ईरान-अमेरिका की जंग से भरभराया ग्लोबल मार्केट, आगे कैसे रहेंगे हालात?
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों तथा तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इस संकट के चलते ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और तेल कीमतों में उछाल की आशंका से बाजारों में घबराहट फैल गई है।

US-Iran war: ईरान की अमेरिका और इजराइल के साथ छिड़ी जंग की वजह से भारत समेत दुनियाभर के शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। वैसे तो 3 मार्च को होली की वजह से शेयर बाजार बंद था लेकिन दुनियाभर के अन्य बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। MSCI एशिया Pacific इंडेक्स में लगभग 3% तक की गिरावट आई, जो पिछले साल अप्रैल के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। जापान के निक्केई की बात करें तो 2.3% लुढ़क गया। अमेरिकी बाजारों के संकेतक S&P 500 के ई-मिनी फ्यूचर्स 0.6% नीचे रहे।
दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में हालात और बिगड़ गए। इस दौरान, विदेशी निवेशकों ने 3 अरब डॉलर से अधिक के शेयर बेच दिए। इसका असर ये हुआ कि कोस्पी 7.2% टूट गया। यह अगस्त 2024 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है। तेज उतार-चढ़ाव के चलते कोस्पी फ्यूचर्स में अस्थायी रूप से प्रोग्राम ट्रेडिंग पर रोक लगानी पड़ी।
बढ़ता जा रहा है तनाव
दरअसल, मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष ने ग्लोबली निवेशकों का भरोसा हिला दिया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों तथा तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इस भू-राजनीतिक संकट के चलते ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और तेल कीमतों में उछाल की आशंका से बाजारों में घबराहट फैल गई है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
ब्रोकरेज फर्म Invesco के अनुसार तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से एशियाई बाजार में हाहाकार मच गया है। एशियाई बाजार में ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव बढ़ेगा और विकास दर पर असर पड़ सकता है। फिर भी इन्वेस्को का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि में खरीदारी का अवसर भी साबित हो सकती है। अब सबकी नजरें तेल कीमतों और संघर्ष की अवधि पर टिकी हैं, जो तय करेंगी कि यह गिरावट अस्थायी है या गहरे संकट की शुरुआत।
भारत के पास कितना कच्चे तेल का भंडार
ईरान संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के पास लगभग 40-45 दिन की जरूरत पूरी करने लायक कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। ऊर्जा बाजार विश्लेषण फर्म केप्लर ने यह आकलन जारी किया है। केप्लर के मुताबिक, भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल कॉमर्शियल कच्चे तेल का स्टॉक है। इसमें रिफाइनरियों के पास मौजूद स्टॉक, भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) और देश की ओर आ रहे जहाजों पर लदा तेल शामिल है।
बता दें कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और इसका बड़ा भाग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। भारत प्रतिदिन औसतन करीब 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 25 लाख बैरल तेल प्रतिदिन होर्मुज मार्ग से आता है।




साइन इन