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बिहार में खत्म होगी शराबबंदी? अब NDA के साथी भी करने लगे डिमांड, मानेंगे नीतीश कुमार?

मांझी ने दावा किया कि प्रतिबंध के शिकार ज्यादातर लोग वंचित वर्गों से हैं और यह नीति राज्य को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचा रही है। यह पहला मौका नहीं है जब मांझी ने इस तरह की मांग की।

Thu, 19 Feb 2026 10:22 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार में खत्म होगी शराबबंदी? अब NDA के साथी भी करने लगे डिमांड, मानेंगे नीतीश कुमार?

केंद्र में एनडीए सरकार की ऐतिहासिक वापसी के महज तीन महीने बाद ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने ही गठबंधन सहयोगियों के भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। सहयोगी दलों ने राज्य में एक दशक से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की मांग उठाई है। इस कानून के कारण राज्य में अब तक 8 लाख से अधिक लोग कानूनी मुकदमों का सामना कर रहे हैं। इस बहस की शुरुआत हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कानून की समीक्षा का पुरजोर समर्थन के साथ हुई। उन्हें एनडीए के एक और घटक दल का साथ मिली।

मांझी ने दावा किया कि प्रतिबंध के शिकार ज्यादातर लोग वंचित वर्गों से हैं और यह नीति राज्य को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचा रही है। यह पहला मौका नहीं है जब मांझी ने इस तरह की मांग की। आपको बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के एक विधायक ने भी कानून की समीक्षा की मांग की है।

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गया में पत्रकारों से बात करते हुए मांझी ने बुधवार को कहा, “शराबबंदी से बिहार सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है और नीतीश कुमार को इस पर ध्यान देना चाहिए।” उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा, “शराबबंदी तो हो नहीं रही है। होम डिलीवरी हो रही है।” समीक्षा की मांग करते हुए मांझी ने बताया कि अदालतों में शराबबंदी से संबंधित लंबित 8 लाख से अधिक मामलों में से 3.5 से 4 लाख मामले अकेले वंचित वर्गों के खिलाफ हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, "लेकिन जो अधिक चिंताजनक है, वह यह है कि बिहार में मुख्य रूप से जहरीली शराब पहुंच रही है और गरीबों को मार रही है क्योंकि वे सस्ती दर पर उपलब्ध हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी शराब गरीबों की उम्र कम कर रही है और उन्हें बीमारियों का शिकार बना रही है। मांझी ने कहा कि शराब नीति गलत नहीं है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में खामियां हैं।

उन्होंने कहा, "शराबबंदी लागू होनी चाहिए। हालांकि, इसके कार्यान्वयन में खामियां हैं। इसीलिए हम बार-बार नीतीश को इसकी समीक्षा के बारे में बता रहे थे।" उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन अधिकारी गरीब व्यक्तियों को गिरफ्तार कर रहे हैं जबकि “जो बड़े पैमाने पर तस्करी करते हैं, उन्हें पैसे लेकर छोड़ दिया जा रहा है।”

कुशवाहा की पार्टी ने भी उठाए सवाल

मांझी से एक दिन पहले राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने भी सदन में इसी तरह की मांग की थी। पार्टी विधायक माधव आनंद ने विस्तृत समीक्षा की मांग की, हालांकि सरकार ने इसे खारिज कर दिया। आनंद ने नीतीश कुमार की मौजूदगी में ही मुद्दा उठाते हुए कहा, "कानून तो पारित हो गया लेकिन शराब होम डिलीवरी के माध्यम से उपलब्ध है।" उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को राजस्व का नुकसान हुआ है।

JDU ने समीक्षा की मांग को बताया हास्यास्पद

जेडीयू ने इस मांग को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि कानून आम सहमति से पारित किया गया था। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने पूछा, "सबसे पहले, सभी दल आम सहमति पर पहुंचे और फिर उन्होंने सदन के पटल पर शपथ ली। तो समीक्षा किस बात की?" उन्होंने दावा किया कि शराबबंदी के बाद जनता का विश्वास बढ़ा है और महिलाएं विकास के नए अध्याय लिख रही हैं।

एनडीए के घटक दलों की इस मांग के बाद अब सबकी निगाहें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जा टिकी हैं। यह उनकी महत्वाकांक्षी पहल है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस कानून में किसी भी तरह के संसोधन के लिए तैयार होते हैं या नहीं।

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