नीतीश सरकार की शराबबंदी कानून को एंबुलेंस ड्राइवर ने रौंदा? नशे में 6 पर चढ़ाई गाड़ी; छात्र की मौत
ब्रेथ एनालाइजर जांच में चालक के शराब पीने की पुष्टि हुई। वह बनकटवा के बकुलिया गांव की आठ माह की गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जा रहा था।

बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून की एक एंबुलेंस ड्राइवर ने धज्जियां उड़ा दी। जीप स्टैंड के समीप नहर रोड पर शुक्रवार शाम शराब के नशे में धुत निजी एंबुलेंस ड्राइव ने तांडव मचा दिया। तेज रफ्तार एंबुलेंस ने करीब एक किमी के दायरे में आधा दर्जन राहगीरों को टक्कर मार दी। इसमें 15 वर्षीय छात्र केशव कुमार उर्फ कुणाल की मौके पर मौत हो गई। हादसे में उसका चचेरा भाई आकाश कुमार (14 वर्ष) गंभीर रूप से घायल है।
कुणाल भेलवा गांव निवासी शिक्षक उमाशंकर राम का पुत्र था और आठवीं कक्षा का छात्र था। वह अपने चचेरे भाई आकाश के साथ कोचिंग से पढ़कर घर लौट रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एंबुलेंस की रफ्तार देख लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने एंबुलेंस को घेर लिया और चालक संदीप कुमार उर्फ भट्टू यादव को पकड़कर उसकी जमकर धुनाई कर दी। पुलिस ने चालक को हिरासत में ले लिया।
इस मामले में पुलिस इंस्पेक्टर रंजय कुमार ने कहा, ‘ब्रेथ एनालाइजर’ जांच में चालक के शराब पीने की पुष्टि हुई है। एंबुलेंस आदापुर थाना क्षेत्र के झिटकहिंया निवासी किसी व्यक्ति की है। चालक बनकटवा के बकुलिया गांव की आठ माह की गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जा रहा था। गाड़ी पर गर्भवती के होने के बावजूद नशा पान करने से लोग काफी गुस्से में आ गए। पिटाई से घायल गिरफ्तार ड्राइवर का इलाज कराया गया। पुलिस कानूनी कार्रवाई कर रही है।
बिहार में साल 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इसके तहत राज्य की सीमा में शराब का उत्पादन, भंडारण, परिवहन, पीना और पिलाना सब गैरकानूनी है। अब तक लाखों की संख्या में केस दर्ज हो चुके हैं और लाखों आरोपी जेल जा चुके हैं। अरबों की संपत्ति सरकार जब्त कर चुकी है। शराब पीने या माफिया का साथ देने वाले कई अधिकारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। इसके बावजूद राज्य में शराब का व्यापार और व्यवहार खत्म नहीं हो रहा है। दूसरे राज्यों से शराब की खेप बिहार लाई जा रही है। स्थानीय स्तर पर अवैध उत्पादन भी हो रहा है। नकली और जहरीली शराब पीकर सैंकड़ों की जान अबतक जा चुकी है।




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