दिवालिया कंपनी के अधिग्रहण की जंग: अडानी समूह ने वेदांता के प्रपोजल पर उठाए सवाल
जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण मामले में अडानी समूह ने अपना पक्ष एनसीएलएटी के सामने रखा है। अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा कि जेपी एसोसिएट्स के समाधान पेशेवर द्वारा बोलीदाताओं से कुछ खास पहलुओं पर जानकारी मांगने को अनियमितता नहीं माना जा सकता है।
जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण मामले में गौतम अडानी समूह ने अपना पक्ष एनसीएलएटी के सामने रखा है। इसके साथ ही वेदांता के उस प्रपोजल पर भी सवाल खड़े किए हैं जिसके जरिए जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण की योजना बनाई जा रही थी। अडानी समूह की कंपनी- अडानी एंटरप्राइजेज ने एनसीएलएटी से कहा कि जेपी एसोसिएट्स के समाधान पेशेवर द्वारा बोलीदाताओं से कुछ खास पहलुओं पर जानकारी मांगने को अनियमितता नहीं माना जा सकता और इसे चुनौती देना कर्जदाताओं के व्यावसायिक निर्णय की न्यायिक समीक्षा की एक तरह से अनुमति देने जैसा होगा।
क्या कहा अडानी के वकील ने?
दिवाला समाधान प्रक्रिया में विजेता घोषित अडानी एंटरप्राइजेज की तरफ से वरिष्ठ वकील रितिन राय ने दलील दी कि जिस मूल्यांकन मानदंड को वेदांता लिमिटेड ने चुनौती दी है, उसे प्रक्रिया की शुरुआत से ही सभी पक्षों के साथ साझा किया गया था और सभी बोलीदाताओं ने इसे स्वीकार किया था।
राय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) की सुनवाई के दौरान कहा कि चुनौती प्रक्रिया समाप्त होने के बाद वेदांता द्वारा दिया गया संशोधित प्रस्ताव अगर स्वीकार कर लिया जाता तो पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती थी। अब न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य (तकनीकी) बरुण मित्रा की पीठ बुधवार को मामले में आगे की सुनवाई करेगी। इस दौरान समाधान पेशेवर, सीओसी और अडानी एंटरप्राइजेज की दलीलों का वेदांता की तरफ से जवाब दिया जाएगा।
कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने कुछ अस्पष्टताओं की पहचान कर समाधान पेशेवर को सभी आवेदकों से स्पष्टीकरण लेने को कहा था, जिसके बाद पांच नवंबर को सभी से ईमेल के जरिए जवाब मांगा गया। राय ने कहा कि जेपी एसोसिएट्स के लिए नियुक्त समाधान पेशेवर ने कोई स्वतंत्र या एकतरफा फैसला नहीं लिया बल्कि केवल सीओसी के निर्देशों को सूचित करने का काम किया। इस तरह के आचरण को किसी भी तरह की महत्वपूर्ण अनियमितता नहीं माना जा सकता।
वेदांता की दलील
वेदांता की तरफ से रखी गई दलीलों में कहा गया था कि उसका प्रस्ताव कुल मूल्य में लगभग 3400 करोड़ रुपये और नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर करीब 500 करोड़ रुपये अधिक है। हालांकि, राय ने कहा कि केवल एनपीवी के मामले में सबसे अधिक होना बोली में विजेता बनने की गारंटी नहीं देता। इससे पहले, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बोली प्रक्रिया में जानकारी लीक होने की आशंका जताते हुए कहा था कि वेदांता ने आठ नवंबर 2025 को चुनौती प्रक्रिया समाप्त होने के बाद संशोधित प्रस्ताव दिया था।
वेदांता ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की इलाहाबाद पीठ के 17 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी गई थी।




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