी। अब बैंक ने फिर से दरें बढ़ाकर कर्ज लेने वालों की चिंता बढ़ा दी है।

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