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₹10,000 हो सकती है पेंशन, सरकार कर रही विचार, इन लोगों को होगा बड़ा फायदा

Atal Pension Yojana: रेहड़ी-पटरी, घरेलू कामगार, मजदूर और स्वरोजगार करने वाले लोगों की पेंशन 10000 रुपये महीना हो सकती है। अटल पेंशन योजना के तहत सरकार इस पर विचार कर रही है।

Thu, 23 April 2026 08:46 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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₹10,000 हो सकती है पेंशन, सरकार कर रही विचार, इन लोगों को होगा बड़ा फायदा

भारत सरकार इनफॉर्मल वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की योजना बना रही है। बढ़ती महंगाई और रिटायर लोगों के बढ़ते खर्च को देखते हुए, सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत दी जाने वाली न्यूनतम पेंशन की अपर लिमिट को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह करने पर विचार कर रही है। मिंट ने यह जानकारी तीन अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर दी है।

बता दें भारत में नफॉर्मल वर्कर्स वे श्रमिक हैं, जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। यहां नौकरी की सुरक्षा, फिक्स्ड सैलरी, या सामाजिक सुरक्षा (PF, पेंशन, छुट्टी) का अभाव होता है। ये देश के कुल वर्कफोर्स का लगभग 90% हिस्सा हैं, जिनमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, मजदूर और स्वरोजगार करने वाले शामिल हैं।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

अटल पेंशन योजना मई 2015 में शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, किसानों, दुकानदारों और छोटे व्यवसायियों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देना है। अभी इस योजना के तहत 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 प्रति माह तक की गारंटीड पेंशन दी जाती है। लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण यह राशि कम पड़ रही है।

मौजूदा हालात क्या हैं?

अटल पेंशन योजना में अब तक 9 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़ चुके हैं, लेकिन इनमें से लगभग आधे सदस्य नियमित योगदान देना बंद कर चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ज्यादा 1.35 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं। सरकार का मानना है कि पेंशन की लिमिट बढ़ाने से नए सदस्य जुड़ेंगे और पुराने सदस्य योजना में बने रहेंगे।

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नया प्रस्ताव क्या है?

वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक (PFRDA) मिलकर इस प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। संभावना है कि पेंशन की अपर लिमिट ₹8,000 से ₹10,000 प्रति माह कर दी जाए।एक अधिकारी ने बताया , “यह बदलाव योजना को और आकर्षक बनाएगा और बढ़ती जीवन-लागत के अनुसार ढालेगा।”

सरकार का कितना योगदान

जो सदस्य 31 मार्च 2016 से पहले जुड़े थे, उन्हें शुरुआती पांच साल में सरकार की तरफ से को-कंट्रीब्यूशन मिलता था। यह रकम सदस्य के योगदान का 50% (अधिकतम ₹1,000 प्रति वर्ष) थी। यह सुविधा केवल उन्हीं को मिलती थी, जो इनकम टैक्स का भुगतान नहीं करते थे और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा योजना से नहीं जुड़े थे।

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कैसे होगा योजना का विस्तार?

सरकार 'पेंशन सखी' और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) के जरिए गांव-गांव तक योजना पहुंचाने की योजना बना रही है। साथ ही, निरंतर योगदान की चुनौती पर भी काम हो रहा है।26 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने इस योजना को वित्त वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी। प्रचार, विकास और गैप-फंडिंग गतिविधियों के लिए भी मदद जारी रहेगी।

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क्या सरकार के खजाने पर पड़ेगा बोझ?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से सरकारी खजाने पर अधिक दबाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अटल पेंशन योजना ज्यादातर सदस्यों के अपने योगदान पर चलती है। ग्रांट थॉर्नटन के विवेक अय्यर कहते हैं, “APY एक निर्धारित-योगदान वाली योजना है। सुरक्षा ही इसका मुख्य उद्देश्य है। इसलिए इस बदलाव से सरकार पर कोई बड़ा वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।”

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