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किसानों के लिए बड़ा अलर्ट: ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा

महंगी उर्वरकों के आयात से सरकार के लिए किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है। सरकार अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत करना चाहती है, जो इस साल 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है।

Thu, 5 March 2026 07:09 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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किसानों के लिए बड़ा अलर्ट: ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा

Iran Israel War Impacts: भारत में फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों ने अपना उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है। इसकी वजह मध्य पूर्व में बढ़ती सैन्य कार्रवाई के चलते कतर से होने वाली लिक्विफायड प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई का ठप हो जाना है। एलएनजी यूरिया बनाने के लिए मुख्य कच्चा माल है, जो ऊर्जा स्रोत और उत्पादन प्रक्रिया में अहम इनपुट दोनों का काम करता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में 2.7 करोड़ टन एलएनजी का आयात किया, जो देश की कुल गैस खपत का लगभग आधा है। इस आयात का बड़ा हिस्सा कतर से होता है।

कंपनियों ने शुरू की उत्पादन में कटौती

इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) जैसी कुछ कंपनियों ने अपने यूरिया संयंत्रों में उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है। ब्लूमबर्ग ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया है कि अगर सप्लाई में यह रुकावट लंबी खिंची तो कंपनियों को अपने प्लांट्स बंद करने पड़ सकते हैं।

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सरकार का बयान: फिलहाल कोई कमी नहीं

भारत के उर्वरक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भू-राजनीतिक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और फिलहाल गैस सप्लाई में कोई कमी नहीं है। उन्होंने यूरिया उत्पादन में कटौती पर टिप्पणी नहीं की। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि निकट भविष्य की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त भंडार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि युद्ध जल्द ही समाप्त हो सकता है, लेकिन अगर यह जारी रहा तो चिंता का विषय होगा।

पाकिस्तान पर भी असर

इस संघर्ष का असर पाकिस्तान पर भी पड़ा है। सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन्स लिमिटेड ने अपने ग्राहकों को सूचित किया है कि वह उर्वरक संयंत्रों को रीगैसिफाइड एलएनजी की सप्लाई नहीं कर पाएगी। पाकिस्तान को अपनी अधिकांश एलएनजी कतर से मिलती है।

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महंगे आयात की आशंका

अगर उत्पादन में कटौती जारी रही तो जून में शुरू होने वाले मानसून सीजन से पहले भारत को महंगे आयात पर निर्भर होना पड़ सकता है। भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, साथ ही चीनी, गेहूं और कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

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सरकारी सब्सिडी पर बढ़ सकता है दबाव

महंगी उर्वरकों के आयात से सरकार के लिए किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है। सरकार अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत करना चाहती है, जो इस साल 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है।

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