LPG Price Hike: साल में 12 सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले परिवार का खर्च कितना बढ़ा? पूरा हिसाब
LPG महंगा होने से साल में 12 सिलेंडर खर्च करने वालों पर कितना असर पड़ेगा? सामान्य उपभोक्ता को ₹803 अतिरिक्त खर्च पड़ेगा तो उज्ज्वला लाभार्थी ₹2303 अतिरिक्त बोझ। हालांकिएसरकार का दावा आम उपभोक्ता को ₹8400 और उज्ज्वला वालों को ₹12000 की राहत मिलेगी।

घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की हालिया बढ़ोतरी के बाद सरकार ने दावा किया है कि उपभोक्ताओं को अब भी भारी राहत मिल रही है। सरकार के मुताबिक 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक लागत 1,600 रुपये से अधिक है, जबकि उपभोक्ताओं को यह सिर्फ 942 रुपये में मिल रहा है। सरकार के मुताबिक आम उपभोक्ताओं को हर सिलेंडर पर ₹700 की राहत मिल रही है। यानी अगर आप साल में 12 सिलेंडर खर्च करते हैं तो आपको अप्रत्यक्ष रूप 8400 रुपये की राहत मिल जाएगी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा के ने कहा कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को इसके अलावा 300 रुपये अतिरिक्त सब्सिडी भी मिलती है। ऐसे में उन्हें कुल मिलाकर लगभग 1,000 रुपये प्रति सिलेंडर का लाभ मिल रहा है। यानी अगर ये लोग साल में 12 सिलेंडर खर्च करें तो इन्हें 12000 रुपये की राहत मिलेगी।
एक साल में कितना बढ़ जाएगा आम आदमी के किचन का बजट
अगर जनवरी 2026 से देखें तो शुरू के दो महीने गैस के मद में किचन के बजट पर कोई असर नहीं पड़ा। अगर आपके घर में हर महीने 12 सिलेंडर की खपत है और मान लें कि आपने मार्च में सिलेंडर 7 तारीख के बाद रिफिल कराया है तो आपको मार्च से मई तक 120 रुपए अधिक खर्च करना पड़ा।
इसके बाद 7 जून को अगर आपने सिलेंडर लिया है तो जून में सिलेंडर के मद में आपकी जेब 89 रुपए ढीली हुई। मान लें दिसंबर तक अब कोई बदलाव नहीं होता और रेट इसी स्तर पर टिके रह गए तो आपके किचन के बजट पर प्रत्यक्ष रूप से 803 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
उज्ज्वला लाभार्थियों को डबल झटका
यह सही है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम पहले चार सिलेंडर पर 1000-1000 रुपये का फायदा हो रहा है, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से इन्हें दाम बढ़ने और सब्सिडी में कटौती की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
इसे ऐसे समझें। इस वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक केवल 4 सिलेंडर पर ही सब्सिडी मिलेगी। पहले 9 सिलेंडर पर कुल 2700 रुपए की सब्सिडी मिलती थी। यह घटकर अब 1200 रुपए रह गई है। इसका मतलब यह है कि 1500 रुपए का सीधा नुकसान।
उज्ज्वला लाभार्थियों की जेब कितनी होगी हल्की
अब आते हैं सालाना घरेलू बजट पर। अगर इसकी अवधि 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 मान लें तो इन गरीब उपभोक्ताओं के किचन के बजट पर बहुत अधिक असर पड़ेगा।
अगर उज्ज्वला योजना का लाभार्थी इस अवधि में 12 सिलेंडर इस्तेमाल करता है तो उसे कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। अप्रैल, मई, जून और जुलाई तक तो उसे सब्सिडी वाला सिलेंडर मिल जाएगा, लेकिन जो दाम मार्च और जून में बढ़े हैं, उसका बोझ तो सहना ही पड़ेगा। यानी पूरे एक साल में इन्हें भी 803 रुपए का बोझ दाम बढ़ने का पड़ेगा और 1500 रुपए का नुकसान सब्सिडी का भी होगा। कुल बोझ उनपर 2303 रुपए का पड़ेगा।
क्या साल में केवल 4 ही सिलेंडर यूज करते हैं उज्ज्वला लाभार्थी?
सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी केवल साल के पहले चार रिफिल तक सीमित है। इसके पीछे तर्क यह दिया गया है कि उज्ज्वला परिवार औसतन साल में 4-5 सिलेंडर ही उपयोग करते हैं।
सरकार ने ₹29 की बढ़ोतरी को बताया मामूली
सरकार ने एलपीजी कीमत में हालिया 29 रुपये की वृद्धि को "बहुत मामूली" बताया है। मंत्रालय के अनुसार, यदि कोई परिवार साल में 12 सिलेंडर उपयोग करता है तो यह बढ़ोतरी प्रति दिन लगभग 1 रुपये और परिवार के प्रत्येक सदस्य पर करीब 20 पैसे प्रतिदिन के बराबर बैठती है।
कुल मिलाकर सरकार का दावा अपनी जगह सही है। आम ग्राहकों और उज्जवला योजना के लाभार्थियों को लाभ तो मिल रहा है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से। अगर रियल्टी देखें तो उनकी जेब तो ढीली ही हो रही है।




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